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    पश्चिम चंपारण में नेपाल की बारिश से ओरिया नदी में बाढ़, एसएसबी पोस्ट और बाजार डूबे

    Updated: Thu, 16 Jul 2026 03:18 PM (GMT+05:30)

    Bihar Flood News: नेपाल में भारी बारिश के कारण पश्चिम चंपारण की ओरिया नदी उफान पर है, जिससे मैनाटांड़ प्रखंड में एसएसबी चेकपोस्ट और इनरवा बाजार जलमग्न ...और पढ़ें

    बाढ़ के पानी ने कई इलाकों को अपनी जद में ले लिया है। फोटो: जागरण

    बाढ़ के पानी ने कई इलाकों को अपनी जद में ले लिया है। फोटो: जागरण

    जागरण संवाददाता, बेतिया (पश्चिम चंपारण)। Nepal Rain Impact: नेपाल में बीती रात हुई भारी बारिश का असर अब पश्चिम चंपारण के सीमावर्ती इलाकों में दिखने लगा है। मैनाटांड़ प्रखंड से होकर बहने वाली पहाड़ी ओरिया नदी उफान पर है।

    नदी का जलस्तर बढ़ने से एसएसबी का नेपाल गली चेकपोस्ट और इनरवा बाजार जलमग्न हो गए हैं। कई गांवों के खेतों और निचले इलाकों में भी बाढ़ का पानी फैल गया है।

    एसएसबी चेकपोस्ट में घुसा पानी

    गुरुवार सुबह इनरवा बाजार स्थित नेपाल गली एसएसबी चेकपोस्ट में बाढ़ का पानी घुस गया। इसके बाद एसएसबी के जवानों ने चेकपोस्ट पर रखा सामान सुरक्षित निकालकर अस्थायी रूप से एक ग्रामीण सुलेमान मियां के बरामदे में शिफ्ट कर दिया। फिलहाल चेकपोस्ट का टेंट नहीं हटाया गया है और जवान हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

    इनरवा एसएसबी कैंप के इंस्पेक्टर जमील सैफी ने बताया कि पानी चेकपोस्ट तक पहुंचने के बाद सभी जरूरी सामान सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कर दिए गए हैं।

    खेतों और घरों तक पहुंचा पानी

    ओरिया नदी का जलस्तर बढ़ने से खम्हियां, इनरवा, इनरवा बाजार, नगरदेही, बसंतपुर, सेमरवारी और गदियानी भंगहा समेत कई गांवों के आसपास बाढ़ का पानी फैल गया है। इनरवा बाजार के इंडो-नेपाल सीमा सड़क के पूर्वी हिस्से में स्थित चार घरों में भी पानी घुस गया है। हालांकि, अब तक किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है।

    हर साल बाढ़ से जूझते ग्रामीण

    स्थानीय ग्रामीण संदीप यादव, हरेंद्र यादव, राजकुमार यादव, नबिरसूल अंसारी, मनीफ मियां, अनिल कुमार और कृष्णा यादव ने बताया कि इनरवा और इनरवा बाजार में लगभग हर वर्ष बाढ़ का पानी प्रवेश कर जाता है। इसके बावजूद स्थायी समाधान की दिशा में अब तक कोई प्रभावी पहल नहीं हुई है।

    बाढ़ सुरक्षा के स्थायी उपाय की मांग

    ग्रामीणों ने प्रशासन से बाढ़ से बचाव के लिए ठोस और स्थायी व्यवस्था करने की मांग की है। उनका कहना है कि हर वर्ष बाढ़ आने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है और सीमावर्ती इलाकों में जनजीवन प्रभावित हो जाता है।

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