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    रिशु श्री के जाल में फंसे थे बड़े अफसर? बिहार में अब खुल रही परत-दर-परत कहानी

    Updated: Wed, 03 Jun 2026 07:27 PM (GMT+05:30)

    सीतामढ़ी में 'टेंडर किंग' रिशु श्री के तार पूर्व जिलाधिकारी अभिलाषा कुमारी शर्मा और पूर्व नगर आयुक्त मुमुक्षु चौधरी से जुड़े पाए गए हैं। ईडी के बयान क ...और पढ़ें

    सीतामढ़ी नगर निगम कार्यालय।

    सीतामढ़ी नगर निगम कार्यालय।

    HighLights

    1. रिशु श्री के तार सीतामढ़ी से जुड़े, पूर्व DM निलंबित.

    2. पूर्व नगर आयुक्त मुमुक्षु चौधरी के कार्यकाल की जांच.

    3. ईडी के बयान से 4 करोड़ के ठेके का खुलासा.

    दीपक कुमार, सीतामढ़ी । राज्य के "टेंडर किंग" कहे जाने वाले रिशु श्री का तार सीतामढ़ी से भी जुड़ गया है। रिशु श्री के जाल में यहां की तत्कालीन जिलाधिकारी अभिलाषा कुमारी शर्मा ही नहीं बल्कि सीतामढ़ी नगर निगम के तत्कालीन नगर आयुक्त मुमुक्षु चौधरी भी फंसे हुए थे। अभिलाषा कुमारी शर्मा इस मामले में निलंबित हो चुकी है।

    वहीं प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) में मुमुक्षु चौधरी द्वारा दिए गए बयान से एक बार फिर सीतामढ़ी जिला सुर्खियों में है। इनके बयान के बाद आला अधिकारियों की नजर 2019 से 2022 तक जिले और शहर में विभिन्न योजनाओं से कराए गए कार्यों पर टिक गई है।

    निगरानी विभाग के अधिकारियों ने नगर निगम से तत्कालीन नगर आयुक्त मुमुक्षु चौधरी के कार्यकाल 2019 से 2022 तक विभिन्न योजनाओं में कराए गए कार्य एवं खरीद की गई सामग्रियों से संंबंधित अभिलेख तलब किया है।

    बताया जाता है कि बिहार प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मुमुक्षु चौधरी जिले में नगर आयुक्त के अलावा कई विभागों का प्रभार में रहे। मुमुक्षु चौधरी वर्ष 2012 में रिशुश्री के संपर्क में आए। उस समय यहां की जिलाधिकारी अभिलाषा कुमारी शर्मा थीं। उस समय जिलाधिकारी के चहेते अफसरों में मुमुक्षु चौधरी का नाम सबसे आगे रहता था।

    शायद यही कारण था कि उन्हें कई विभागों का प्रभार भी मिला था। मुमुक्षु चौधरी जिले में मुख्य रूप से जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) के सहायक निदेशक के पद पर पदस्थापित रहे।

    उन्होंने पहली मार्च 2019 को इस पर योगदान दिया था। इसके बाद उन्हें इसके अतिरिक्त जिला आपूर्ति पदाधिकारी, प्रभारी पदाधिकारी, नगर आयुक्त नगर निगम सीतामढ़ी, गोपनीय प्रशाखा आदि विभागों का प्रभार मिलता गया।

    मुमुक्षु चौधरी ने ईडी के समक्ष अपने दर्ज बयान में कहा है कि तैनाती के दौरान वर्ष 2012 से ही उनकी रिशु श्री से पहचान हुई थी। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने सीतामढ़ी में चार करोड़ रुपये का ठेका रिशु श्री को दिया था।

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    इससे पहले सीतामढ़ी नगर निगम में अतिरिक्त प्रभार के रूप में नगर आयुक्त की पोस्टिंग दिलाने में रिशु श्री ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके लिए कथित तौर पर 25 लाख रुपये खर्च किए गए थे, जिसकी भरपाई बाद में सैनिटेशन टेंडर से होने वाले मुनाफे से की जानी थी।

    मुमुक्षु चौधरी जिले में डीआरडीए निदेशक के रूप में पहली मार्च 2019 से 21 नंबर 2022 तक रहे। नगर निगम गठन के बाद वर्ष 2020 में निगम आयुक्त की अधिसूचना जारी हुई थी, तब से उस पद पर बहाली का इंतजार था।तब मुमुक्षु सीतामढ़ी नगर निगम के पहले आयुक्त बने थे। नगर आयुक्त पद पर रहते हुए उनके कार्यकाल मे कई बड़े उपकरण जैसे जेसीबी, ट्रैक्टर आदि की खरीद की गई थी।

    मुमुक्षु के कार्यकाल की खोले जा रहे एक-एक पन्ने

    तत्कालीन डीएम अभिलाषा कुमारी शर्मा के विरुद्ध हुई कार्रवाई एवं तत्कालीन नगर आयुक्त रहे मुमुक्षु चौधरी द्वारा दिए गए बयान के बाद अब मुमुक्षु चौधरी के कार्यकाल की पूरी कुंडली खंगाली जा रही है।

    नगर निगम प्रशासन उनके कार्यकाल के एक-एक पन्ने को खोलकर जांच पड़ताल कर रहा है। संभावना व्यक्त की जा रही है इनके कार्यकाल की कुंडली खंगालने के लिए निगरानी टीम यहां भी आ सकती है। इसके लिए उनके कार्यकाल से जुड़े कार्यों की लिस्टिंग कर ली गई है और उसके अनुसार आवश्यक कागजात व संचिकाएं निकाली जा रही हैं।

    निगरानी की टीम ने तत्कालीन नगर आयुक्त के कार्यकाल से जुड़ी विभिन्न योजनाओं, उपकरण एवं सामग्रियों के क्रय से संंबंधित कागजात और संचिकाओं की मांग की है। इसे संग्रहित किया जा रहा है। इसे शीघ्र भेज दिया जाएगाा।
    -गजेंंद्र कुमार सिंह, नगर आयंक्त, नगर निगम सीतामढ़ी।