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    नकली मां को सौंप दी गई थी नाबालिग, सीतामढ़ी CWC अध्यक्ष समेत सभी सदस्यों की बर्खास्तगी की सिफारिश

    Updated: Mon, 13 Jul 2026 08:56 PM (GMT+05:30)

    सीतामढ़ी में एक नाबालिग बच्ची को नकली मां को सौंपने के मामले में जिलाधिकारी रिची पांडेय ने चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के अध्यक्ष और सभी सदस्यों की नियुक्ति ...और पढ़ें

    इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है। ( फोटो- AI )

    इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है। ( फोटो- AI )

    HighLights

    1. नाबालिग बच्ची को नकली मां को सौंपा गया।

    2. डीएम ने CWC अध्यक्ष-सदस्यों की बर्खास्तगी की सिफारिश की।

    3. जांच में CWC की गंभीर लापरवाही सामने आई।

    जागरण संवाददाता, सीतामढ़ी । नाबालिग बच्ची को नकली मां के हवाले किए जाने और मामले में बच्ची के पिता द्वारा दिए गए आवेदन के आलोक में जिलाधिकारी रिची पांडेय ने समाज कल्याण विभाग से संचालित चाइल्ड वेलफेयर कमेटी, सीतामढ़ी के अध्यक्ष एवं सभी सदस्यों की नियुक्ति समाप्त करने की अनुशंसा की है।

    साथ ही इस प्रकरण में जांच के दौरान चिह्नित अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध विधिसम्मत एवं आवश्यक कार्रवाई करने की भी अनुशंसा की है।

    जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में शहर के रेड लाइट एरिया से एक नाबालिग बालिका को पुलिस द्वारा मुक्त कराकर विधि के अनुरूप चाइल्ड वेलफेयर कमेटी, सीतामढ़ी के समक्ष प्रस्तुत किया गया था।

    समिति के आदेश पर बालिका को वन स्टाप सेंटर में रखा गया। बाद में उस बालिका को सिवान जिला स्थित आश्रय गृह भेजा गया। इसी बीच नफीसा खातून नामक एक महिला ने दावा किया कि वह उक्त बच्ची की मां है।

    इस कथित मां के दावे पर बाल कल्याण समिति, सीतामढ़ी के आदेश पर उक्त बच्ची को नफीसा खातून को सिपुर्द कर दिया गया। बाद में बालिका के पिता को जब इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने आवेदन देकर बताया कि उक्त बच्ची उनके घर नहीं पहुंची है और उसे मुक्त करानेवाली महिला उसकी असली मां नहीं है।

    उपलब्ध तथ्यों के आधार पर पुलिस द्वारा नया कांड दर्ज किया गया। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए डीएम रिची पांडेय द्वारा त्रिस्तरीय जांच समिति का गठन किया गया।

    समिति ने विस्तृत जांच कर अपना प्रतिवेदन समर्पित किया। जांच प्रतिवेदन के सूक्ष्म परीक्षण के बाद डीएम ने समाज कल्याण विभाग को भेजे गए अपने विस्तृत प्रतिवेदन में उल्लेख किया है कि जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्यों, पीड़िता के कथनों, उपलब्ध अभिलेखों, प्राथमिकी, न्यायालय में दिए गए बयानों तथा सामाजिक जांच प्रतिवेदन के समग्र परीक्षण से चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की कार्यप्रणाली में गंभीर त्रुटियां एवं लापरवाही परिलक्षित हुई हैं।

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    जांच रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि तथ्यों एवं साक्ष्यों का समुचित मूल्यांकन नहीं किया गया तथा कई महत्वपूर्ण परिस्थितियों की अपेक्षित गंभीरता से समीक्षा किए बिना निर्णय लिया गया।

    सामाजिक जांच प्रतिवेदन, शपथ-पत्र, प्रमाण-पत्र एवं अन्य अभिलेखों के संबंध में भी कई गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं, जिनकी जांच एवं विधिसम्मत कार्रवाई अपेक्षित है।

    डीएम ने अपने प्रतिवेदन में स्पष्ट किया है कि किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत गठित संस्थाओं का दायित्व अत्यंत महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील है।

    ऐसे मामलों में कानून के अनुरूप निष्पक्ष, पारदर्शी एवं तथ्याधारित निर्णय लिया जाना अनिवार्य है। यदि किसी स्तर पर शक्तियों का दुरुपयोग, कर्तव्य की उपेक्षा अथवा बाल संरक्षण के उद्देश्य के विपरीत कार्य किया जाता है तो उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई होना आवश्यक है।

    उक्त तथ्यों के आधार पर डीएम ने समाज कल्याण विभाग से चाइल्ड वेलफेयर कमेटी, सीतामढ़ी के अध्यक्ष एवं सभी सदस्यों की नियुक्ति समाप्त करने तथा प्रकरण में जांच के दौरान चिन्हित अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध भी विधिसम्मत एवं आवश्यक कार्रवाई करने की अनुशंसा की है।