Bihar News : एक हफ्ते की ‘सैर’ के बाद जंगल लौटी बाघिन, वापसी की दिलचस्प कहानी
वाल्मीकि ब्याघ्र परियोजना से भटककर रिहायशी इलाके में पहुंची बाघिन एक सप्ताह बाद जंगल में लौट गई है। सिसई और रमपुरवा के पास पंडई नदी किनारे उसकी मौजूदग ...और पढ़ें

निगरानी करते वनकर्मी व बाधिन की फाइल फोटो। सौ. वन विभाग
HighLights
बाघिन एक सप्ताह बाद जंगल में वापस लौटी।
रिहायशी इलाके में बाघिन से दहशत का माहौल था।
एक अन्य 18 माह की बाघिन का शव मिला।
जागरण संवाददाता, नरकटियागंज/ गौनाहा। वाल्मीकि ब्याघ्र परियोजना (वीटीआर) अंतर्गत मंगुराहा वन प्रक्षेत्र से भटककर रिहायशी इलाके में पहुंची बाघिन एक सप्ताह बाद वापस जंगल में लौट गई है।
सिसई और रमपुरवा गांव के पास पंडई नदी किनारे घनी झाड़ियों में डेरा डाले इस बाघिन की मौजूदगी से इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ था।
वन विभाग का कहना है कि बुधवार शाम को जंगल समीप नदी किनारे गश्त कर रहे वनकर्मियों को बाघिन के पगमार्क मिले हैं। वह जंगल में लौट गई है। इसके बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
बताया जाता है कि जंगल से करीब चार किलोमीटर दूर बाघिन नदी के रास्ते झाड़ियों में छिपकर रह रही थी, जहां छुपने और जरुरत के अनुसार पानी होने के कारण यह क्षेत्र उसके लिए अनुकूल बना हुआ था।
इस बीच बुधवार को ही एक दूसरी बाघिन (उम्र 18 माह) का शव सिसई गांव के पूरब पंडई नदी से निकलने वाली सोती में बरामद किया गया। शव गांव से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर मिला था।
शुरुआत में आशंका जताई गई कि यह वही बाघिन है, जिसकी तलाश की जा रही थी, लेकिन वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि मृत बाघिन अलग थी, जो मंगलवार को भटककर जंगल से बाहर आ गई थी।
बता दें कि बीते गुरुवार को सिसई निवासी स्व. दिनेश पासवान की पत्नी सुनीता देवी मवेशी चरा रही थीं, तभी झाड़ियों में छिपे बाघ ने हमला कर एक भैंस को मार डाला था।
इसके अगले दिन शुक्रवार को रमपुरवा स्थित अशोक स्तंभ से करीब 50 मीटर की दूरी पर बाघ ने एक नीलगाय का शिकार कर उसे लगभग 200 मीटर तक घसीटा था।
शिकार के इर्द-गिर्द कुछ दिनों तक मंडराने का स्वभाव भी इस जानवर में पाया जाता है। इसी दौरान थाईलैंड से आए 116 बौद्ध भिक्षुओं के आगमन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई थी। वन विभाग की टीम लगातार गश्त करती रही।
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बाघिन जंगल में लौट गई है। एहतियात के तौर पर निगरानी जारी रहेगी। साथ ही नदी किनारे और संभावित रास्तों पर विशेष नजर रखी जा रही है। ग्रामीणों से अपील की गई है कि किसी भी जंगली जानवर के दिखने पर सूचना विभाग को दें।
अंशुमान कुमार, रेंजर, मंगुराहा