पश्चिम चंपारण में आठ अंडे और मगरमच्छ की चर्चा... जांच हुई तो सामने आया असली सच
पश्चिम चंपारण के सिसकारी सरेह में मिले आठ अंडों को पहले मगरमच्छ का समझा गया था, लेकिन जांच में वे सांप के निकले। वन विभाग ने लोगों से वन्यजीवों से छेड ...और पढ़ें

सिसकारी सरेह में मिला सांप का अंडा । सौजन्य-वन विभाग
संवाद सूत्र, पिपरासी (पश्चिम चंपारण)। सिसकारी सरेह में मिले आठ अंडों ने ग्रामीणों को कुछ समय के लिए हैरान कर दिया था। इलाके में चर्चा फैल गई कि सरेह से मगरमच्छ के अंडे मिले हैं।
सूचना वन विभाग तक पहुंची तो मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट सामने आई तो पूरी कहानी ही बदल गई। बरामद अंडे मगरमच्छ के नहीं, बल्कि सांप के निकले।
मगरमच्छ के अंडे मिलने की थी चर्चा
मामला स्थानीय थाना क्षेत्र की मंझरिया पंचायत स्थित सिसकारी सरेह का है। यहां कुछ अंडे मिलने के बाद ग्रामीणों के बीच उनके मगरमच्छ के होने की चर्चा शुरू हो गई। देखते ही देखते यह बात इलाके में फैल गई। इसके बाद वन विभाग ने अंडों की पहचान कराने की पहल की।
डब्ल्यूटीआइ की टीम ने की जांच
बगहा वन क्षेत्र पदाधिकारी श्रीमान मालाकार ने बताया कि वर्तमान समय मगरमच्छ के अंडे देने का मौसम नहीं है। ऐसे में अंडों की सही पहचान के लिए डब्ल्यूटीआइ (वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया) की टीम से जांच कराई गई। विशेषज्ञों की जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि बरामद अंडे मगरमच्छ के नहीं हैं। ये सांप के अंडे हैं।
सरेह से मिले थे आठ अंडे
वन विभाग के अनुसार घटनास्थल से कुल आठ अंडे बरामद किए गए थे। मामले की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग की गठित टीम ने सभी अंडों को सुरक्षित तरीके से अपने संरक्षण में ले लिया। विभागीय मानकों के अनुरूप अंडों को संरक्षित किया गया है।
उच्च अधिकारियों को दी गई सूचना
वन विभाग की ओर से मामले की सूचना उच्च अधिकारियों को भी भेजी गई है। विभागीय निर्देश के आलोक में आगे की कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि वन्यजीवों से जुड़े मामलों में विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर ही कोई कदम उठाया जाता है।
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अंडों से छेड़छाड़ न करने की अपील
वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वन्यजीव या उनके अंडे दिखाई देने पर स्वयं उन्हें छूने या हटाने का प्रयास न करें। ऐसी स्थिति में तत्काल वन विभाग को सूचना दें। विशेषज्ञों की निगरानी में ही आवश्यक कार्रवाई की जाएगी, जिससे वन्यजीवों को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे।