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8वीं की छात्रा सोनी ने 'एक दिन की मुखिया' बनकर चौंकाया; सुपौल के गनौरा पंचायत में दिया सुशासन व विकास का नया विजन

Published: Sun, 16 Aug 2026 10:33 AM (IST)

सुपौल की गनौरा पंचायत में 8वीं की छात्रा सोनी कुमारी 80वें स्वतंत्रता दिवस पर 'एक दिन की मुखिया' बनीं। उन्होंने ...और पढ़ें

मरौना प्रखंड की गनौरा पंचायत बनी लोकतंत्र की अनूठी प्रयोगशाला; 54 छात्राओं की प्रतियोगी परीक्षा में अव्वल आई थी छात्रा

मरौना प्रखंड की गनौरा पंचायत बनी लोकतंत्र की अनूठी प्रयोगशाला; 54 छात्राओं की प्रतियोगी परीक्षा में अव्वल आई थी छात्रा

HighLights

  1. 8वीं की छात्रा सोनी कुमारी बनीं गनौरा पंचायत की एक दिन की मुखिया।

  2. शिक्षा को बताया गांव के सर्वांगीण विकास का मूल आधार।

  3. भ्रष्टाचार रोकने हेतु निगरानी समिति बनाने का दिया सुझाव।

जागरण संवाददाता, सुपौल। नागरिक शास्त्र और राजनीति विज्ञान की किताबों में पढ़ाई जाने वाली ग्राम पंचायत व स्थानीय स्वशासन की कार्यप्रणाली अक्सर स्कूली बच्चों के लिए केवल परीक्षा पास करने का किताबी विषय बनकर रह जाती है। लेकिन सुपौल जिले के मरौना प्रखंड अंतर्गत गनौरा पंचायत ने एक ऐसी अनूठी पहल की है, जिसने स्कूली शिक्षा को व्यावहारिक लोकतंत्र की सजीव प्रयोगशाला में बदल दिया।

80वें स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर इस पंचायत में आठवीं कक्षा की मेधावी छात्रा सोनी कुमारी ने 'एक दिन की मुखिया' बनकर सुशासन और पारदर्शी प्रशासन का शानदार मॉडल पेश किया।

54 छात्राओं के बीच हुई थी लिखित परीक्षा, अव्वल आकर संभाली कमान

यह जिम्मेदारी किसी सिफारिश या अचानक लिए गए फैसले का नतीजा नहीं थी। भावी पीढ़ी में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और प्रशासनिक समझ विकसित करने के उद्देश्य से पंचायत के वर्तमान मुखिया जितेंद्र कुमार ने बाकायदा 54 छात्राओं के बीच एक सामान्य ज्ञान व पंचायती राज व्यवस्था से जुड़ी प्रतियोगी परीक्षा आयोजित कराई थी।

इस परीक्षा में मनोज यादव की पुत्री सोनी कुमारी ने सर्वोच्च अंक हासिल कर प्रथम स्थान प्राप्त किया, जिसके बाद स्वतंत्रता दिवस के दिन उसे विधिवत एक दिन का मुखिया नियुक्त किया गया। इस लोकतांत्रिक प्रयोग में सोनी के साथ अंशु और रुचिका ने पंचायत सहायक के दायित्वों का निर्वहन किया।

'ईंट-कंक्रीट से नहीं, बच्चों की शिक्षा से होगा पंचायत का विकास'

पंचायत सरकार भवन में औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण करने और तिरंगा फहराने के बाद सोनी ने आमसभा को संबोधित किया। आठवीं की छात्रा का विजन किसी परिपक्व और अनुभवी जनप्रतिनिधि से कम नहीं था।

सोनी ने दो टूक शब्दों में कहा कि किसी भी गांव का सर्वांगीण विकास सिर्फ ईंट, गिट्टी और कंक्रीट बिछाने से नहीं हो सकता, बल्कि जब तक हर बच्चा शिक्षित नहीं होगा, तब तक समाज आगे नहीं बढ़ सकता। उसने सभी अभिभावकों से आह्वान किया कि वे बच्चों की नियमित स्कूल उपस्थिति और पढ़ाई पर विशेष ध्यान दें।

भ्रष्टाचार पर अंकुश के लिए निगरानी समिति का सुझाव

आमसभा में सोनी कुमारी के उस सुझाव ने सभी ग्रामीणों और अधिकारियों का ध्यान खींचा, जिसमें उसने विकास कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने का फॉर्मूला दिया। उसने कहा कि पंचायत में बनने वाली किसी भी सड़क, नाली या सार्वजनिक भवन के निर्माण की गुणवत्ता जांचने के लिए स्थानीय ग्रामीणों की एक 'निगरानी समिति' बननी चाहिए।

यह समिति ठेकेदारों द्वारा इस्तेमाल की जा रही सामग्री की सीधे निगरानी करेगी, जिससे कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार पर पूरी तरह रोक लग सकेगी। इसके साथ ही उसने नशामुक्ति, जल संरक्षण और स्वच्छता को प्रत्येक ग्रामीण का निजी व सामाजिक दायित्व बताया।

"इस अनूठे प्रयोग का मुख्य मकसद ग्रामीण बेटियों के मन से झिझक को दूर करना, उनमें नेतृत्व क्षमता जगाना और उन्हें पंचायती राज व्यवस्था व जनहित के मुद्दों के प्रति व्यावहारिक रूप से जागरूक करना है। जब युवा पीढ़ी सीधे व्यवस्था को समझेगी, तभी लोकतंत्र की जड़ें मजबूत होंगी।"


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— जितेंद्र कुमार, मुखिया, गनौरा पंचायत (मरौना, सुपौल)