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    सुपौल में कोसी का कहर: नदी में समाये 35 से अधिक घर, ग्रामीणों में डर का माहौल

    Updated: Tue, 28 Jul 2026 05:28 PM (GMT+05:30)

    सुपौल के तेलवा पंचायत में कोसी नदी के कटाव से पिछले 15 दिनों में 35 से अधिक परिवार बेघर हो गए हैं, जिससे उनकी जिंदगी अस्त-व्यस्त हो गई है। प्रशासन ने ...और पढ़ें

    कोसी से पीड़ित ग्रामीण। फोटो जागरण

    कोसी से पीड़ित ग्रामीण। फोटो जागरण

    HighLights

    1. कोसी कटाव से सुपौल में 35 परिवार हुए विस्थापित।

    2. पिछले 15 दिनों में 35 से अधिक घर नदी में समाए।

    3. प्रशासन से तत्काल राहत और पुनर्वास की मांग।

    जागरण संवाददाता, सुपौल। कोसी को यूं ही बिहार का शोक नहीं कहा जाता। हर साल बरसात के मौसम में यह नदी अपने साथ हजारों परिवारों के सपने, वर्षों की मेहनत और आशियाने बहा ले जाती है। सदर प्रखंड की तेलवा पंचायत के दियारा क्षेत्र में इन दिनों फिर वही दर्दनाक मंजर देखने को मिल रहा है।

    वार्ड संख्या-5 के नयानगर टोला और वार्ड संख्या-7 में पिछले करीब 15 दिनों से लगातार हो रहे कटाव ने लोगों की जिंदगी को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। वार्ड संख्या-5 के नयानगर टोला में अब तक 25 से अधिक घर कोसी नदी में समा चुके हैं, जबकि वार्ड संख्या-7 में भी 10 घर कटाव की भेंट चढ़ चुके हैं।

    इस तरह दोनों वार्डों में अब तक 35 से अधिक परिवार बेघर हो चुके हैं। जिन घरों में कभी बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब सिर्फ नदी की तेज धार दिखाई दे रही है। जिन आंगनों में लोगों ने वर्षों तक सपने संजोए थे, वे कुछ ही घंटों में कोसी के गर्भ में समा गए।

    ग्रामीणों में डर का मौहाल

    कटाव पीड़ितों का कहना है कि पिछले 15 दिनों से वे हर दिन यह डर लेकर जी रहे हैं कि अगला नंबर कहीं उनके बचे हुए सामान या रिश्तेदारों के घर का न हो। घर टूटने के बाद परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। किसी ने खेत के किनारे अस्थायी झोपड़ी बना ली है, तो कोई रिश्तेदारों के यहां शरण लेने को विवश है।

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    खाने-पीने, बच्चों की पढ़ाई, पशुओं की सुरक्षा और रोजमर्रा की जरूरतें सभी संकट में पड़ गई हैं। कटाव पीड़ित मणिभूषण यादव, सुमित्रा देवी, सीताराम यादव, बुची यादव समेत अन्य ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि पिछले 15 दिनों से लगातार घर कट रहे हैं, घर उजड़ जाने के बाद अब सिर छिपाने तक की जगह नहीं बची है। परिवार किसी तरह अपने बचे हुए सामान को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में जुटे हैं।

    मंगलवार को अंचलाधिकारी के निर्देश पर प्रतिनियुक्त अंचल अमीन रवि कुमार कटाव स्थल पर पहुंचे। उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी स्थिति का जायजा लिया।

    अंचल अमीन ने बताया कि कटाव प्रभावित परिवारों की सूची तैयार की जा रही है। सूची तैयार होने के बाद सरकारी प्रविधानों के अनुसार उन्हें राहत एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

    राहत में प्रशासन का ढुलमुल रैवया  

    समाजसेवी विद्या भूषण यादव ने बताया कि कटाव की सूचना उन्होंने तत्काल अंचलाधिकारी को दी थी, जिसके बाद जांच के लिए अमीन को भेजा गया। उन्होंने कहा कि 15 दिनों से लोग भारी परेशानी झेल रहे हैं।

    प्रशासन को शुरुआती दिनों में ही राहत सामग्री, तिरपाल, खाद्यान्न और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करा देनी चाहिए थीं। अभी केवल जांच होने से पीड़ितों की परेशानी कम नहीं होगी।

    ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि कटाव प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत सामग्री, रहने की वैकल्पिक व्यवस्था, आर्थिक सहायता और पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

    उनका कहना है कि यदि कटाव इसी रफ्तार से जारी रहा तो आने वाले दिनों में और कई घर कोसी में समा सकते हैं। हर गुजरते दिन के साथ दियारा के लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है और वे प्रशासन से त्वरित हस्तक्षेप की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

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