जागरण फिल्म फेस्टिवल में पारुल यूनिवर्सिटी के छात्र, तापसी पन्नू ने सिनेमा, एजिज्म और प्रतिनिधित्व पर की खुलकर बात
वडोदरा की पारुल यूनिवर्सिटी के पत्रकारिता छात्रों ने जागरण फिल्म फेस्टिवल में हिस्सा लिया, जहाँ अभिनेत्री तापसी पन्नू ने सिनेमा ...और पढ़ें

HighLights
तापसी पन्नू ने सिनेमा में महिलाओं के प्रतिनिधित्व और एजिज्म पर बात की।
जागरण फिल्म फेस्टिवल में पारुल यूनिवर्सिटी के छात्रों ने भाग लिया।
तापसी ने स्टीरियोटाइप तोड़ने वाले किरदार चुनने पर जोर दिया।
ब्रांड डेस्क, नई दिल्ली। वडोदरा की पारुल यूनिवर्सिटी के पत्रकारिता एवं जनसंचार के छात्रों ने अपने छह दिवसीय दिल्ली मीडिया लीडरशिप टूर के चौथे दिन जागरण फिल्म फेस्टिवल (JFF) के 14वें संस्करण में हिस्सा लिया, जहाँ अभिनेत्री तापसी पन्नू ने सिनेमा में महिलाओं के प्रतिनिधित्व और एजिज्म पर खुलकर बात की।
जागरण फिल्म फेस्टिवल: सिनेमा और संस्कृति का संगम
जागरण प्रकाशन लिमिटेड द्वारा आयोजित जागरण फिल्म फेस्टिवल दुनिया का सबसे बड़ा ट्रैवलिंग फिल्म फेस्टिवल कहा जाता है। इसकी 2026 की शुरुआत दिल्ली से हुई और यह कानपुर, लखनऊ, वाराणसी, आगरा, पटना और रांची सहित तेरह और शहरों से होते हुए मुंबई में समाप्त होगा।
डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित इस फेस्टिवल का माहौल किसी सामान्य अकादमिक दौरे से अलग था। परिसर में लगे बड़े फोटो बैकड्रॉप सिनेमा के इतिहास को जीवंत कर रहे थे, जिनमें अल पचीनो की 'गॉडफादर', शाहरुख खान की 'देवदास' और मेरिल स्ट्रीप की 'सोफीज़ चॉइस' जैसी फिल्मों के दृश्य शामिल थे। स्क्रीनिंग और पैनल चर्चाओं के साथ यहाँ ज्वेलरी, पेंटिंग, वाद्ययंत्र और टैरो कार्ड रीडिंग तक के स्टॉल लगे थे।
तापसी पन्नू ने स्टीरियोटाइप पर क्या कहा
दिन का सबसे चर्चित सत्र “फ्रॉम पिंक टू पावर: ब्रेकिंग स्टीरियोटाइप्स थ्रू सिनेमा” रहा, जिसका संचालन तापसी पन्नू ने किया। उन्होंने भूमिकाओं के चयन को लेकर अपनी सोच को “नॉट टू प्ले सेफ” यानी सुरक्षित न खेलने के रूप में रखा।
तापसी पन्नू ने तर्क दिया कि सिनेमा तभी असरदार बनता है जब महिला किरदार को जटिल, महत्वाकांक्षी, खामियों वाला और यह परवाह किए बिना गढ़ा जाए कि उसे पसंद किया जाएगा या नहीं। स्टीरियोटाइप को असल चुनौती यहीं से मिलती है। इस सत्र का पूरा विवरण महिलाओं के चित्रण और एजिज्म पर आधारित इस रिपोर्ट में पढ़ा जा सकता है।
एजिज्म पर बेबाक राय
उम्र को लेकर बने दोहरे मापदंड पर तापसी पन्नू ने साफ कहा, “एजिज्म इज अ बिग थिंग।” उन्होंने बताया कि फिल्म निर्माता अक्सर बड़ी उम्र के पुरुष कलाकारों के साथ कम उम्र की अभिनेत्रियों को कास्ट कर देते हैं, भले ही कहानी में किरदार की उम्र तय ही न हो।
