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West champaran : प्राइवेट स्कूलों के लिए फीस-यूनिफॉर्म के नियम तय, मनमानी पर प्रशासन सख्त

By Shashi Mishra Edited By: Dharmendra Singh
Published: Thu, 16 Apr 2026 06:24 PM (IST)

पश्चिम चंपारण प्रशासन ने निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए सख्त नियम जारी किए हैं। जिलाधिकारी ने ...और पढ़ें

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

HighLights

  1. निजी स्कूलों की फीस और यूनिफॉर्म पर नए नियम लागू।

  2. अभिभावकों को विशेष दुकान से खरीदने को बाध्य नहीं किया जाएगा।

  3. यूनिफॉर्म कम से कम तीन साल तक नहीं बदली जाएगी।

जागरण संवाददाता, बेतिया (पश्चिम चंपारण)। अब प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगाम कसने की तैयारी तेज हो गई है। फीस बढ़ोतरी से लेकर यूनिफॉर्म और किताबों के नाम पर मनमाने खर्च वसूलने की शिकायतों के बीच प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है।

नए नियमों के तहत अब स्कूल न तो अचानक फीस बढ़ा सकेंगे और न ही अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डाल पाएंगे। पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश तय किए गए हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन और संतुलन लाने की कोशिश की जा रही है।

बिहार के पश्चिम चंपारण में जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। जिलाधिकारी सह जिला दंडाधिकारी तरनजोत सिंह ने निजी स्कूलों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी करते हुए शुल्क, यूनिफॉर्म और अन्य व्यवस्थाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

इस फैसले से जिले के करीब डेढ़ लाख से अधिक छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है। जिले में 552 प्रस्वीकृत निजी विद्यालय और 39 सीबीएसई मान्यता प्राप्त स्कूल संचालित हैं।

इन स्कूलों के खिलाफ लंबे समय से अधिक शुल्क वसूली, अनावश्यक फीस लेने और अभिभावकों को विशेष दुकानों से किताबें व यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य करने की शिकायतें मिल रही थीं। जांच में कई अनियमितताएं सामने आने के बाद प्रशासन ने यह कार्रवाई की है।

जारी आदेश के अनुसार अब कोई भी विद्यालय अभिभावकों को किसी एक दुकान से किताब, कॉपी, यूनिफॉर्म या अन्य सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगा। अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार कहीं से भी सामग्री खरीद सकेंगे।

साथ ही सभी स्कूलों को फीस संरचना, किताबों की सूची और यूनिफॉर्म का विवरण नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। जहां संभव हो, इसे स्कूल की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराना होगा। प्रशासन ने यूनिफॉर्म को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिया है कि एक बार तय यूनिफॉर्म को कम से कम तीन वर्षों तक नहीं बदला जाएगा।

इससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। छात्रों को बड़े भाई-बहनों की पुरानी किताबों के उपयोग के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत नामांकित कमजोर वर्ग के छात्रों के साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करने का निर्देश दिया गया है।

जिलाधिकारी ने चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के प्राचार्य और संचालकों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके अनुपालन की जिम्मेदारी जिला शिक्षा पदाधिकारी को सौंपी गई है, जबकि नगर निकाय, प्रखंड प्रशासन और पुलिस को नियमित जांच के निर्देश दिए गए हैं।

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