जीएमसीएच के प्राचार्य की सलाह, नवजात के लिए मां का पहला दूध अमृत, जन्म के एक घंटे में स्तनपान जरूरी
बेतिया के जीएमसीएच में विश्व स्तनपान सप्ताह पर चिकित्सकों ने नवजात के लिए मां के दूध, खासकर जन्म के एक घंटे के भीतर कोलेस्ट्रम के महत्व पर जोर दिया। य ...और पढ़ें

जागरूकता कार्यक्रम में प्राचार्या डॉ. सुधा भारती, अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार एवं अन्य चिकित्सक। फोटो: जागरण
HighLights
कोलेस्ट्रम नवजात के लिए प्राकृतिक वैक्सीन, बढ़ाता है रोग प्रतिरोधक क्षमता।
मां का दूध शिशु के संपूर्ण शारीरिक-मानसिक विकास हेतु आवश्यक।
जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान शिशु के लिए बेहद महत्वपूर्ण।
जागरण संवाददाता, बेतिया (पश्चिम चंपारण)। World Breastfeeding Week: विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (जीएमसीएच) बेतिया में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में चिकित्सकों ने नवजात के लिए मां के दूध के महत्व पर जोर दिया।
कार्यक्रम में बताया गया कि जन्म के एक घंटे के भीतर मां का पहला दूध (कोलेस्ट्रम) पिलाना शिशु के बेहतर स्वास्थ्य और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए बेहद जरूरी है।
कोलेस्ट्रम का महत्व
जीएमसीएच की प्राचार्य डॉ. सुधा भारती ने कहा कि मां का पहला पीला, गाढ़ा और चिपचिपा दूध नवजात के लिए अमृत के समान होता है। यह शिशु के शरीर में प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता विकसित करता है और संक्रमण सहित कई गंभीर बीमारियों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) भी जन्म के तुरंत बाद स्तनपान शुरू कराने और पहले छह माह तक केवल मां का दूध पिलाने की सिफारिश करता है।
मां का दूध संपूर्ण पोषण
प्राचार्य ने कहा कि मां का दूध शिशु के लिए संपूर्ण एवं संतुलित आहार है। इसमें आवश्यक पोषक तत्व, एंटीबॉडी और रोग प्रतिरोधक तत्व प्राकृतिक रूप से मौजूद रहते हैं, जिससे शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है। साथ ही कुपोषण और संक्रमण का खतरा भी काफी कम हो जाता है।
उन्होंने कहा कि स्तनपान केवल शिशु ही नहीं, बल्कि मां के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। इससे प्रसव के बाद स्वास्थ्य में तेजी से सुधार होता है और कई बीमारियों का जोखिम कम होता है।
छह माह तक स्तनपान
अस्पताल अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि विश्व स्तनपान सप्ताह का उद्देश्य महिलाओं को स्तनपान के महत्व के प्रति जागरूक करना और कामकाजी महिलाओं के अधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाना है। उन्होंने सरकारी और निजी संस्थानों में स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए अनुकूल वातावरण विकसित करने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने सलाह दी कि शिशु को छह माह की आयु तक केवल मां का दूध दिया जाए। इसके बाद स्तनपान जारी रखते हुए पौष्टिक पूरक आहार शुरू करना चाहिए।
कोलेस्ट्रम प्राकृतिक वैक्सीन
कार्यक्रम में चिकित्सकों ने बताया कि कोलेस्ट्रम नवजात के लिए पहली प्राकृतिक वैक्सीन की तरह कार्य करता है। यह डायरिया, निमोनिया समेत कई संक्रामक रोगों से बचाने में मदद करता है। नियमित स्तनपान से मां और शिशु के बीच भावनात्मक जुड़ाव भी मजबूत होता है।
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कार्यक्रम में अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. दिवाकांत मिश्रा, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. राजीव कुमार रंजन, डॉ. अजय कुमार, डॉ. सौरभ कुमार, डॉ. शंभू कुमार सहित चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, मेडिकल छात्र-छात्राएं और बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं।