एक ट्रक से शुरू किया बिजनेस, आज हैं 5000 से ज्यादा का मालिक; दिमाग लगाया ऐसा कि ₹3000 से बनाए ₹1500 करोड़
अजय सिंघल ने 1982 में एक छोटे दफ्तर और एक ट्रक से अपना सफर शुरू किया था। उन्होंने पहले रेडियो पुर्जे बनाने की फैक्ट्री खोली, जिसे बाद में बेचकर ट्रांस ...और पढ़ें

बेहद दिलचस्प है अजय सिंघल की सक्सेस स्टोरी

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली। आपने कई कारोबारियों की सफलता की कहानियाँ सुनी होंगी। इन कहानियों में से कुछ खास तौर से दिलचस्प और प्रेरणादायक होती हैं। ऐसी ही एक कहानी अजय सिंघल (Ajay Singhal Success Story) की है, जिन्होंने चार दशक से पहले साल 1982 में महज एक छोटे से दफ्तर, एक ट्रक और एक बड़े सपने के साथ अपने सफर की शुरुआत की थी। 44 साल बाद उनका सफर कहां पहुंचा आइए जानते हैं।
क्या था पहला कारोबार?
अजय ने रोहतक गवर्नमेंट कॉलेज से प्री-इंजीनियरिंग डिप्लोमा किया और फिर 18 साल की उम्र में, अपने चाचा के साथ मिलकर वजीराबाद (दिल्ली) में रेडियो के पुर्जे बनाने की फैक्ट्री शुरू की। उस फैक्ट्री को महज 3000 रुपये में शुरू किया गया था, जो कि 4 साल तक चली।
20 गुना प्रॉफिट में बेचा पहला कारोबार
अजय दिल्ली यूनिवर्सिटी में अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए थे। B.Com पूरी करने पर उन्होंने अपना कारोबार 60,000 रुपये में बेच दिया और ट्रांसपोर्ट के कारोबार में एंट्री की। उस समय 60000 रुपये एक बड़ी रकम थी।
इस चीज में लगाया दिमाग
अजय ने ट्रांसपोर्ट बिजनेस में उतरने के बाद कुछ खास चीजों में दिमाग लगाया। वे लॉजिस्टिक्स के बिजनेस में बुकिंग और बिलिंग से लेकर समय पर डिलीवरी तक में मेहनत करने लगे। इतना ही नहीं अजय ने बाार की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने ट्रकों को मॉडिफाई किया, जो एक मास्टरस्ट्रोक था।
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कम किराए से बढ़ाया बिजनेस
अजय ने एक और अक्लमंदी का काम किया कम किराया लेकर। जब दूसरे सर्विस प्रोवाइडर दिल्ली से मुंबई तक सामान पहुँचाने के लिए 3,000 रुपये लेते थे, तब अजय इसके लिए सिर्फ 1,200 रुपये लेते थे। किराये में यह कमी उनके बिजनेस को बढ़ाने में फायदेमंद साबित हुई।
आज कितने ट्रकों के मालिक?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अजय की कंपनी ओम लॉजिस्टिक्स का पहला बड़ा क्लाइंट मारुति सुजुकी थी। पर उनके पास बजाज और टाटा जैसे क्लाइंट भी हैं। अजय भारत में ऐसे पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने मॉडिफाइड ट्रकों का इस्तेमाल करके मारुति कारों की ढुलाई की। उन्होंने नई तकनीकों और इनोवेशन में भी निवेश किया, जिससे उनके व्यवसाय को आगे बढ़ने में मदद मिली।
आज उनकी कंपनी के पास 6000 से अधिक ट्रक हैं, जबकि इसका टर्नओवर 1500 करोड़ रुपये से अधिक है। अजय की कंपनी में इस समय 5000 से अधिक लोग काम करते हैं।