धनतेरस पर शाम 6:02 से 7:57 बजे तक करें यह काम, अकाल मृत्यु का भय होगा दूर
बिहार में लक्ष्मी नारायण योग के शुभ संयोग में शुक्रवार को धनतेरस मनाया जाएगा, जिससे पांच दिवसीय दीपोत्सव का आरंभ होगा।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।
HighLights
लक्ष्मी नारायण योग में शुक्रवार को धनतेरस का पर्व।
भगवान धन्वंतरि, लक्ष्मी, कुबेर की पूजा से सुख-समृद्धि।
धनतेरस पर शुभ मुहूर्त में खरीदारी से वृद्धि की मान्यता।
जागरण संवाददाता, सिवान। लक्ष्मी नारायण योग के शुभ संयोग में शुक्रवार को धनतेरस का पर्व मनाया जाएगा। इसी के साथ पांच दिवसीय दीपोत्सव का भी शुभारंभ हो जाएगा।
धन, आरोग्य और सुख-समृद्धि की कामना को लेकर श्रद्धालु भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा-अर्चना करेंगे।
वहीं, पर्व को लेकर जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक बाजार सजकर तैयार हैं। बर्तन, सोने-चांदी के आभूषण, इलेक्ट्रानिक्स, कपड़े और पूजन सामग्री की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ने लगी है।
मान्यता है कि धनतेरस के दिन शुभ मुहूर्त में खरीदारी करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है और धन-धान्य में वृद्धि होती है।
आंदर के पड़ेजी निवासी आचार्य पंडित उमाशंकर पांडेय ने बताया कि भगवान धन्वंतरि की पूजा के लिए शुक्रवार को शाम 6:02 बजे से 7:57 बजे तक शुभ मुहूर्त है।
इस अवधि में विधि-विधान से पूजा-अर्चना करना फलदायी माना गया है। उन्होंने बताया कि धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि के साथ माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर की आराधना करने का विशेष महत्व है।
इस दिन श्रद्धालु घरों में दीप जलाने के साथ दक्षिण दिशा में दीपदान भी करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।
धनतेरस से पहले ही बाजारों में बढ़ी रौनक
धनतेरस के एक दिन पूर्व गुरुवार को ही शहर के बाजारों में काफी चहल-पहल देखने को मिली। दुकानदारों ने अपनी दुकानों को आकर्षक ढंग से सजाया है।
दुकानों के आगे सामान सजाकर ग्राहकों को आकर्षित करने की तैयारी की गई है। शहर के जेपी चौक, पन्ना मार्केट, उजांय मार्केट, दरबार, महादेवा रोड, शहीद सराय, थाना रोड, गल्ला मंडी, शांति वट वृक्ष और श्रीनगर सहित प्रमुख बाजारों में खरीदारों की आवाजाही बढ़ गई है।
बर्तन, दीये, भगवान गणेश-लक्ष्मी की प्रतिमाओं, पूजन सामग्री, फल, राशन और कपड़ों की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ अधिक दिखी।
धनतेरस और दीपावली को लेकर सबसे ज्यादा खरीदारी कपड़े और राशन की दुकानों पर हो रही है। वहीं, मोबाइल, एलईडी टीवी और अन्य इलेक्ट्रानिक्स सामान खरीदने वाले ग्राहक पहले ऑनलाइन कीमतों और उत्पादों की जानकारी ले रहे हैं।
इसके बाद बाजार पहुंचकर दुकानों में सामान की गुणवत्ता और कीमत की तुलना कर रहे हैं। स्टेशन रोड स्थित इलेक्ट्रानिक्स दुकानों में भी ग्राहकों की भीड़ देखी गई।
खरीदारी को लेकर लोगों में है काफी उत्साह
त्योहार को लेकर बाजार में खरीदारी के लिए लोगों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। लोग अपनी जरूरत और बजट के अनुसार खरीदारी को प्राथमिकता दे रहे हैं।
ऐसे में बाजारों में रौनक बनी हुई है। दुकानदारों को धनतेरस के दिन अच्छी बिक्री की उम्मीद है। बाजारों में हर आयु वर्ग के लोग खरीदारी के लिए पहुंच रहे हैं। कहीं घर की सजावट के लिए दीये और झालर खरीदे जा रहे हैं तो कहीं पूजा के लिए बर्तन और लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं पसंद की जा रही हैं।
धन और आरोग्य के लिए होती है भगवान धन्वंतरि की पूजा
धनतेरस का पर्व कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। दीपावली से दो दिन पहले आने वाले इस पर्व को धन और आरोग्य का प्रतीक माना जाता है।
आचार्य पंडित उमाशंकर पांडेय के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है। इसलिए इस दिन उनकी पूजा करने से निरोगी जीवन और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की जाती है।
वहीं, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा धन-संपत्ति और समृद्धि के लिए की जाती है। इस दिन बर्तन, सोना-चांदी, अन्य धातुओं और झाड़ू की खरीदारी करने की परंपरा है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, धनतेरस पर खरीदी गई वस्तुओं में तेरह गुणा वृद्धि होती है। शास्त्रों में इस दिन चांदी खरीदना विशेष रूप से सौभाग्यकारी बताया गया है।
यदि चांदी खरीदना संभव नहीं हो तो तांबे या अन्य धातुओं की वस्तुएं भी खरीदी जा सकती हैं। आचार्य ने बताया कि सोना, चांदी और अन्य धातुओं की खरीदारी वृष लग्न में करना शुभ माना जाता है।
मिट्टी के हाथी और धन्वंतरि की तस्वीर स्थापित कर करें पूजन
धनतेरस की पूजा के लिए सबसे पहले पूजा स्थल पर मिट्टी का हाथी और भगवान धन्वंतरि की तस्वीर स्थापित करनी चाहिए। इसके बाद चांदी या तांबे की आचमनी से जल ग्रहण कर भगवान गणेश का ध्यान और पूजन करना चाहिए।
तत्पश्चात हाथ में अक्षत और पुष्प लेकर भगवान धन्वंतरि का ध्यान करते हुए विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। इस दौरान श्रद्धालुओं को धन्वंतरि मंत्र का जाप करना चाहिए।
पूजन मंत्र
देवान कृशान सुरसंघनि पीडितांगान, दृष्ट्वा दयालुर मृतं विपरीतु कामः।
पायोधि मंथन विधौ प्रकटौ भवधो, धन्वन्तरि: स भगवानवतात सदा नः।
ॐ धन्वन्तरि देवाय नमः। ध्यानार्थे अक्षत पुष्पाणि समर्पयामि।।
मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान धन्वंतरि की आराधना करने से परिवार में सुख, शांति, आरोग्य और समृद्धि बनी रहती है। इस दिन दीपदान और खरीदारी के साथ जरूरतमंदों को दान करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।
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