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    सिवान की श्रेया ने रचा इतिहास: 3 करोड़ की अमेरिकी लिंकन स्कॉलरशिप पाने वाली देश की इकलौती छात्रा

    Updated: Thu, 16 Jul 2026 11:23 PM (IST)

    बिहार के सिवान जिले की श्रेया कौशिक को प्रतिष्ठित लिंकन छात्रवृत्ति के लिए चुना गया है। वह भारत की एकमात्र और विश्व की 10 छात्राओं में से एक हैं, जो अ ...और पढ़ें

    श्रेया कौशिक

    श्रेया कौशिक

    HighLights

    1. श्रेया कौशिक को प्रतिष्ठित लिंकन छात्रवृत्ति के लिए चुना गया।

    2. वह भारत की एकमात्र और विश्व की 10 छात्रों में शामिल।

    3. अमेरिका में स्नातक पढ़ाई के लिए 3 करोड़ रुपये की सहायता।

    जागरण संवाददाता, सिवान। बिहार के सिवान जिले की बेटी श्रेया कौशिक ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल कर जिले और राज्य का नाम रोशन किया है। सिसवन प्रखंड के भैसौड़ा गांव से जुड़ी श्रेया को प्रतिष्ठित चार वर्षीय लिंकन छात्रवृत्ति के लिए चयनित किया गया है।

    इस छात्रवृत्ति के तहत श्रेया अमेरिका में अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी करेंगी। खास बात यह है कि इस छात्रवृत्ति के लिए चयनित होने वाली वह देश की इकलौती छात्रा हैं। वहीं, दुनिया भर के केवल 10 छात्रों को ही इस प्रतिष्ठित छात्रवृत्ति के लिए चुना गया है।

    अमेरिका में पढ़ाई के लिए मिलेगी तीन करोड़ रुपये की सहायता

    लिंकन छात्रवृत्ति के तहत श्रेया को करीब तीन करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। यह राशि अमेरिका में चार वर्षों तक उनकी पढ़ाई और रहने से जुड़े सभी खर्चों को कवर करेगी।

    छात्रवृत्ति में ट्यूशन फीस, रहने और खाने का खर्च, किताबें और अन्य शैक्षणिक सामग्री, हेल्थ इंश्योरेंस, यात्रा खर्च तथा निजी जरूरतों से जुड़े खर्च भी शामिल हैं। इससे श्रेया बिना आर्थिक चिंता के अपनी उच्च शिक्षा पूरी कर सकेंगी।

    राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के सम्मान में दी जाती है छात्रवृत्ति

    श्रेया ने अपनी सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उन्हें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के सम्मान में दी जाने वाली प्रतिष्ठित छात्रवृत्ति प्राप्त होगी।

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    उन्होंने बताया कि इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद से ही वह इस छात्रवृत्ति को हासिल करने के लिए लगातार प्रयास कर रही थीं। वर्षों की मेहनत और समर्पण के बाद उन्हें यह उपलब्धि हासिल हुई है।

    13 वर्षों तक डेक्सटेरिटी स्कूल में की पढ़ाई

    श्रेया ने बताया कि उन्होंने 13 वर्षों तक डेक्सटेरिटी स्कूल ऑफ लीडरशिप एंड एंटरप्रेन्योरशिप में शिक्षा प्राप्त की। इसी दौरान उन्होंने नेतृत्व क्षमता और उद्यमिता से जुड़े कौशल विकसित किए।

    उनका मानना है कि स्कूल के शिक्षकों और मार्गदर्शकों ने उन्हें बड़े लक्ष्य तय करने और उन्हें हासिल करने के लिए प्रेरित किया। इसी का परिणाम है कि आज वह वैश्विक स्तर पर पहचान बनाने में सफल हुई हैं।

    दिल्ली में रहता है परिवार, सिवान से जुड़ी हैं जड़ें

    श्रेया का परिवार वर्तमान में दिल्ली में रहता है। उन्होंने अपनी इंटरमीडिएट की पढ़ाई दिल्ली के एक सरकारी स्कूल से पूरी की है। उनके पिता शैलेश कुमार सिंह व्यवसायी हैं और पूरा परिवार दिल्ली में ही निवास करता है।

    हालांकि परिवार दिल्ली में रहता है, लेकिन उनकी जड़ें सिवान जिले के सिसवन प्रखंड के भैसौड़ा गांव से जुड़ी हुई हैं। श्रेया की उपलब्धि पर गांव और जिले में खुशी का माहौल है।

    संयुक्त परिवार में रहकर तय किया सफलता का सफर

    श्रेया ने बताया कि संयुक्त परिवार में रहते हुए इस स्तर की छात्रवृत्ति हासिल करना आसान नहीं था। पढ़ाई और तैयारी के दौरान कई चुनौतियां सामने आईं, लेकिन परिवार ने हर कदम पर उनका साथ दिया।

    उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और परिवार के सदस्यों को दिया, जिन्होंने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। श्रेया की उपलब्धि आज बिहार के हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा बन गई है।