सुपौल सड़क हादसा: अचानक चीख-पुकार में बदल गई भजन की गूंज, गांव वालों ने कार सवार लोगों को कमरे में किया बंद
सुपौल के पिपरा थाना क्षेत्र में झूलन पर्व के दौरान एक तेज रफ्तार कार ने श्रद्धालुओं को रौंद दिया, जिससे 5 लोगों की मौत हो गई।
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घटनास्थल पर मौजूद पुलिसकर्मी। (जागरण)
HighLights
पिपरा में झूलन पर्व पर कार ने श्रद्धालुओं को रौंदा।
हादसे में 5 की मौत, 1 घायल।
ग्रामीणों ने कार सवारों को बंधक बनाया, एनएच जाम।
जागरण संवाददाता, सुपौल। पिपरा थाना क्षेत्र का कटैया चौक मंगलवार की शाम तक भक्ति के रस में डूबा था। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि अगले ही पल यहां मातम पसर जाएगा।
महावीर मंदिर पर 'झूलन पर्व' के कारण ग्रामीणों की खासी भीड़ थी। लोग मगन होकर भजन-कीर्तन कर रहे थे। माहौल में सुकून था।
तभी अचानक एक तेज रफ्तार कार काल बनकर आई और बिना संभलने का मौका दिए श्रद्धालुओं की भीड़ को बेरहमी से रौंदती हुई निकल गई।
पलक झपकते ही ढोल-मंजीरे की आवाजें चीख-पुकार में बदल गई। सुरेंद्र यादव, तिलाई दास और राजू दास ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि दो लोगों की मौत अस्पताल में हुई। वहीं, एक घायल का इलाज चल रहा है
कार सवारों को गांव वालों ने बनाया बंधक
हादसे के बाद की जो कहानी है, वह और भी चौंकाने वाली है। प्रत्यक्षदर्शियों और सूत्रों के अनुसार, घटना को अंजाम देने के बाद चालक घबराहट में सीधा भागने के बजाय, कार को लेकर घटनास्थल से कुछ दूर गया और उसे एक सुनसान गैराज में घुसा दिया। संयोग से गैराज खाली था।
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चालक तो अंधेरे का फायदा उठाकर वहां से फरार हो गया, लेकिन उसके साथ कार में एक पुरुष और दो महिलाएं और एक बच्चा सवार था, जिन्हें ग्रामीणों ने एक कमरे में बंद कर दिया है। पुलिस ने स्थिति की नजाकत को भांपते हुए कमरे को अपनी सुरक्षा में ले लिया है।
सड़क पर उतरा दर्द और प्रशासन का संघर्ष
एक साथ तीन लाशें देखकर ग्रामीणों का सब्र टूट गया और उनका दर्द उग्र आक्रोश में बदल गया। एनएच-427 ई को पूरी तरह ठप कर दिया गया।
हालात इस कदर बेकाबू हो गए कि जब शव उठाने के लिए एंबुलेंस वहां पहुंची, तो भीड़ का गुस्सा उस पर भी फूट पड़ा और तोड़फोड़ का प्रयास किया गया।
जब डीएसपी राजीव रंजन और एसडीओ मनोहर कुमार साहू भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे, तो उनका सामना आंसुओं और गुस्से से उबलती भीड़ से हुआ। रात के अंधेरे में प्रशासन घंटों तक मान-मनौवल करता रहा, लेकिन अपनों को खोने का दर्द हर सरकारी आश्वासन पर भारी पड़ रहा था।
