यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 09, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Insurance Policy पर आसानी से मिल सकता है लोन, लेकिन इन बातों का रखें ध्यान; नहीं तो बर्बाद हो जाएगी आपकी रकम
परिवार की सुरक्षा और उनकी हर खुशियों का ध्यान रखने के लिए आपने भी कभी न कभी लोन और बीमा पॉलिसी जरूर लिया होगा। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि आप अपने ज ...और पढ़ें

नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क: हम भारतीयों की एक खास आदत होती है। वो है अपने परिवार से प्यार करना और उसकी देखभाल करना, चाहे इसके लिए कुछ भी क्यों ना करना पड़ जाए। हम सभी को अपने परिवार की सुरक्षा का डर हमेशा रहता है। आपका यही डर बीमा कंपनियों के लिए बिजनेस बनता है।
परिवार को सुरक्षित रखने के लिए बीमा लेना और उनकी हर मांग को पूरा करने के लिए लोन लेना आज कल हर इंसान की आदत-सी बन गई है। आज हम आपको बताएंगे कि अगर आपके पास भी जीवन बीमा पॉलिसी है तो आप उस पॉलिसी के बदले आसानी से और कम ब्याज पर लोन कैसे ले सकते हैं।
सरेंडर वैल्यू पर निर्भर करती है लोन की रकम
पॉलिसी के बदले लोन आप बैंक या नॉन-बैकिंग वित्तीय संस्थाओं (NBFC) के जरिए ले सकते हैं। आपको बता दें कि पॉलिसी के प्रकार और उसकी सरेंडर वैल्यू लोन की रकम पर निर्भर करती है। आमतौर पर लोन अमाउंट पॉलिसी की सरेंडर वैल्यू का 80 से 90 प्रतिशत तक हो सकती है। इतना पैसा तब मिलेगा जब आपके पास मनी बैक या एंडोमेंट पॉलिसी है।

क्या होती है सरेंडर वैल्यू?
उस समय तक, जब आपका लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी मैच्यौर होगी, अगर उससे पहले आप अपनी पॉलिसी को सरेंडर करते हैं तो आपने उस पॉलिसी के तहत जो प्रीमियम भरा है, उसमें कुछ चार्ज काटने के बाद आपको कुछ हिस्सा वापस मिल जाता है और यही रकम सरेंडर वैल्यू कहलाती है।
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सरेंडर वैल्यू हर बीमा पॉलिसी के साथ नहीं मिलती बल्कि सिर्फ उन पॉलिसी में ही सरेंडर वैल्यू की वापसी होती है जिनमें बीमा के साथ निवेश का भी हिस्सा होता है।
ब्याज दर
आपको लोन कितने ब्याज दर पर मिलेगा, यह आपके प्रीमियम के अमाउंट और भुगतान किए गए प्रीमियम की संख्या पर निर्भर करेगा। आपको बता दें कि लाइफ इंश्योरेंस पर लोन की ब्याज दर 10-12% के बीच होती है।
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लोन वापस नहीं करने पर लैप्स हो सकती है पॉलिसी
पॉलिसीधारक को पॉलिसी पर लिए गए लोन पर ब्याज के अलावा प्रीमियम का भी भुगतान करना होगा। लोन के रिपेमेंट में डिफॉल्ट या प्रीमियम भुगतान करने में चूक होने पर आपकी इंश्योरेंस पॉलिसी लैप्स हो जाएगी। आपको बता दें कि बीमा कंपनी पॉलिसी की सरेंडर वैल्यू से मूल और बकाया ब्याज की रकम वसूलने का अधिकार रखती है।
