15 जून से आरक्षण सूची का पहला प्रकाशन, सुपौल की 174 पंचायतों में आरक्षण रोस्टर पर टिकी नजरें
सुपौल में 2026 के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण रोस्टर की तैयारियां तेज हो गई हैं, जिसका पहला प्रकाशन 15 जून से होगा। यह प्रक्रिया 2011 की जनग ...और पढ़ें

बिहार पंचायत चुनाव (सांकेतिक तस्वीर)
HighLights
15 जून से आरक्षण सूची का पहला प्रकाशन होगा।
आरक्षण रोस्टर 2011 की जनगणना पर आधारित होगा।
रोटेशन प्रणाली से कई सीटों पर बदलाव की संभावना।
जागरण संवाददाता, सुपौल। 2026 में प्रस्तावित त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर प्रशासनिक एवं राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राज्य सरकार, पंचायती राज विभाग एवं राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव की प्रारंभिक तैयारियां शुरू कर दी गई है।
चुनावी प्रक्रिया के सबसे महत्वपूर्ण चरण आरक्षण रोस्टर निर्धारण को लेकर पंचायत स्तर तक चर्चाओं का दौर जारी है। 15 जून से पंचायतवार आरक्षण सूची के प्रथम प्रकाशन एवं रोस्टर निर्धारण की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही संभावित प्रत्याशियों की नजर आरक्षण सूची पर टिकी हुई है।
आरक्षण निर्धारण का कार्य वर्ष 2011 की जनगणना
प्रथम प्रकाशन के बाद दावा-आपत्ति प्राप्त की जाएगी और उसके निष्पादन के बाद अंतिम आरक्षण रोस्टर प्रकाशित होगा। राज्य में ग्राम पंचायत, पंचायत समिति एवं जिला परिषद के निर्वाचित पदों के लिए आरक्षण निर्धारण का कार्य वर्ष 2011 की जनगणना, संबंधित वर्गों की जनसंख्या, महिलाओं के आरक्षण तथा पूर्व के आरक्षण चक्र के आधार पर किया जा रहा है।
अंतिम रोस्टर जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कौन-सी पंचायत या पद सामान्य, महिला, अत्यंत पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति अथवा अन्य आरक्षित श्रेणी में जाएगा।
कैसे निर्धारित होता है आरक्षण रोस्टर
पंचायत चुनाव में आरक्षण रोस्टर निर्धारण एक निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जाता है। सबसे पहले जिले एवं प्रखंड स्तर पर पंचायतों की कुल संख्या तथा संबंधित वर्गों की जनसंख्या का आंकड़ा तैयार किया जाता है। इसके बाद अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या के अनुपात में पदों का आरक्षण तय किया जाता है।
आरक्षण निर्धारण के दौरान पंचायतों को रोस्टर सूची में क्रमवार रखा जाता है। जिन पंचायतों में संबंधित वर्ग की जनसंख्या अधिक होती है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर आरक्षित श्रेणी में शामिल किया जाता है। इसके बाद महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाता है।
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दूसरे वर्ग को अवसर देने के लिए बदला जाता है आरक्षण चक्र
महिला आरक्षण सामान्य, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग सभी श्रेणियों में लागू होता है। रोस्टर निर्धारण में रोटेशन प्रणाली का विशेष महत्व होता है। जिन पंचायतों या पदों पर पिछले चुनावों में आरक्षण लागू था, वहां अगली बार दूसरे वर्ग को अवसर देने के लिए आरक्षण चक्र बदला जाता है।
इसी कारण वर्ष 2016 एवं 2021 में जिन पंचायतों में एक ही वर्ग को आरक्षण का लाभ मिला था, वहां 2026 में परिवर्तन की संभावना मानी जा रही है।
पंचायत चुनाव 2026 की आरक्षण नियमावली
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति को उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण दिया जाएगा। अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए निर्धारित प्रतिशत के अनुसार सीटें आरक्षित की जाएंगी। सभी श्रेणियों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा।
आरक्षण का निर्धारण रोटेशन प्रणाली के आधार पर किया जाएगा। पंचायतवार, पंचायत समिति क्षेत्रवार एवं जिला परिषद क्षेत्रवार अलग-अलग रोस्टर तैयार होगा।वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जा रहा है। आरक्षण सूची का प्रथम प्रकाशन कर दावा एवं आपत्ति का अवसर दिया जाएगा। दावा-आपत्ति के निष्पादन के बाद अंतिम आरक्षण सूची प्रकाशित होगी।
मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, वार्ड सदस्य एवं पंच सभी पदों पर आरक्षण व्यवस्था लागू होगी। आरक्षण चक्र परिवर्तन के कारण कई वर्तमान आरक्षित सीटें सामान्य तथा कई सामान्य सीटें आरक्षित श्रेणी में जा सकती हैं।
जिले की 174 पंचायतों पर विशेष नजर
सुपौल जिले की कुल 174 पंचायतों में पंचायत चुनाव को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। जिला स्तर पर पंचायतवार आंकड़ों का संकलन, आरक्षण निर्धारण एवं रोस्टर तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है।
अंतिम रोस्टर जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन पंचायतों में मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य एवं जिला परिषद सदस्य के पदों की आरक्षण श्रेणी में बदलाव होगा। सदर प्रखंड की 26 पंचायतों में बढ़ी हलचल सदर प्रखंड की 26 पंचायतों में भी संभावित उम्मीदवारों की नजर आरक्षण सूची पर टिकी हुई है।
कई पंचायतों में पिछले दो चुनावों से एक ही वर्ग का प्रतिनिधित्व होने के कारण इस बार आरक्षण परिवर्तन की संभावना को लेकर चर्चाएं तेज हैं। संभावित प्रत्याशी अंतिम रोस्टर के प्रकाशन का इंतजार कर रहे हैं।
पंचायत चुनाव 2026 की प्रारंभिक चुनावी प्रक्रिया
पंचायतवार आंकड़ों का सत्यापन, मतदाता सूची का पुनरीक्षण, आरक्षण रोस्टर का प्रथम प्रकाशन, दावा-आपत्ति का निष्पादन, अंतिम रोस्टर का प्रकाशन तथा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा चुनाव प्रक्रिया के प्रमुख चरण होंगे। इसके बाद नामांकन, नामांकन पत्रों की जांच, नाम वापसी, चुनाव चिह्न आवंटन, मतदान एवं मतगणना की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
क्या बदल सकते हैं चुनावी समीकरण
आरक्षण रोस्टर में संभावित बदलाव को पंचायत चुनाव 2026 का सबसे बड़ा कारक माना जा रहा है। जिन पंचायतों में अब तक सामान्य श्रेणी के प्रत्याशी चुनाव लड़ते रहे हैं, वहां आरक्षण लागू होने की स्थिति में नए उम्मीदवार सामने आ सकते हैं। वहीं कुछ पंचायतों में आरक्षित सीटें सामान्य होने पर नए राजनीतिक समीकरण बन सकते हैं।