8th Pay Commission: सैलरी-पेंशन, फिटमेंट फैक्टर और DA मर्जर पर बड़ा अपडेट! NC-JCM नेता ने सबकुछ कर दिया क्लियर
8th Pay Commission: आठवें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की निगाहें सरकार पर टिकी हैं। NC-JCM नेता शिव गोपाल मिश्रा ने बताया कि बढ ...और पढ़ें

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली | आठवें वेतन आयोग (8th pay commission) को लेकर देश के 50 लाख से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारी और करीब 69 लाख पेंशनर्स की नजरें इस समय सरकार पर टिकी हुई हैं। हर किसी के मन में एक ही सवाल घूम रहा है कि बढ़ी हुई सैलरी और पेंशन आखिर कब से मिलेगी? मामला इसलिए भी गरम है क्योंकि NC-JCM (स्टाफ साइड) की मीटिंग्स लगातार हो रही हैं।
25 फरवरी को पहली अहम बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता ऑल इंडिया रेलवेमैन्स फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी और स्टाफ साइड के नेता शिव गोपाल मिश्रा ने की। अगली मीटिंग 10 मार्च के बाद प्रस्तावित है। इन बैठकों में फिटमेंट फैक्टर (8th pay commission fitment factor), फैमिली यूनिट, डीए मर्जर और भत्तों जैसे बड़े मुद्दों पर चर्चा होनी है।
जागरण बिजनेस ने शिव गोपाल मिश्रा से खास बातचीत कर जाना कि कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए आगे क्या तस्वीर बन सकती है। बातचीत के मुख्य अंश:
सवाल: बढ़ी हुई सैलरी और पेंशन लागू होने की तय तारीख क्या है?
जवाबः आठवें वेतन आयोग की जो ड्यू डेट है वह 1 जनवरी 2026 है। इसलिए बढ़ी हुई सैलरी और पेंशन (8th Pay Commission Salary Pension Hike) उसी तारीख से लागू होगी।
यह परंपरा रही है कि हर 10 साल में पे कमीशन लागू होता है और पिछली तारीख से प्रभावी होता है। भले रिपोर्ट आने में समय लगे, लेकिन लागू होने की तारीख 1 जनवरी 2026 ही मानी जाएगी। इसमें किसी तरह की आशंका रखने की जरूरत नहीं है।
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सवाल: अगर रिपोर्ट आने में 18 महीने लगते हैं तो क्या कर्मचारियों को HRA और TA का नुकसान होगा?
जवाब: यह चिंता बिल्कुल वाजिब है। अगर रिपोर्ट देर से आती है और अलाउंस उसी तारीख से लागू होते हैं, तो बीच की अवधि का नुकसान हो सकता है। हमने साफ मन बनाया है कि सरकार के सामने यह मांग रखेंगे कि सभी अलाउंस चाहे एचआरए हो, ट्रांसपोर्ट अलाउंस हो या अन्य भत्ते 1 जनवरी 2026 से ही लागू किए जाएं। कर्मचारियों को देरी का खामियाजा नहीं भुगतना चाहिए।
सवाल: फिटमेंट फैक्टर को लेकर जो अटकलें चल रही हैं, क्या उस पर कोई स्पष्ट स्थिति बनी है?
जवाब: अभी हम इस पर सार्वजनिक रूप से कोई आंकड़ा नहीं रखना चाहते। वजह यह है कि हर संगठन की अलग राय है और हम एक साझा मेमोरेंडम के साथ सरकार के पास जाना चाहते हैं। अगर अभी अलग-अलग आंकड़े बोल दिए जाएं तो कन्फ्यूजन बढ़ेगा। जब स्टाफ साइड की एकमत राय बन जाएगी, तब ही इसे आधिकारिक रूप से साझा किया जाएगा।
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सवाल: फैमिली यूनिट को तीन से बढ़ाकर पांच करने की मांग कितनी गंभीर है?
