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सुपौल के बाजारों में धड़ल्ले से बिक रही प्रतिबंधित अफ्रीकन मांगुर मछली, प्रशासन पर उठे सवाल

Published: Fri, 26 Jun 2026 01:41 PM (GMT+05:30)

सुपौल के छातापुर प्रखंड के बाजारों में प्रतिबंधित अफ्रीकन मांगुर मछली की खुलेआम बिक्री हो रही है, जिससे पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है।

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संवाद सूत्र, छातापुर (सुपौल)। प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न हाट-बाजारों में प्रतिबंधित अफ्रीकन मांगुर (थाई कैटफिश) मछली की खुलेआम बिक्री होने का मामला सामने आया है।

मुख्यालय बाजार सहित जीवछपुर, महद्दीपुर, भागवतपुर, सोहठा और मकुरजा बाजार में पिछले कई दिनों से इस प्रतिबंधित प्रजाति की मछली बेचे जाने की सूचना मिल रही है। इससे न केवल पर्यावरणीय संतुलन पर खतरा मंडरा रहा है, बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, बाजारों में कई दुकानदार बिना किसी रोक-टोक के अफ्रीकन मांगुर मछली बेच रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि सरकार द्वारा इस प्रजाति के पालन, परिवहन और बिक्री पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद कारोबार धड़ल्ले से जारी है।

लोगों का कहना है कि बाजारों में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में यह मछली बिक रही है, लेकिन संबंधित विभागों की ओर से अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। जानकार बताते हैं कि अफ्रीकन मांगुर एक आक्रामक विदेशी प्रजाति है, जो स्थानीय जलीय जीवों एवं देशी मछलियों के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बनती है।

यह जलाशयों की जैव विविधता को प्रभावित करती है और पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचाती है। इसके अलावा स्वास्थ्य संबंधी कारणों से भी इस मछली के सेवन को सुरक्षित नहीं माना जाता। इन्हीं कारणों से केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा इसके पालन और बिक्री पर रोक लगाई गई है।

बाजारों में प्रतिबंधित मछली की खुलेआम बिक्री प्रशासनिक निगरानी और विभागीय कार्रवाई पर भी सवाल खड़े कर रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगाया गया तो इसके दुष्परिणाम दूरगामी हो सकते हैं।

स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन एवं मत्स्य विभाग से अविलंब छापेमारी अभियान चलाकर प्रतिबंधित मछली की बिक्री पर रोक लगाने तथा अवैध कारोबार में संलिप्त लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने की मांग की है।

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि बाजारों में नियमित जांच अभियान चलाया जाए, प्रतिबंधित प्रजाति की मछलियों की पहचान कर जब्ती की कार्रवाई की जाए तथा पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के हित में दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि प्रशासन की तत्परता से ही इस अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।

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