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    West Champaran : रामनगर में 15 दिन से घूम रहा बाघ, खेतों में जाने से डर रहे किसान

    Updated: Sun, 26 Jul 2026 07:22 PM (GMT+05:30)

    पश्चिम चंपारण के रामनगर में एक बाघ 15 दिनों से अपना ठिकाना बदल रहा है, जिससे किसान खेतों में जाने से डर रहे हैं। वन विभाग की टीम लगातार बाघ की गतिविधि ...और पढ़ें

    पश्चिम चंपारण में बाघ का  लोकेशन को ट्रैक करने में जुटे वनकर्मी।

    पश्चिम चंपारण में बाघ का  लोकेशन को ट्रैक करने में जुटे वनकर्मी।

    HighLights

    1. बाघ 15 दिनों से रामनगर प्रखंड में घूम रहा है।

    2. किसान खेतों में जाने से डर रहे, दहशत का माहौल।

    3. वन विभाग बाघ को जंगल भेजने का प्रयास कर रहा।

    संवाद सूत्र, रामनगर (पश्चिम चंपारण) । अपना लोकेशन बार बार बदलने वाला बाघ अब भावल गांव के पश्चिम मसान नदी के सरेह में पहुंच गया है। इसके पगमार्क उक्त सरेह में मिलने के बाद रघिया वन क्षेत्र के कर्मी रविवार की सुबह से ही लोकेशन को ट्रैक करने में जुटे है। इसकी पुष्टि रघिया रेंजर राजेश राम ने की है।

    बताया कि कर्मी इस क्षेत्र में कैंप कर रहे हैं। बाघ के पगमार्क के आधार पर बाघ का लोकेशन ट्रैक कर इसे वापस जंगल की तरफ भेजने का प्रयास चल रहा है।

    वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से निकलकर एक बाघ पिछले करीब 15 दिनों से रामनगर प्रखंड के मसान नदी के किनारे सटे धनरपा, भावल, बड़ा बेलवा के साथ अलग-अलग गांवों के सरेह में विचरण कर रहा है।

    लगातार लोकेशन बदलने से क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। बाघ की मौजूदगी के कारण कई किसानों ने खेतों की ओर जाना छोड़ दिया है, जबकि वन विभाग की टीम लगातार बाघ के गतिविधि पर नजर बनाए हुए है।

    रघिया वन क्षेत्र की वनकर्मियों की टीम बाघ की ट्रैकिंग में जुटी है। बार बार जगह बदल रहे बाघ का पग मार्क इस बार भावल और बड़ा बेलवा गांव के बीच मसान नदी के सरेह में मिला है।

    बाघ को सुरक्षित तरीके से वापस जंगल की ओर भेजने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। रेंजर ने लोगों से अपील की है कि सरेह में अकेले नहीं जाएं। अत्यंत आवश्यक होने पर समूह बनाकर ही खेतों की ओर निकलें तथा मवेशियों पर विशेष नजर रखें।

    बीते शनिवार को बाघ का लोकेशन मसान नदी के किनारे बेलवा गांव के सरेह में मिला था। इधर रविवार को भी बाघ के दहशत से कई किसान अपने खेतों की तरफ नहीं गए। वहीं माल मवेशी चराने वाले चरवाहे भी मवेशी को लेकर मसान नदी के सरेह में नहीं जा रहे हैं। पिछले सप्ताह बड़ा बेलवा गांव के सरेह में एक बछड़े को मार दिया था। जिसके बाद मवेशी पालक और अधिक परेशान हैं।

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