पश्चिम चंपारण में किसानों पर संकट, त्रिवेणी नहर का सुरक्षा बांध टूटा, धान-गन्ने की फसल खतरे में
पश्चिम चंपारण के मैनाटांड़ में भारी बारिश से त्रिवेणी नहर का सुरक्षा बांध टूट गया, जिससे खमिया और रमपुरवा गांवों के सैकड़ों किसानों की करीब 200 एकड़ ध ...और पढ़ें

त्रिवेणी नहर के टूटे सुरक्षा बांध के समीप खड़े ग्रामीण। जागरण
HighLights
भारी बारिश से त्रिवेणी नहर का सुरक्षा बांध टूटा।
200 एकड़ धान और गन्ने की फसलें जलमग्न हुईं।
सिंचाई विभाग की निष्क्रियता से किसानों में आक्रोश।
संवाद सूत्र, मैनाटांड़ (पश्चिम चंपारण)। पिछले दो दिनों की मूसलाधार वर्षा के कारण पानी के दबाव से रमपुरवा एवं खमिया गांव के समीप बीती रात मुख्य त्रिवेणी नहर का सुरक्षा बांध करीब 10 फीट के आसपास टूट गया।
बांध के टूटने से खमिया एवं रमपुरवा गांव के सैकड़ों किसानों के करीब 200 एकड़ के आसपास धान लगे खेत में पानी फैल गया है। धान का फसल पूरी तरह से डूब गया है। जबकि गन्ने के खेत में भी पानी फैला हुआ है। इससे गन्ने के फसल को भी नुकसान पहुंच रहा है।
हालांकि इसकी सूचना ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को दी है। लेकिन अभी तक नहर में पानी बंद नहीं किया गया है, इस वजह से किसानों में आक्रोश है। रमपुरवा के किसान धीरज साह, अनिल श्रीवास्तव, खमिया के किसान वीरेंद्र कुशवाहा ने बताया कि त्रिवेणी नहर के फाल संख्या एक के पास सुरक्षा बांध टूटा हुआ है।
खेतों में जमा वर्षा का पानी त्रिवेणी नहर में घुस रहा है। जिससे नहर में पानी का दबाव बढ़ गया है। खमिया के किसान आनंद मिश्र ने बताया कि इसकी सूचना सिंचाई विभाग को दी जा चुकी है। लेकिन अभी तक बांध की मरम्मती को लेकर विभाग की ओर से कोई पहल नहीं की गई है।
खेतों में फसल डूब गए हैं। अगर यही स्थिति रही तो किसानों को काफी नुकसान होगा। मामले में सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता सुजीत कुमार का कहना है कि बांध के वर्षा के पानी से टूटने की सूचना मिली है।
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पानी का दबाव कम होने के बाद ही उसकी मरम्मत संभव है। फिलहाल, कनीय अभियंता को स्थल पर भेजा गया है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
पहाड़ी नदियों का बढ़ा जलस्तर
प्रखंड क्षेत्र में विगत दो दिनों से हो रही मूसलाधार वर्षा से धान की रोपनी में तेजी आ गई है। वहीं पहाड़ी नदियों का जलस्तर बढ़ने लोग बाढ़ के खतरा से भयभीत हैं।
प्रखंड क्षेत्र में बहने वाली दोरहम ,नौखनिया, मनिहारी,थेथरी,गंगासागर,रांगी,बिरहा सहित ओरिया नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। हालांकि अभी बाढ़ जैसी स्थिति तो नहीं है फिर भी प्रखंड क्षेत्र के दर्जनों गांव में वर्षा के पानी से धान की फसल डूब गई है।