सीतामढ़ी के मेहसौल आरओबी निर्माण ने पकड़ी रफ्तार, अगस्त तक जाम से मिल सकती मुक्ति
Sitamarhi Mehsaul ROB Construction:सीतामढ़ी के मेहसौल रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है, जहां अब भारी क्रेनों से स्लैब और गार्डर चढ़ान ...और पढ़ें

निर्माण कंपनी द्वारा क्रेनों की मदद से स्लैब और गार्डर चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। फोटो: जागरण

समय कम है?
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संवाद सूत्र, सीतामढ़ी। Mehsaul Flyover Approach Road: सीतामढ़ी शहरवासियों को वर्षों से मेहसौल रेलवे गुमटी पर लगने वाले भीषण जाम से मुक्ति मिलने के दिन अब बेहद करीब आ गए हैं। मेहसौल रेलवे गुमटी संख्या 56ए पर बन रहे बहुप्रतीक्षित रेलवे ओवर ब्रिज (ROB) के प्लेटफॉर्म निर्माण ने रफ्तार पकड़ ली है।
निर्माण कंपनी द्वारा भारी क्रेनों की मदद से लोहे का स्लैब और गार्डर चढ़ाने की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू कर दी गई है। इस बड़े अपडेट के बाद माना जा रहा है कि ओवरब्रिज का मुख्य ढांचा जल्द ही आकार ले लेगा।
62 मीटर लंबा धनुषाकार गार्डर
रेलवे ने अपने अधिकार क्षेत्र में भव्य धनुषाकार पुल बनाने के लिए कार्यस्थल के पास ही लोहे के एंगल से चौकोर प्लेटफॉर्म तैयार कर लिया है। इसी प्लेटफॉर्म पर अब क्रेनों की मदद से लोहे के भारी स्लैब चढ़ाए जा रहे हैं, जिसके बाद मुख्य धनुषाकार गार्डर की असेंबलिंग शुरू होगी।
निर्माण कंपनी के कनीय सुपरवाइजर गौरव कुमार और विभाग के अभियंता आरबी राय ने बताया कि इस धनुषाकार गार्डर को पूरी तरह तैयार करने में तकरीबन एक महीने का समय लगेगा। यह गार्डर 62 मीटर लंबा और 15 मीटर चौड़ा होगा।
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विभाग का लक्ष्य है कि सब कुछ ठीक रहा तो अगस्त के पहले सप्ताह या अधिकतम 15 अगस्त तक इस भारी-भरकम गार्डर को गुमटी के दोनों तरफ तैयार पिलरों पर सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया (चढ़ा दिया) जाएगा।
पहुंच पथ का अंतिम चरण
दूसरी तरफ, आरओबी के पहुंच पथ (अप्रोच रोड) का निर्माण करा रहे बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के अभियंता पंकज कुमार ने बताया कि पहुंच पथ का कुछ हिस्सा सिर्फ इसलिए रुका हुआ है क्योंकि रेलवे को गार्डर असेंबल करने और क्रेन संचालन के लिए खाली जगह की जरूरत है।
जैसे ही रेलवे गार्डर को पिलर पर चढ़ा देगा, अप्रोच रोड का काम भी तुरंत पूरा कर लिया जाएगा। कंपनी का प्रयास है कि सीतामढ़ी से मेहसौल चौक होते हुए सोनबरसा, भिट्ठामोड़ (इंडो-नेपाल बॉर्डर) तथा पुपरी-मधुबनी को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण मार्ग को एक साथ फाइनल टच देकर जिला प्रशासन को सौंप दिया जाए।
सीतामढ़ी शहर की लाइफलाइन माने जाने वाले मेहसौल रेलवे ओवरब्रिज (ROB - गुमटी संख्या 56ए) के बजट में समय के साथ कई बड़े बदलाव और संशोधन हुए हैं। इस आरओबी के निर्माण की वर्तमान अनुमानित लागत लगभग 86 करोड़ रुपये से 120 करोड़ रुपये के बीच पहुंच चुकी है।
