भारत-नेपाल बॉर्डर पर 'फेस स्क्रीनिंग' से ही मिलेगी एंट्री, कर्फ्यू में ढील के बाद पटरी पर लौट रहे हालात
नेपाल के सुनसरी जिले में सांप्रदायिक हिंसा के बाद अब हालात सामान्य हो रहे हैं और कर्फ्यू में ढील दी गई है। भारत-नेपाल सीमा पर आवाजाही बहाल हो गई है, ह ...और पढ़ें

भारत-नेपाल सीमा पर आवाजाही फिर शुरू
HighLights
नेपाल के सुनसरी में सांप्रदायिक हिंसा के बाद स्थिति सामान्य।
भारत-नेपाल सीमा पर आवाजाही बहाल, सुरक्षा व्यवस्था सख्त।
हिंसा में चार की मौत, सरकार ने किया सात सूत्री समझौता।
संवाद सूत्र, भीमनगर (सुपौल)। नेपाल के सुनसरी जिले के देवानगंज ग्रामीण नगर पालिका के कप्तानगंज क्षेत्र में हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद अब हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। नेपाल के कई शहरों में लगाए गए अनिश्चितकालीन कर्फ्यू में सरकार ने ढील देते हुए अधिकांश स्थानों से प्रतिबंध हटा दिए हैं।
हालांकि, देवानगंज के कुछ संवेदनशील इलाकों में अभी भी सीमित समय के लिए कर्फ्यू लागू है। कर्फ्यू में ढील मिलने के बाद भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर लोगों की आवाजाही फिर से सामान्य हो गई है। इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था पहले की अपेक्षा अधिक सख्त कर दी गई है।
सीमा पार करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की फेस स्क्रीनिंग की जा रही है तथा बिना वैध पहचान पत्र के किसी को भी सीमा पार करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। नेपाल में हुई हिंसा को देखते हुए तराई क्षेत्र के कई संवेदनशील इलाकों में नेपाल सशस्त्र पुलिस बल और नेपाली सेना की तैनाती अब भी जारी है।
प्रशासन ने सुनसरी जिले के कई क्षेत्रों में सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक कर्फ्यू में ढील दी है, जबकि कई स्थानों पर पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक जारी है।
नेपाली मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस सांप्रदायिक हिंसा में अब तक चार लोगों की मौत हुई है। मृतकों में जय प्रकाश, ओमप्रकाश मेहता, रविंद्र मेहता और गणेश यादव के नाम शामिल हैं। हिंसा के बाद नेपाल सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विभिन्न पक्षों के साथ सात सूत्री समझौता किया।
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समझौते के तहत मृतकों के स्वजन को 10-10 लाख नेपाली रुपये की आर्थिक सहायता, प्रत्येक परिवार के एक योग्य सदस्य को सरकारी नौकरी तथा मृतकों को शहीद का दर्जा देने की घोषणा की गई। नेपाल के गृहमंत्री सुदान गुरुंग ने कई दिनों तक सुनसरी में कैंप कर स्थानीय लोगों से संवाद किया और शांति एवं कानून-व्यवस्था बहाल करने का प्रयास किया।
सरकार के आश्वासन और समझौते के बाद स्थिति में सुधार आया है। इसी बीच नेपाली मीडिया के अनुसार हिंसा में घायल रविंद्र मेहता की काठमांडू में उपचार के दौरान मौत हो गई। इसके बाद स्वजन और स्थानीय लोगों ने निष्पक्ष जांच तथा उन्हें शहीद का दर्जा देने की मांग तेज कर दी है। लोगों ने पुलिस फायरिंग की परिस्थितियों की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है।
बताया जाता है कि 26 जुलाई की रात देवानगंज में कांवड़ यात्रा के दौरान डीजे बजाने को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते सुनसरी, सप्तरी, सिराहा, धनुषा और पर्सा सहित कई जिलों तक फैल गया था। हिंसा और पुलिस फायरिंग की घटनाओं में अब तक चार लोगों की मौत की खबर सामने आई है।
फिलहाल, सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति सामान्य बनी हुई है। भारत-नेपाल सीमा पर लोगों की आवाजाही जारी है तथा सीमा से लगे बाजारों में भी एक बार फिर रौनक लौट आई है। हालांकि, किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सीमा पर एसएसबी सहित देश की सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं।