बलिया-छपरा-सिवान से पटना के लिए चलेगी नई MEMU ट्रेन! रेलवे बोर्ड के पास पहुंचेगा बड़ा प्रस्ताव
पूर्वोत्तर रेलवे की मंडल संसदीय समिति की बैठक में रेल विकास और यात्री सुविधाओं पर मंथन हुआ। बलिया-छपरा-सिवान से पटना के लिए डीएमयू/मेमू सेवा शुरू करने ...और पढ़ें

बलिया-छपरा-सिवान के बीच मेमू चलाने का प्रस्ताव। सांकेतिक तस्वीर
HighLights
रेल विकास और यात्री सुविधाओं पर गहन समीक्षा हुई।
बलिया-छपरा-सिवान-पटना मेमू सेवा का प्रस्ताव भेजा गया।
प्रत्येक सांसद के लिए रेलवे नोडल अधिकारी नियुक्त होगा।
जागरण संवाददाता, सिवान। पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मंडल की मंडल संसदीय समिति की बैठक मंगलवार को सारण सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी की अध्यक्षता में संपन्न हुई।
बैठक में रेल परियोजनाओं, यात्री सुविधाओं और विभिन्न संसदीय क्षेत्रों से जुड़े रेल विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
वाराणसी में मंडल संसदीय समिति की बैठक
महाराजगंज सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने अपने क्षेत्र से जुड़े प्रमुख मुद्दों को उठाया। उनके प्रस्ताव पर बलिया-छपरा-सिवान से पटना के लिए डीएमयू/मेमू रेल सेवा शुरू करने के प्रस्ताव को रेलवे बोर्ड को भेजने का निर्देश दिया गया।
सांसद रूडी ने कहा कि रेलवे बोर्ड को भेजे जाने वाले सभी प्रस्ताव स्पष्ट तथ्यों और उद्देश्य के साथ भेजे जाएं, ताकि उन पर शीघ्र निर्णय लिया जा सके।
साथ ही प्रत्येक सांसद के लिए रेलवे का एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्णय लिया गया, जो क्षेत्रीय योजनाओं एवं जनप्रतिनिधियों के साथ नियमित समन्वय स्थापित करेगा।
समपार फाटक, आरयूबी और अंडरपास निर्माण कार्यों की समीक्षा के दौरान बंद होने वाले फाटकों, प्रस्तावित अंडरपास और जलजमाव से प्रभावित स्थलों की सूची तैयार कर कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
अंडरपास, सेनेटरी पैड पर भी चर्चा
जरूरत वाले स्थानों पर नए अंडरपास निर्माण और पुराने अंडरपास को जलजमाव मुक्त बनाने पर भी जोर दिया गया। महिला यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर सेनेटरी पैड उपलब्ध कराने की व्यवस्था को अधिक सरल और सुलभ बनाने पर चर्चा हुई।
सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए मंडल के सभी छोटे-बड़े स्टेशनों पर सीसी कैमरे लगाने तथा केंद्रीकृत मानीटरिंग कंट्रोल रूम स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा गया।
बैठक में रेलवे, नगर निगम, नगर परिषद, पंचायत और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों की संयुक्त समन्वय समिति गठित करने का सुझाव दिया गया। इसका उद्देश्य जल निकासी, सड़क, प्रकाश व्यवस्था और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है।