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    सिवान में स्थित है 165 साल पुराना शंकर-पार्वती मंदिर, ठरेश्वरी बाबा ने एक पैर पर की थी 14 वर्ष तपस्या

    Updated: Wed, 05 Aug 2026 09:08 AM (GMT+05:30)

    सिवान के मुरारपट्टी गांव का 165 साल पुराना शंकर-पार्वती मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। संत ठरेश्वरी बाबा द्वारा स्थापित यह मंदिर मनोक ...और पढ़ें

    165 साल पुराना शंकर-पार्वती मंदिर

    165 साल पुराना शंकर-पार्वती मंदिर

    HighLights

    1. 165 साल पुराना शंकर-पार्वती मंदिर बक्सर-सिवान सीमा पर।

    2. संत ठरेश्वरी बाबा ने की थी 14 वर्ष तपस्या।

    3. मनोकामना पूर्ति के लिए प्रसिद्ध, साल भर रहती भीड़।

    जागरण संवाददाता, सिवान। 165 साल पुराना भगवान शंकर व माता पार्वती का मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मुरारपट्टी गांव स्थित प्राचीन श्री शंकर-पार्वती मंदिर की प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैली हुई है। 

    करीब दो सौ वर्ष पुराने इस मंदिर में प्रतिदिन पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। भगवान शिव और माता पार्वती के प्रति लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। लोगों का मानना है कि यहां सच्चे मन से पूजा करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। धार्मिक महत्व के कारण यह मंदिर क्षेत्र के लोगों के लिए प्रमुख आस्था स्थल बन चुका है। विशेष अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ जाती है।

    मंदिर का इतिहास

    ग्रामीणों की मानें तो करीब 1861 में संत ठरेश्वरी बाबा द्वारा मंदिर की आधारशिला रखी गई थी। यह मंदिर 1885 में बनकर तैयार हुआ। मंदिर निर्माण के लिए ग्रामीणों द्वारा करीब साढ़े तीन बीघा भूमि दान की गई थी। इसमें करीब एक बीघा में मंदिर है। 

    मंदिर निर्माण के बाद यहां अनुष्ठान का आयोजन किया गया था। इसके बाद 1919 में पहली बार तथा 1985 में कैप्टन डा. ज्योतिष प्रसाद वर्मा एवं समस्त ग्रामीणों के सहयोग से दूसरी बार जीर्णोद्वार के बाद यज्ञ एवं भंडारा का आयोजन किया गया। वहीं तीसरा जीर्णोद्वार ग्रामीणों के सहयोग से 2014 में कराया गया।

    मंदिर की विशेषता

    मुरारपट्टी गांव स्थित ब्रह्म बाबा स्थान के समीप संत ठरेश्वरी बावा ने 14 वर्षों तक एक पैर पर खड़े होकर कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या के बाद 1861 में गांव में श्रीराम जानकी एवं शिव परिवार मंदिर की स्थापना कराई गई। 

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    मंदिर में भगवान गणेश, शिवलिंग, मां पार्वती, नदीजी, सीता, राम, लक्ष्मण और हनुमान की प्रतिमाएं स्थापित हैं। धार्मिक आस्था के इस केंद्र पर रामनवमी, महाशिवरात्रि, सावन, कृष्ण जन्माष्टमी, दशहरा सहित विभिन्न पर्वों पर पूजा-अर्चना, कार्यक्रम और मेले का आयोजन होता है। श्रद्धालुओं की यहां सालभर आवाजाही रहती है।

    मंदिर जाने का रास्ता

    रघुनाथपुर प्रखंड मुख्यालय से एक किलोमीटर पूर्व रघुनाथपुर-मांझी मुख्य पथ के दक्षिण स्थित यह स्थल लोगों के लिए आसानी से पहुंच योग्य है। यहां आने-जाने के लिए निजी सवारी सबसे बेहतर साधन है। स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क मार्ग से आवागमन सुविधाजनक होने के कारण यहां पहुंचने में परेशानी नहीं होती।

    मंदिर में पूजा-अर्चना करने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है। मन्नत पूरी होने पर भक्तों द्वारा विशेष अनुष्ठान और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित कराए जाते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि प्रभु की कृपा से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। मंदिर में भक्तों की आस्था निरंतर बढ़ रही है। - परमहंस पांडेय, पुजारी

    ठरेश्वरी बाबा की तपस्या स्थली के रूप में प्रसिद्ध प्राचीन मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां सावन, नवरात्र सहित वर्षभर श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में भक्तों की सुविधा के लिए धर्मशाला का निर्माण कराया गया है, जहां दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु ठहर सकते हैं। - पप्पू वर्मा, श्रद्धालु