अनिल अंबानी की रिलायंस इन्फ्रा को बड़ा झटका, JP Associates की तरह दिवालिया हुई सहायक कंपनी; NCLT ने दी मंजूरी
एनसीएलटी ने अनिल अंबानी की रिलायंस इन्फ्रा की सहायक कंपनी केएम टोल रोड प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने को मंजूरी दी है। यह फैसल ...और पढ़ें

एनसीएलटी ने केएम टोल रोड के दिवालियापन को मंजूरी दी।
नई दिल्ली। एक समय भारत और एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति रहे अनिल अंबानी पर आए दिन एक नई मुसीबत आ जाती है। उनकी कई कंपनियों के खिलाफ फ्रॉड केस चल रहे हैं। कुछ कंपनियां दिवालिया होकर बिक चुकी हैं, तो कुछ कि बिकने की कगार पर हैं। अब एक ऐसी ही खबर आई है, जो अनिल अंबानी के लिए किसी झटके से कम नहीं। दरअसल, रिलायंस इन्फ्रा की सहायक कंपनी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने की NCLT ने मंजूरी दे दी है।
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की मुंबई पीठ ने रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (Reliance Infrastructure Limited) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी, KM Toll Road Private Limited के खिलाफ कॉर्पोरेट दिवालियापन समाधान प्रक्रिया (CIRP) शुरू करने की याचिका स्वीकार कर ली है।
यानी अब इस कंपनी का हाल JP Associates जैसा ही होगा। खरीदार अपना रेजोल्यूशन प्लान देंगे। जो प्लान लेंडर्स को पसंद आएगा, उसे कंपनी बेच दी जाएगी। जेपी एसोसिएट्स के केस में गौतम अदाणी को जीत मिली थी।
SBI की अपील पर अनिल अंबानी की कंपनी के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया शुरू
अनिल अंबानी की केएम टोल रोड प्राइवेट लिमिटेड (KM Toll Road Private Limited) के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने की मंजूरी NCLT ने SBI की अपील के बाद दी। रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर द्वारा स्टॉक एक्सचेंजों (BSE और NSE) को दी गई आधिकारिक सूचना के अनुसार, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने बकाया ऋण न चुकाने के कारण केएम टोल रोड के खिलाफ दिवालिया कानून (IBC) की धारा 7 के तहत याचिका दायर की थी।
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NCLT ने 22 जुलाई, 2026 को अपने आदेश में इस याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसकी जानकारी कंपनी को 5 अगस्त, 2026 को प्राप्त हुई। SBI ने कुल 233.44 करोड़ रुपये (ब्याज सहित) के दावे के लिए यह याचिका दायर की थी।
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रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की सहायक कंपनी का NHAI से विवाद
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने स्पष्ट किया है कि KM Toll Road में उसका लगभग 548 करोड़ रुपये का निवेश (Exposure) पहले ही कंपनी के बही-खातों (Books of Accounts) में 'प्रोविजन' (Provisioned) के रूप में दिखाया जा चुका है। इसका मतलब है कि इस प्रक्रिया से कंपनी की वित्तीय स्थिति पर कोई नया अप्रत्याशित बोझ नहीं पड़ेगा।
सुनवाई के दौरान, KM Toll Road ने तर्क दिया कि वह एक 'सॉल्वेंट' (सक्षम) कंपनी है और केवल अस्थायी वित्तीय संकट का सामना कर रही है। कंपनी ने बताया कि NHAI के साथ विवाद के कारण उसका प्रोजेक्ट प्रभावित हुआ और वह NHAI से लगभग 2096 करोड़ रुपये के आर्बिट्रेशन अवार्ड की प्रतीक्षा कर रही है। हालांकि, NCLT ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि चूंकि कर्ज और डिफॉल्ट (Default) साबित हो चुका है, इसलिए दिवालिया प्रक्रिया शुरू करना अनिवार्य है।
NCLT ने नियुक्त किया IRP
NCLT ने इस मामले में श्री आशीष अविनाश साओजी को अंतरिम समाधान पेशेवर (Interim Resolution Professional) नियुक्त किया है। अब कंपनी का प्रबंधन IRP के हाथों में होगा और एक निश्चित समय सीमा के भीतर कर्ज समाधान की योजना तैयार की जाएगी।