Thyroid Health को केवल TSH तक सीमित न करें, ब्लड प्रेशर से है गहरा संबंध
हाइपोथायरायडिज्म, जिसके लक्षणों में थकान और वजन बढ़ना शामिल है, हृदय स्वास्थ्य और रक्तचाप को गंभीर रूप से प्रभावित करता ...और पढ़ें

थायरॉइड और ब्लड प्रेशर: जानें हृदय रोगों से इसका सीधा कनेक्शन (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
हाइपोथायरॉयडिज्म में थकान, वजन बढ़ने जैसे लक्षण नजर आते हैं
कम थायरॉइड हार्मोन ब्लड वेसल्स को सख्त कर रक्तचाप बढ़ाते हैं
सही इलाज और जीवनशैली से हृदय रोगों का जोखिम कम होता है
ब्रांड डेस्क, नई दिल्ली। क्या आप जानते हैं कि थकावट, वजन का बढ़ना, रुखी त्वचा और हमेशा कम्पन महसूस होना किस स्वास्थ्य स्थिति के संकेत हैं? लोग मानते हैं कि ये हाइपोथायरायडिज्म (Underactive Thyroid) के सामान्य लक्षण हैं। हाइपोथायरायडिज्म में थायरॉइड ग्लैंड पर्याप्त मात्रा में थायरॉइड हार्मोन का उत्पादन नहीं कर पाता है। यह मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल और बॉडी के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसके अलावा, यह हार्ट रेट को प्रबंधित करता है और मस्तिष्क के विकास में मदद करता है।
थायरॉइड हार्मोन लेवल का नीचे गिरना आपके ह्रदय के लिए सही नहीं
हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण बहुत सामान्य होते हैं, इसलिए ज्यादातर लोग यह महसूस नहीं कर पाते कि इसका प्रभाव हमारे ह्रदय और रक्त वाहिकाओं पर पड़ता है। यह लोगों के रक्तचाप से जुड़ा हुआ है। हाइपोथायरायडिज्म की स्थिति में थायरॉइड हार्मोन नीचे गिरता है, जिससे शरीर के ज्यादातर फंक्शन प्रभावित होते हैं, वे धीमे पड़ जाते हैं। इसका असर व्यक्ति के ह्रदय पर पड़ता है। ब्लड सही से पंप नहीं हो पाता है, और रक्त वाहिकाओं के जरिए होने वाले ब्लड फ्लो में बदलाव देखने को मिलता है।
ब्लड प्रेशर को केवल लाइफस्टाइल की खराब आदतों से जोड़कर न देखें
अगर आपको हाइपोथायरायडिज्म के बारे में कम जानकारी है, तो यह चीज आपके ह्रदय के लिए सही नहीं है। आपको जानना चाहिए कि थायरॉइड हार्मोन रक्त वाहिकाओं को फ्लेक्सिबल और रिलेक्स रखने में मदद करता है। जब हार्मोन लेवल नीचे गिरता है, रक्त वाहिकाएं ज्यादा सख्त हो जाती हैं और उनका ज्यादा फैलाव नहीं हो पाता है। यह स्थिति आपकी सेहत के लिए सही नहीं है। इससे ब्लड फ्लो में रुकावट पैदा होती है, जो ब्लड प्रेशर की वजह बनती है।
इसका मतलब यह हुआ कि डायस्टॉलिक प्रेशर बढ़ रहा है। ब्लड प्रेशर का बढ़ना अक्सर लाइफस्टाइल की खराब आदतों, कम नींद और तनाव से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन इसका संबंध हाइपोथायरायडिज्म से भी है, इस ओर हमारा ध्यान कम जाता है। अगर लाइफस्टाइल ठीक है और ह्रदय की समस्या बढ़ रही है, तो यह हाइपोथायरायडिज्म से जुड़ा हो सकता है।
ह्रदय रोग का रिस्क बढ़ेगा, अगर हाइपोथायरायडिज्म का इलाज नहीं हुआ
