हाथ में डंडा-झाड़ू लेकर निकलीं महिलाएं, पश्चिम चंपारण के बड़गो में शराबियों की शामत
पश्चिम चंपारण के बड़गो गांव की महिलाओं ने अवैध शराब की बिक्री और सेवन के खिलाफ खुद मोर्चा संभाल लिया ...और पढ़ें

एकजुट बड़गो गांव की महिलाएं । जागरण
HighLights
बड़गो गांव की महिलाओं ने शराब के खिलाफ मुहिम छेड़ी।
हाथों में डंडा-झाड़ू लेकर शराबियों का विरोध कर रही हैं।
एक सप्ताह में गांव में शराब की बिक्री पर काफी हद तक रोक लगी।
गौरव वर्मा, रामनगर (पश्चिम चंपारण)। शराबबंदी के बावजूद अवैध शराब की बिक्री और सेवन का मामला लगातार सामने आता रहता है। ऐसे में जहां व्यवस्था पर सवाल उठते हैं, वहीं बड़गो गांव की महिलाओं ने शराब के खिलाफ खुद मोर्चा संभाल लिया है।
करीब एक सप्ताह से गांव की महिलाएं शाम होते ही हाथों में डंडा, झाड़ू और अन्य सामान लेकर निकल रही हैं। गांव में जहां भी शराब पीते या पिलाते लोग मिलते हैं, महिलाएं उन्हें रोकने के साथ विरोध करती हैं।
महिलाओं की इस मुहिम का असर अब गांव में दिखाई देने लगा है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव में होने वाली अवैध शराब की बिक्री पर काफी हद तक रोक लगी है।
महिलाओं के विरोध के कारण शराब पीने वाले लोग भी अब घर से बाहर निकलकर शराब पीने से परहेज करने लगे हैं। कई शराबी पति भी अपनी पत्नियों के इस रुख से भयभीत हैं।
महिलाओं का कहना है कि शराब के कारण परिवारों में विवाद और आर्थिक परेशानी बढ़ती है। इसलिए उन्होंने गांव को नशामुक्त बनाने का निर्णय लिया है। दिनभर घर-गृहस्थी का काम निपटाने के बाद शाम को महिलाएं एकजुट होकर निगरानी करती हैं।
उनकी इस पहल की गांव में चर्चा हो रही है और लोग सराहना कर रहे हैं। महिलाओं ने कहा कि शराब के खिलाफ उनका अभियान आगे भी जारी रहेगा।

एक सप्ताह में बदल गई गांव की तस्वीर
थाना क्षेत्र के बड़गो गांव में महज एक सप्ताह पहले तक न सिर्फ चोरी छिपे शराब की बिक्री होती थी। बल्कि कई लोग इसका सेवन भी कर रहे थे। युवा पीढ़ी भी इस कदम पर आगे बढ़ रही थी।
हालांकि पुलिस ने कई बार कार्रवाई की। परंतु, कोई फायदा नहीं हुआ। इसलिए कि आरोपित जेल जाते थे और छूटने के बाद फिर से इसी काम में लग जाते थे। सबसे ज्यादा समस्या उन महिलाओं के समक्ष होती थी जो आर्थिक रूप से कमजोर थीं।
पूरे, दिन पति मजदूरी करते, शाम को जो पैसे मिलते ही शराब का सेवन करते, जिससे पैसे खत्म हो जाते थे। उसके बाद खाली हाथ घर लौट आते। जिससे घर में रोज लड़ाई झगड़े भी होते।
इतना ही नहीं अवैध शराब की बिक्री के कारण गांव में बाहरी लोगों का भी आना-जाना बढ़ गया था। इसे देखते हुए जीविका से जुड़ी महिलाओं ने खुद इस पर पहल शुरू की।
चंद महिलाओं ने उठाया बीड़ा आज 50 के पार
नगीना देवी का कहना है कि पहले चंद महिलाएं हीं जुड़ी थी। अब 50 महिलाएं इस कार्य में सहयोग कर रही हैं। शांति देवी, इंदिरा देवी, द्रौपदी देवी, इंद्राणी देवी, सुनीता देवी, श्याम ज्योति देवी, नयन देवी, रिंकी, सुमित्रा, ललिता पटेल, बेदामी, पूनम, मीरा, माला, अनीता, सुशीला, तारा, गुलबदन, सूरजपति, रानी, प्रतिमा, संजू,रीमा, रजनी, नीतू, शारदा समेत अन्य महिलाएं इससे जुड़ी हैं। इसके अलावा इसमें पुरुषों का सहयोग भी मिल रहा है।
बोले अध्यक्ष
नारी विकास शक्ति जीविका समूह की अध्यक्ष फूलकली देवी का कहना है कि गांव एवं घरों के बिगड़ते माहौल को देखते हुए यह कदम उठाया गया। पहले बाहरी लोगों को खदेड़ने का काम शुरू हुआ। अब बाहरी लोगों का आना-जाना बंद हो गया है। शराब की बिक्री भी बंद है। यह कदम भविष्य को देखते हुए उठाया गया है।
बोले ग्रामीण
ग्रामीण मनोज पाल का कहना है कि झूठ नहीं बोलूंगा। मेरी भी आदत बिगड़ गई थी। पैसे शराब पर काफी खर्च हो रहे थे। पर, महिलाएं जो कर रहीं हैं। वह काफी अच्छा काम है। इससे गांव में शांति आ रही।
महिलाओं ने जो कदम उठाया है। वह काबिले तारीफ है। बड़गो गांव की महिलाओं ने यह साबित किया है कि अगर ठान लिया जाए तो, कोई कार्य मुश्किल नहीं है। शराब बंदी को प्रभावी बनाने में इनका काफी महत्वपूर्ण योगदान है। इससे अन्य पंचायत के महिलाओं को भी सीख लेनी चाहिए।
रमिता देवी, मुखिया, सोनखर पंचायत ।