उनके अनुसार यह असमानता वर्षों से मुख्यधारा हिंदी सिनेमा में बनी रही है, और दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में भी उन्होंने इसे महसूस किया है।
सिनेमा और पत्रकारिता का साझा सूत्र
सत्र आगे बढ़ते-बढ़ते इस सवाल तक पहुँचा कि जब कोई इंडस्ट्री यह तय करती है कि पर्दे पर किसे जटिल दिखाया जाएगा, तो उसकी जिम्मेदारी क्या बनती है। भावी कहानीकारों के लिए यह किसी सेलिब्रिटी मुलाकात से आगे, प्रतिनिधित्व की राजनीति पर एक कार्यशाला जैसा रहा। यही जुड़ाव पूरे दिल्ली मीडिया लीडरशिप टूर का मुख्य विचार भी था, जिसमें छात्रों ने इंडिया टीवी के राजत शर्मा, एनडीटीवी की पद्मजा जोशी और इंडिया टुडे नेटवर्क के राजदीप सरदेसाई से भी संवाद किया।
प्रतिनिधित्व: सिर्फ किनारे का मुद्दा नहीं
पैनल यहीं नहीं रुका। यह उस बड़े सवाल तक फैला जिसे फेस्टिवल दिनभर उठाता रहा, कि किसी भी समूह को मीडिया जिस तरह दिखाता है, वही तय करता है कि समाज उसे कैसे देखेगा। तापसी पन्नू ने कहा कि जोखिम उठाना और स्टीरियोटाइप तोड़ने वाले किरदार चुनना ही असल बदलाव की शुरुआत है।
भावी पत्रकारों और मीडिया पेशेवरों के लिए संदेश साफ था। प्रतिनिधित्व कोई किनारे का मुद्दा नहीं, बल्कि इस बात का केंद्र है कि कहानियाँ समाज को कैसे गढ़ती हैं, और यही कारण है कि मीडिया के छात्र इसे गंभीरता से पढ़ते हैं।
छह दिनों का दौरा: देश के बड़े न्यूज़रूम
जागरण फिल्म फेस्टिवल इस छह दिवसीय दौरे का सिर्फ एक पड़ाव था। पहले दिन इंडिया गेट पर छात्रों को दस मिनट की तैयारी के साथ कैमरे के सामने 60 सेकंड की लाइव रिपोर्टिंग करनी थी। प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया में उन्होंने तीन-स्रोत सत्यापन नियम सीखा, और हिन्दुस्तान टाइम्स में अख़बार की छपाई की प्रक्रिया देखी, जहाँ प्रेस प्रति घंटे 90,000 प्रतियों तक छपाई करता है।
छात्रों ने इंडिया टीवी के राजत शर्मा, एनडीटीवी की पद्मजा जोशी और इंडिया टुडे नेटवर्क के राजदीप सरदेसाई सहित कई वरिष्ठ पत्रकारों से संवाद किया, और न्यूज़18, टीवी9 तथा रिपब्लिक के न्यूज़रूम को भीतर से देखा।
पारुल यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता की पढ़ाई
इस तरह के अनुभव पारुल यूनिवर्सिटी के लिबरल आर्ट्स संकाय की पढ़ाई का हिस्सा हैं। यहाँ पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक (BA JMC) कोर्स के छात्रों को कक्षा के साथ-साथ स्टूडियो, मीडिया लैब और इंडस्ट्री का सीधा अनुभव दिया जाता है, ताकि वे पढ़ाई पूरी होने पर सिर्फ पत्रकारिता के छात्र नहीं, बल्कि पत्रकार बनकर निकलें।
Note:- यह आर्टिकल ब्रांड डेस्क द्वारा लिखा गया है।