यह प्रोजेक्ट केंद्र (भारतीय रेलवे) और राज्य सरकार (बिहार सरकार) के बीच 50:50 के कॉस्ट शेयरिंग फॉर्मूले पर आधारित है। आधी राशि रेलवे मुख्य ब्रिज के हिस्से पर खर्च कर रहा है, जबकि बाकी आधी राशि बिहार राज्य पुल निर्माण निगम पहुंच पथ के निर्माण पर खर्च कर रहा है।
उत्तर बिहार को मिलने वाले 5 बड़े फायदे
- भीषण जाम से हमेशा के लिए मुक्ति: वर्तमान में सीतामढ़ी रेलवे स्टेशन के नजदीक होने के कारण मेहसौल गुमटी दिनभर में दर्जनों बार बंद होती है। फाटक गिरते ही दोनों तरफ गाड़ियों की मील लंबी कतारें लग जाती हैं। आरओबी बनने के बाद वाहन बिना रुके ऊपर से सीधे पार हो सकेंगे।
- आधा दर्जन जिलों को सीधा लाभ: यह मार्ग केवल सीतामढ़ी के लिए नहीं बल्कि दरभंगा, मधुबनी, शिवहर, पूर्वी चंपारण और मुजफ्फरपुर के लोगों के लिए मुख्य लाइफलाइन है। आरओबी बनने से इन सभी जिलों के बीच का सफर बेहद आसान और समय की बचत करने वाला हो जाएगा।
- नेपाल बॉर्डर और सामरिक कनेक्टिविटी: यह ओवरब्रिज आगे चलकर एनएच-104 (NH-104) को जोड़ता है, जो सीधे भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सोनबरसा और भिट्ठामोड़ चेकपोस्ट को जाता है। इसके बनने से भारत-नेपाल व्यापार को गति मिलेगी और सीमा सुरक्षा बलों (SSB) के वाहनों का आवागमन भी तेज होगा।
- Y-Shape डिजाइन से डबल कनेक्टिविटी: मेहसौल गुमटी पार करने के बाद यह ओवरब्रिज आगे जाकर दो हिस्सों (Y-Shape) में बंट जाएगा। इसका एक हिस्सा एनएच-104 (सोनबरसा/भिट्ठामोड़) की तरफ जाएगा, जबकि दूसरा हिस्सा एसएच-52 (State Highway-52) की तरफ उतरेगा, जो बाजपट्टी और पुपरी के रास्ते सीधे दरभंगा और मधुबनी को जोड़ेगा।
- मरीजों के इलाज के लिए वरदान: जाम के कारण कई बार एंबुलेंस और गंभीर मरीज इस गुमटी पर घंटों फंसे रहते थे। पुल चालू होने से जिला मुख्यालय के बड़े अस्पतालों और मुजफ्फरपुर (SKMCH) या पटना रेफर होने वाले मरीजों को 'गोल्डन ऑवर' में समय पर इलाज मिल सकेगा।
प्रभारी मंत्री से मिले पूर्व विधायक
इस बीच, इस महापरियोजना को वित्तीय अड़चनों से बचाने के लिए राजनीतिक स्तर पर भी प्रयास तेज हो गए हैं। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता सह पूर्व नगर विधायक डॉ. मिथिलेश कुमार ने राज्य की उद्योग सह जिले की प्रभारी मंत्री श्रेयसी सिंह से मुलाकात की।
इस मुलाकात के दौरान पूर्व विधायक ने मेहसौल आरओबी के पहुंच पथ के निर्माण में भूमि अधिग्रहण या तकनीकी कारणों से हुई लागत वृद्धि पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने प्रभारी मंत्री से आग्रह किया कि बढ़ी हुई राशि को राज्य कैबिनेट (मंत्रिमंडल) से जल्द से जल्द प्रशासनिक स्वीकृति दिलाई जाए ताकि फंड की कमी के कारण काम न रुके।
उन्होंने मंत्री को बताया कि यह पुल शहर की लाइफलाइन है और इसके चालू होते ही सीतामढ़ी को ट्रैफिक जाम से हमेशा के लिए निजात मिल जाएगी।