शिक्षकों के वेतन से गलत EPF कटौती, पश्चिम चंपारण में 1800 रिफंड में देरी से बढ़ा आक्रोश
BPSC Teacher EPF Refund:पश्चिम चंपारण के पिपरासी प्रखंड में बीपीएससी शिक्षकों के वेतन से गलत तरीके से काटी गई ईपीएफ राशि वापस न मिलने से गहरा आक्रोश ह ...और पढ़ें

शिक्षकों के खाते से काटी गई ईपीएफ (EPF) की राशि वापस नहीं की जा सकी है। फाइल फोटो

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संवाद सूत्र, पिपरासी (पश्चिम चंपारण)। Bihar Teacher Salary Cut: बिहार में बीपीएससी (BPSC) के जरिए बहाल हुए शिक्षकों के वेतन से ईपीएफ के नाम पर हुई गलत कटौती का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। पश्चिम चंपारण जिले के पिपरासी प्रखंड में महीनों बीत जाने के बाद भी शिक्षकों के खाते से काटी गई ईपीएफ (EPF) की राशि वापस नहीं की जा सकी है।
विभाग की इस लेट-लतीफी को लेकर स्थानीय शिक्षकों में गहरा आक्रोश है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पिपरासी अंचल शिक्षक संघ ने अब सारण स्नातक क्षेत्र के एमएलसी (MLC) डॉ. विरेन्द्र नारायण यादव को पत्र भेजकर इस प्रशासनिक गतिरोध को दूर करने और हस्तक्षेप करने की मांग की है।
22 महीने तक हुई गलत कटौती
पिपरासी अंचल शिक्षक संघ के अध्यक्ष पारस नाथ सिंह और सचिव कृष्ण चंद्र निषाद ने संयुक्त रूप से बताया कि प्रखंड के बीपीएससी शिक्षकों के वेतन से नियम विरुद्ध तरीके से हर महीने 1,800 रुपये की कटौती की गई।
यह सिलसिला एक-दो महीने नहीं, बल्कि पूरे 22 महीनों तक लगातार चलता रहा। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो विभाग को अब प्रत्येक प्रभावित शिक्षक के खाते में कुल 39,600 रुपये की भारी-भरकम राशि वापस (रिफंड) करनी है। लंबा समय बीत जाने के बाद भी यह भुगतान अटका हुआ है, जिससे शिक्षक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
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प्रक्रिया पूरी, फिर भी भुगतान में देरी
शिक्षक संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, राशि वापसी को लेकर जितने भी जरूरी दस्तावेज और विवरण थे, उन्हें विभाग के निर्देशानुसार पहले ही सौंप दिया गया है। संबंधित विवरण बिहार सरकार के शिक्षा विभाग, जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) बेतिया और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) पिपरासी को निर्धारित पत्रांकों के माध्यम से बहुत पहले ही उपलब्ध कराया जा चुका है।
सारे कागजात दुरुस्त होने के बावजूद निचले स्तर पर रिफंड की फाइलें अटकी हुई हैं। संघ ने एमएलसी से इस मामले को विधानसभा और विभाग के शीर्ष अधिकारियों के समक्ष उठाकर शीघ्र भुगतान सुनिश्चित कराने की अपील की है।
क्यों फंसा ईपीएफ का पेंच?
दरअसल, यह पूरा विवाद शिक्षा विभाग की एक तकनीकी और लिपिकीय चूक का नतीजा है। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) से बहाल शिक्षक पूरी तरह 'राज्यकर्मी' हैं। नियमानुसार, इन शिक्षकों पर ईपीएफ लागू नहीं होता, बल्कि इनके लिए राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के तहत प्रान (PRAN) खाते में 10% की कटौती का प्रावधान है।
लेकिन, पहले चरण (TRE-1) और दूसरे चरण (TRE-2) की बहाली के समय कई जिलों के स्थापना प्रभागों ने गलती से इन नए शिक्षकों के वेतन से भी नियोजित शिक्षकों की तरह 1,800 रुपये ईपीएफ काटना शुरू कर दिया।
इनमें कई ऐसे शिक्षक भी थे जो पहले नियोजित थे और बाद में बीपीएससी पास कर नए स्कूलों में आए, लेकिन उनका पुराना ईपीएफ खाता समय पर बंद नहीं किया गया। अब विभाग इस गलत कटौती को सुधारने (ऑडिट) का दावा तो कर रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर शिक्षकों को उनका पैसा वापस मिलने का इंतजार लंबा होता जा रहा है।
आंकड़े और विवाद की मुख्य बातें
विवाद का केंद्र: पिपरासी प्रखंड, पश्चिम चंपारण (बेतिया)
कितने महीनों तक हुई कटौती: 22 महीने
हर महीने कटने वाली राशि: ₹1,800 प्रति शिक्षक
कुल रिफंड राशि: ₹39,600 प्रति शिक्षक (बकाया)
शिकायत कहाँ की गई: सारण स्नातक क्षेत्र के एमएलसी विरेन्द्र नारायण यादव से
तकनीकी कारण: बीपीएससी शिक्षकों पर ईपीएफ नहीं, बल्कि एनपीएस (NPS) नियम लागू होता है