हाइपोथायरायडिज्म कई तरीके से कार्डियोवैस्कुलर स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। इससे कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ेगा, जो ह्रदय रोग के रिस्क को बढ़ाएगा। यह वजन को भी बढ़ाएगा, जिससे ह्रदय पर अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा। इसके अलावा, यह ह्रदय के काम करने की क्षमता को कम करता है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन में परेशानी आती है। यह रक्त वाहिकाओं को सख्त कर देता है, जो हाइपरटेंशन की वजह बनता है। इस तरह हम कह सकते हैं कि अगर हाइपोथायरायडिज्म की स्थिति का सही इलाज नहीं किया गया, तो भविष्य में ह्रदय से संबंधित समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
क्या है सॉल्यूशन?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि थायरॉइड हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरिपी के जरिए हाइपोथायरायडिज्म का उचित उपचार संभव है। इसके जरिए थायरॉइड स्वास्थ्य और कार्डियोवैस्कुलर फंक्शन दोनों में सुधार होगा। यह हार्मोन के स्तर को सामान्य लाने में मदद करेगा, जिसके परिणामस्वरूप ह्रदय और रक्त वाहिकाएं ज्यादा बेहतर तरीके से काम करेंगी। इसका मतलब यह हुआ कि थायरॉइड के कामकाज में सुधार होने से ब्लड प्रेशर वापस सामान्य स्तर के ज्यादा करीब आ सकता है।
हालांकि, यह सोचना गलत है कि सामान्य थायरॉइड हार्मोन लेवल के बाद भी किसी व्यक्ति को हाई ब्लड प्रेशर नहीं हो सकता। अगर मोटापा, किडनी की बीमारी, डायबिटीज, हाइपरटेंशन का पारिवारिक इतिहास या नियमित धूम्रपान करते हैं, तो ये आपके ब्लड प्रेशर को बढ़ा सकते हैं। ऐसी स्थिति में अतिरिक्त ध्यान और इलाज की जरूरत है।
ह्रदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए क्या करें
हाइपोथायरायडिज्म की स्थिति में थायरॉइड फंक्शन और ब्लड प्रेशर की नियमित निगरानी रखना जरूरी है। डॉक्टर के प्रेसक्राइब्ड दवाईयां और हेल्दी लाइफस्टाइल की आदतें सेहत में बड़ा बदलाव ला सकती हैं। इसके लिए संतुलित और ह्रदय को फायदा पहुंचाने वाले आहारों का सेवन करें, शारीरिक गतिविधियों पर ध्यान दें, पूरी नींद लें और तनाव को मैनेज करें। इसके अलावा, नियमित रूप से अपनी बॉडी का चेकअप कराएं।
हाइपोथायरायडिज्म को केवल हार्मोनल इंबैलेंस समझना एक चूक हो सकती है। यह ब्लड प्रेशर, हार्ट फंक्शन और पूरे कार्डियोवैस्कुलर स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। इन दोनों के कनेक्शन को समझना हर किसी के लिए जरूरी है। अगर आपको हाइपोथायरायडिज्म है, तो अपने डॉक्टर से बात करें, उन्हें अपनी ब्लड प्रेशर की स्थिति और थायरॉइड की निगरानी के बारे में बताएं।
अगर बीमारी का पता जल्दी चल जाए और हेल्दी लाइफस्टाइल के साथ उचित इलाज मिल जाए, तो हाइपोथायरायडिज्म के साथ-साथ ह्रदय की बीमारी को भी दूर रखा जा सकता है।
डिस्केल्मर: Abbott ने यह जानकारी लोगों के हित में जारी की है। यह आर्टिकल वैज्ञानिक संदर्भ पर आधारित है। इसमें दी गई कोई भी जानकारी चिकित्सीय सलाह नहीं है और किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी नहीं ली जाती है। अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
