राघोपुर में रिटायर्ड टीचरों को बना दिया बाढ़ राहत शिविर का प्रभारी, लापरवाही आई सामने
राघोपुर प्रखंड में बाढ़ राहत आश्रय स्थलों और सामुदायिक किचन की सूची में बड़ी लापरवाही उजागर हुई है।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।
HighLights
राघोपुर में बाढ़ आश्रय स्थल सूची में बड़ी लापरवाही।
पांच सेवानिवृत्त शिक्षकों को बनाया गया आश्रय स्थल प्रभारी।
प्रशासनिक तैयारियों पर उठे गंभीर सवाल, राहत कार्य बाधित।
संवाद सूत्र, राघोपुर। प्रखंड में बाढ़ प्रभावितों के लिए बनाए गए आश्रय स्थल एवं सामुदायिक किचन की व्यवस्था में अंचल कार्यालय की बड़ी लापरवाही सामने आई है।
अंचल कार्यालय के स्तर पर जारी सूची में कई ऐसे शिक्षकों को प्रभारी बना दिया गया है, जो महीनों पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
जानकारी के अनुसार अंचल कार्यालय राघोपुर ने प्रखंड के 20 पंचायतों के लिए आश्रय स्थल और सामुदायिक किचन की व्यवस्था को लेकर सूची जारी की है।
इसमें पंचायत का नाम, आश्रय स्थल, किचन स्थल का नाम, नोडल पदाधिकारी, प्रभारी और कर्मी का नाम व मोबाइल नंबर अंकित किया गया है।
प्रसारित हो रही इस सूची में पांच विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों का नाम प्रभारी के रूप में दर्ज है, जबकि वे सभी रिटायर हो चुके हैं।
सूची में शामिल सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापकों में उच्च माध्यमिक विद्यालय रुस्तमपुर तीनपैरिया के प्रधानाध्यापक उमानाथ राय, उच्च माध्यमिक विद्यालय जमालपुर के प्रधानाध्यापक सुरेश साह, कमल सिंह उच्च माध्यमिक विद्यालय राघोपुर के प्रधानाध्यापक सरोज कुमार सिंह, माध्यमिक विद्यालय चांदपुरा के प्रधानाध्यापक अशोक प्रसाद मेहता एवं उत्क्रमित मध्य विद्यालय सरायपुर के प्रधानाध्यापक चंदेश्वर प्रसाद के नाम शामिल हैं।
बताया जा रहा है कि ये सभी प्रधानाध्यापक कई महीने पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं। सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अशोक प्रसाद मेहता ने बताया कि मुझे कई लोगों ने फोन पर इसकी जानकारी दी।
जनवरी में रिटायर हो चुके टीचर
उन्होंने कहा कि 31 जनवरी 2026 को हम रिटायर्ड हो चुके हैं, सुरेश साह दिसंबर, नवंबर महीने में सरोज कुमार सिंह और 31 मई को उमानाथ राय सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी स्थानीय लोगों से मिलने के बाद हम विभाग को यह बात बता दिया है। इसके बावजूद इनके नाम को आश्रय स्थल और सामुदायिक किचन के प्रभारी के रूप में जारी कर दिया गया।
बाढ़ जैसी आपदा के समय भी इस तरह की लापरवाही से प्रशासनिक तैयारी पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब सूची ही पुरानी और बिना सत्यापन के जारी की जा रही है तो राहत कार्य कैसे सुचारू रूप से चलेगा।
फिलहाल यह सूची इंटरनेट मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रही है और चर्चा का विषय बनी हुई है।
