सुपौल में जीविका दीदियां 24722 सेट ड्रेस कर रहीं तैयार, 298 आंगनबाड़ी केंद्रों को कराया जाएगा उपलब्ध
छातापुर प्रखंड में जीविका दीदियां आंगनबाड़ी बच्चों के लिए 24,722 सेट पोशाक तैयार कर रही हैं। यह पहल बच्चों को समय पर ड्रेस उपलब्ध कराने के साथ-साथ 250 ...और पढ़ें

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।
HighLights
जीविका दीदियां 24,722 आंगनबाड़ी पोशाक तैयार कर रही हैं।
250 ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल रहा है।
बीडीओ ने सिलाई कार्य का निरीक्षण कर आत्मनिर्भरता सराही।
संवाद सूत्र, छातापुर (सुपौल)। प्रखंड क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को दी जाने वाली पोशाक की सिलाई का कार्य जीविका दीदियों द्वारा किया जा रहा है।
प्रखंड की करीब 250 जीविका दीदियां अलग-अलग पंचायतों में बैठकर बच्चों के लिए ड्रेस तैयार करने में जुटी हैं। इससे एक ओर जहां बच्चों को समय पर पोशाक उपलब्ध कराने की तैयारी हो रही है। वहीं, दूसरी ओर ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार का अवसर भी मिल रहा है।
जानकारी के अनुसार मिथिला प्रगति सीएलएफ के अंतर्गत छातापुर पंचायत, रामपुर गरिमा सीएलएफ के अंतर्गत घिवहा, उन्नति सीएलएफ के अंतर्गत जीवछपुर तथा संस्कार सीएलएफ के अंतर्गत लक्ष्मीनिया पंचायत की जीविका दीदियां सामूहिक रूप से बैठकर कपड़ों की सिलाई कर रही हैं।
सभी समूह निर्धारित समय सीमा के भीतर ड्रेस तैयार करने में जुटे हैं। छातापुर जीविका कार्यालय के अनुसार गर्मी एवं जाड़े के लिए कुल 24,722 सेट ड्रेस तैयार कर 298 आंगनबाड़ी केंद्रों को उपलब्ध कराया जाना है।
जीविका दीदियां तैयार कर रही ड्रेस
यह पोशाक आईसीडीएस कार्यालय छातापुर के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचाई जाएगी। प्रखंड विकास पदाधिकारी डॉ. राकेश गुप्ता ने मुख्यालय स्थित जीविका कार्यालय पहुंचकर सिलाई कार्य का जायजा लिया और जीविका दीदियों से बातचीत की।
इस दौरान उन्होंने मौके पर मौजूद बीपीएम रामनाथ मंडल तथा क्षेत्रीय समन्वयक रवि शंकर से भी कार्य की प्रगति व ड्रेस आपूर्ति से संबंधित जानकारी ली।
आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास
बीडीओ ने कहा कि जीविका समूह के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि प्रखंड की प्रत्येक पंचायत में खाली पड़े सामुदायिक भवनों को चिह्नित कर वहां जीविका दीदियों के लिए सिलाई कार्य सहित अन्य आजीविका गतिविधियों को संचालित करने की योजना है, ताकि अधिक से अधिक महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल सके।
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इस पहल से एक ओर आंगनबाड़ी बच्चों को समय पर पोशाक उपलब्ध होगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।
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