बेतिया काली धाम की जमीन पर पार्क का विरोध, धार्मिक आयोजनों के लिए विकसित करने की मांग
बेतिया के मां काली धाम परिसर के पास नगर निगम द्वारा प्रस्तावित पार्क निर्माण का पूजा समिति विरोध कर रही ...और पढ़ें

प्रेस वार्ता को संबोधित करते मां काली धाम मंदिर समिति के सदस्य। फोटो: जागरण
HighLights
बेतिया काली धाम परिसर में प्रस्तावित पार्क निर्माण का विरोध।
समिति ने खाली भूमि को धार्मिक आयोजनों के लिए महत्वपूर्ण बताया।
विकास के विरोध में नहीं, पर धार्मिक गतिविधियों पर असर न हो।
जागरण संवाददाता, बेतिया (पश्चिम चंपारण)। Bettiah Kali Dham Land: शहर के प्रसिद्ध मां काली धाम परिसर के समीप स्थित सार्वजनिक खाली भूमि पर नगर निगम की ओर से प्रस्तावित पार्क निर्माण को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
श्री मां काली धाम पूजा समिति ने रविवार को प्रेस वार्ता कर पार्क निर्माण योजना का विरोध किया। समिति ने कहा कि मंदिर के समीप उपलब्ध खुला भूखंड धार्मिक आयोजनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
धार्मिक आयोजनों में उपयोग
पूजा समिति के संयोजक सह अध्यक्ष झूलन साहू की अध्यक्षता में आयोजित प्रेस वार्ता में सदस्यों ने कहा कि मां काली धाम बेतिया मुख्यालय का प्रमुख धार्मिक स्थल है।
यहां प्रतिवर्ष दुर्गापूजा, छठ पूजा, बड़े भंडारे समेत विभिन्न धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। इन आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग पहुंचते हैं।
समिति के अनुसार मंदिर के समीप की खुली जमीन धार्मिक आयोजनों के लिए उपलब्ध रहना आवश्यक है। पार्क बनने से धार्मिक अनुष्ठानों के आयोजन के लिए उपलब्ध खुला स्थान समाप्त हो जाएगा। इससे दुर्गापूजा, छठ, यज्ञ-अनुष्ठान समेत बड़े आयोजनों में परेशानी हो सकती है।
पार्क बनने पर चिंता
समिति ने बताया कि नगर निगम की ओर से जमीन पर पार्क, ओपन जिम और टहलने के लिए ट्रैक समेत अन्य संरचनाएं विकसित करने की योजना बनाई गई है।
इससे वर्तमान में उपलब्ध खुला क्षेत्र काफी हद तक समाप्त हो जाएगा। सदस्यों ने भविष्य में पार्क में प्रवेश शुल्क लगाए जाने या इसके व्यावसायिक उपयोग की संभावना को लेकर भी आशंका जताई।
विकास का विरोध नहीं
प्रेस वार्ता में साधु गुप्ता ने बताया कि मां काली धाम की कुल करीब 13 एकड़ भूमि है। इसमें करीब पांच एकड़ में मंदिर का निर्माण हुआ है, जबकि शेष करीब आठ एकड़ भूमि पूर्व में बाग-बगीचे के रूप में उपयोग होती थी।
उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थल से जुड़ी भूमि का उपयोग पार्क के रूप में करने से मंदिर की धार्मिक गतिविधियां और श्रद्धालुओं की आस्था प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों में बड़ी भीड़ जुटती है और इसके लिए खुले स्थान की जरूरत होती है। समिति शहर में विकास कार्यों के विरोध में नहीं है।
उसका विरोध केवल इस बात को लेकर है कि विकास कार्य ऐसा हो, जिससे धार्मिक गतिविधियां और सार्वजनिक आयोजनों की व्यवस्था प्रभावित न हो। प्रेस वार्ता में साधु गुप्ता, उमेश प्रसाद, प्रदीप साहू सहित पूजा समिति के अन्य सदस्य मौजूद रहे।
