सिकटा की बेटी पायल का जापान में जलवा: 'नो हेलमेट, नो स्टार्ट बाइक' प्रोजेक्ट से बढ़ाया बिहार का मान
सिकटा की पायल कुमारी रौनियार ने जापान के प्रतिष्ठित सकुरा साइंस प्रोग्राम में 'नो हेलमेट, नो स्टार्ट बाइक' प्रोजेक्ट के साथ बिहार का प्रतिनिधित्व किया ...और पढ़ें

सिकटा की बेटी पायल का जापान में जलवा: 'नो हेलमेट, नो स्टार्ट बाइक' प्रोजेक्ट से बढ़ाया बिहार का मान

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संवाद सूत्र, सिकटा। सिकटा बाजार निवासी रमेश प्रसाद रौनियार की पुत्री पायल कुमारी रौनियार जापान में आयोजित प्रतिष्ठित सकुरा साइंस प्रोग्राम में बिहार का प्रतिनिधित्व कर वापस लौट आईं हैं। वह 'नो हेलमेट, नो स्टार्ट बाइक' प्रोजेक्ट की प्रस्तुति के साथ जापान की टेक्नोलॉजी को समझने के लिए गई थी।
इस प्रोग्राम में भारत के कुल 51 छात्र विभिन्न प्रोजेक्ट की समझ विकसित करने के लिए जापान गए थे। इसमें कुल 20 छात्राएं थीं। बिहार का प्रतिनिधित्व अकेली पायल कर रही थी। पायल फिलहाल पटना के कंकड़बाग स्थित न्यू ऐरा पब्लिक स्कूल में 11वीं की छात्रा हैं।
27 जून को वह भारत से जापान के लिए रवाना हुई थीं। जापान पहुंचने के बाद उनका ओरिएंटेशन कार्यक्रम जापान साइंस एंड टेक्नोलॉजी एजेंसी (जेएसटी) में आयोजित हुआ, जहां उन्हें जापान की कार्य संस्कृति, अनुशासन और समयपालन की विशेषताओं से परिचित कराया गया।
इसके बाद उन्होंने टोक्यो स्थित भारतीय दूतावास और आसाकुसा सांस्कृतिक क्षेत्र का भ्रमण कर जापान की पारंपरिक संस्कृति, स्वच्छता और व्यवस्थित जीवनशैली को करीब से देखा।
30 जून को पायल ने जाक्सा त्सुकुबा स्पेस सेंटर का दौरा किया, जहां उपग्रह, रॉकेट, चंद्र मिशन और अंतरिक्ष अनुसंधान से जुड़ी अत्याधुनिक तकनीकों की जानकारी हासिल की। इसके बाद उन्होंने टोक्यो विश्वविद्यालय के काशीवा परिसर की आधुनिक प्रयोगशालाओं और उन्नत शिक्षा प्रणाली का भी अवलोकन किया।
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एक जुलाई को मेइकेई हाई स्कूल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों में उन्होंने जापान, भारत, ताइवान और इंडोनेशिया के छात्रों के साथ विचार-विमर्श किया। आर्किटेक्चर विषय पर समूह चर्चा के दौरान पायल ने बिहार और भारत की सांस्कृतिक एवं स्थापत्य विरासत से विदेशी छात्रों को अवगत कराया, जिसकी सभी ने सराहना की।
दो जुलाई को उन्होंने नेशनल म्यूजियम ऑफ नेचर एंड साइंस तथा दाइ निप्पॉन प्रिंटिंग कंपनी का भ्रमण कर विज्ञान, रोबोटिक्स और आधुनिक तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।
वहीं, तीन जुलाई को मिराइकेन म्यूजियम में प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. चीको असाकावा के व्याख्यान में शामिल हुईं, जहां दृष्टिबाधित लोगों के लिए विकसित स्मार्ट नेविगेशन तकनीक के बारे में जानकारी मिली।