मुथूट और मणप्पुरम की बादशाहत को चुनौती! 'गोल्ड' के मैदान में उतरा 169 साल पुराना आदित्य बिड़ला ग्रुप; टाटा-गोदरेज भी भिड़ेंगे
आदित्य बिड़ला कैपिटल ने गोल्ड लोन कारोबार में उतरने की घोषणा की है, जिसका लक्ष्य अगले तीन सालों में 1,000 ...और पढ़ें

आदित्य बिड़ला ग्रुप की गोल्ड लोन बिजनेस में एंट्री (AI फोटो)
HighLights
आदित्य बिड़ला कैपिटल ने गोल्ड लोन कारोबार में प्रवेश की घोषणा की
कंपनी अगले तीन सालों में 1,000 गोल्ड लोन शाखाएं खोलेगी
तेजी से बढ़ते भारतीय गोल्ड लोन बाजार में नई कंपनियों का प्रवेश
नई दिल्ली। 169 साल पहले शुरू किए गए आदित्य बिड़ला ग्रुप की आदित्य बिड़ला कैपिटल लिमिटेड ने गुरुवार को अपने सिक्योर्ड लेंडिंग पोर्टफोलियो के विस्तार के तौर पर गोल्ड लोन बिजनेस में उतरने का एलान किया। कंपनी की योजना इस नई कैटेगरी के तहत अगले तीन सालों में लगभग 1,000 ब्रांच का नेटवर्क बनाने की है।
आदित्य बिड़ला कैपिटल ने रेगुलेटरी फाइलिंग में कहा कि इसका टार्गेट मार्च 2027 तक देश के अधिक संभावना वाले मार्केट में लगभग 300 डेडिकेटेड गोल्ड लोन ब्रांच शुरू करने का है। अपनी नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) पोर्टफोलियो के तहत, गोल्ड लोन की सुविधा इसके मौजूदा रिटेल और MSME लेंडिंग बिजनेस को और बेहतर बनाएगी, जिससे ग्राहकों को पारदर्शी, फ्लेक्सिबल और कोलैटरल-बेस्ड क्रेडिट सॉल्यूशन मिल सकेगा।
गोल्ड लोन में जबरदस्त ग्रोथ
आदित्य बिड़ला कैपिटल में NBFC के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और CEO राकेश सिंह के अनुसार भारत में गोल्ड लोन में जबरदस्त स्ट्रक्चरल ग्रोथ देखी जा रही है और इस सेगमेंट में हमारा उतरना हमारी सिक्योर्ड लेंडिंग रणनीति का एक स्वाभाविक विस्तार है।
उन्होंने आगे कहा, "हम इन सिद्धांतों और गवर्नेंस, समझदारी भरे रिस्क मैनेजमेंट, ऑपरेशनल एक्सीलेंस और ग्राहक-बेस्ड आउटलुक पर मजबूत फोकस के साथ अपना गोल्ड लोन बिजनेस शुरू से बना रहे हैं।"
बड़े डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क से मिलेगा फायदा
आदित्य बिड़ला ग्रुप अपने बड़े डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और डिजिटल क्षमताओं का इस्तेमाल करेगा। आदित्य बिड़ला का गोल्ड लोन शहरी और सेमी-अर्बन मार्केट में अलग-अलग तरह के ग्राहकों की जरूरतें पूरी करेगा, जिसमें मौजूदा ग्राहकों को सेवा देना और फिजिकल ब्रांच तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म के इंटीग्रेटेड डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के जरिए नए ग्राहकों तक अपनी पहुंच बढ़ाना शामिल है।
आदित्य बिड़ला भी टाटा और गोदरेज की तरह गोल्ड लोन के मैदान में उतर गया है। पिछले कुछ महीनों में अलग-अलग तरह के लोन देने वाली कंपनियों ने भारत के गोल्ड लोन मार्केट में ज्यादा दिलचस्पी दिखाई है।
मुथूट फाइनेंस और मणप्पुरम फाइनेंस से मुकाबला!
पिछले महीने, टाटा कैपिटल और गोदरेज कैपिटल ने अलग-अलग गोल्ड लोन बिजनेस में हिस्सेदारी खरीदी, जिससे वे भारत के तेजी से बढ़ते गोल्ड लोन मार्केट में शामिल हो गए और मुथूट फाइनेंस और मणप्पुरम फाइनेंस जैसे पारंपरिक लेंडर्स के लिए कॉम्पिटिशन बढ़ गया, जो देश की बड़ी और पुरानी गोल्ड लोन कंपनियां हैं।
टाटा कैपिटल ने 360-365 करोड़ रुपये के कैश-ओनली ट्रांजैक्शन में योगक्षेमम लोन्स लिमिटेड (या योगलोन्स) की 88.6% हिस्सेदारी खरीदी। गोदरेज ग्रुप की फाइनेंशियल सर्विस कंपनी, गोदरेज कैपिटल ने अपनी सब्सिडियरी गोदरेज फाइनेंस के जरिए कनकदुर्गा फाइनेंस का गोल्ड लोन बिजनेस एक अज्ञात रकम में खरीदा। यह कंपनी का कंज्यूमर फाइनेंस सेगमेंट में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए पहला अधिग्रहण था।
इन बड़ी कंपनियों के अलावा, L&T फाइनेंस ने पिछले साल पॉल मर्चेंट्स फाइनेंस का गोल्ड लोन बिजनेस खरीदा।
गोल्ड लोन पर फोकस क्यों?
गोल्ड लोन सेक्टर में कैपिटल का फ्लो देखा जा रहा है क्योंकि इन्वेस्टर्स और लेंडर्स गोल्ड लोन को भारतीय रिटेल फाइनेंस मार्केट में सबसे आकर्षक सेगमेंट में से एक मानते हैं। भारतीय गोल्ड लोन सेगमेंट में पिछले कुछ महीनों में बहुत तेजी से ग्रोथ देखी गई है, जिसकी वजह कीमती कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी और लेंडर्स का इस प्रोडक्ट के सेफ नेचर के कारण भरोसा माना जाता है।
कुल रिटेल क्रेडिट सोर्सिंग में गोल्ड लोन का हिस्सा FY23 में 18% से बढ़कर FY26 में 41% हो गया। रिपोर्ट के अनुसार, जैसे-जैसे इस कैटेगरी में नई कंपनियाँ आ रही हैं, पब्लिक सेक्टर के बैंकों का मार्केट शेयर लगातार कम हो रहा है।