जवाब: यह इस बार का बड़ा मुद्दा है। आज के दौर में माता-पिता साथ रहते हैं, बच्चों की पढ़ाई और हेल्थ खर्च बढ़ चुके हैं। तीन यूनिट का फॉर्मूला पुराना हो चुका है। हमारा मानना है कि पांच यूनिट से कम परिवार मानना वास्तविकता से दूर है। इस बार हम ठोस आंकड़ों और तर्कों के साथ यह मांग रखने की तैयारी कर रहे हैं।
सवाल: डीए को बेसिक में मर्ज करने पर आपका रुख क्या है?
जवाब: पे कमीशन में डीए का मर्जर (8th Pay Commission DA Merger) होता ही है। सवाल यह है कि कब किया जाए। हमारी मांग है कि इसे प्राथमिकता दी जाए। अगर डीए को बेसिक में मर्ज किया जाता है तो कर्मचारियों को 100% लाभ मिलेगा। अभी 50% डीए पार होने पर कुछ अलाउंस बढ़े हैं, लेकिन बेसिक बढ़ने से पूरी संरचना मजबूत होगी।
सवाल: क्या आठवें वेतन आयोग की घोषणा चुनावी राजनीति से जुड़ी है?
जवाब: सरकारें अपने राजनीतिक गणित को देखती हैं, यह सच है। घोषणाओं का समय कई बार चुनाव से जुड़ जाता है। लेकिन अगर सिर्फ राजनीति के कारण देरी की जाती है तो हम चुप नहीं बैठेंगे। हमने तय किया है कि अपनी तरफ से कोई एक्सटेंशन नहीं मांगेंगे और समय पर जवाब देंगे, ताकि देरी का ठीकरा कर्मचारियों पर न फूटे।
सवाल: सरकार का कहना है कि देश में पेंशनर्स ज्यादा हैं, इससे उनके मन में जो असुरक्षा है, क्या वह सही है?
जवाब: पेंशन और सैलरी कोई रोक नहीं सकता। सरकार के पास अधिकार है, लेकिन पे कमीशन की सिफारिशें लागू करना उसकी जिम्मेदारी भी है। 1 जनवरी 2026 से लागू होना तय है। पेंशनर्स को घबराने की जरूरत नहीं है। अगर कोई नीतिगत बदलाव होगा तो हम मजबूती से अपनी बात रखेंगे।
सवाल: केरल की एश्योर्ड पेंशन स्कीम को आप कैसे देखते हैं?
जवाब: पेंशन का मुद्दा राजनीतिक बना दिया गया है। एश्योर्ड पेंशन स्कीम में 30 साल की न्यूनतम सेवा की शर्त व्यवहारिक नहीं है। अगर भर्ती 35 साल की उम्र में होगी तो 30 साल सेवा कैसे पूरी होगी? यह कर्मचारियों के साथ न्याय नहीं है।
हमारी मांग है कि रिटायरमेंट के समय मिलने वाले वेतन का कम से कम 50% पेंशन के रूप में मिले। सरकार ने यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के जरिए इसे स्वीकार किया है, लेकिन हमारी कोशिश है कि इसे पुरानी पेंशन योजना (OPS) जैसा और मजबूत बनाया जाए।
सवाल: लोगों का कहना है कि NC-JCM में युवाओं को शामिल क्यों नहीं किया?
जवाब: जेसीएम में प्रतिनिधि संगठन तय करते हैं, व्यक्ति नहीं। लेकिन एक बात साफ है- हर पे कमीशन का सबसे ज्यादा फायदा युवा कर्मचारियों को मिलता है। जो नए कर्मचारी हैं, उन्हें लंबे समय तक बढ़े वेतन का लाभ मिलता है। इसलिए जो भी लड़ाई लड़ी जा रही है, वह असल में युवा वर्ग के भविष्य के लिए ही है।
संदेश साफ है 1 जनवरी 2026 से आठवां वेतन आयोग लागू होना तय है। अब नजर सरकार की गति और फैसलों पर है।