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भारत को 1 पैसा देने में आपत्ति, चीन को दे रहा 25 टका! अंधेरे में डूबा बांग्लादेश ड्रैगन को क्यों दे रहा 127% ज्यादा रेट?

Published: Wed, 02 Sep 2026 08:24 PM (IST)

बांग्लादेश गंभीर बिजली संकट से जूझ रहा है और भारत से सस्ती बिजली पर मामूली शुल्क बढ़ाने पर आपत्ति जता ...और पढ़ें

कचरे से बनी बिजली का 25 टका दे रहा बांग्लादेश

कचरे से बनी बिजली का 25 टका दे रहा बांग्लादेश

HighLights

  1. बांग्लादेश में गंभीर बिजली संकट, घंटों बिजली कटौती।

  2. भारत से 1 पैसे शुल्क पर आपत्ति, चीन को 25 टका।

  3. चीन से कचरे से बिजली, ढाका की समस्या हल।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| बांग्लादेश इन दिनों गंभीर बिजली संकट से जूझ रहा है। इन दिनों राजधानी ढाका और प्रमुक शहरों में घंटों तक बिजली की कटौती हो रही है। इसके साथ ही वहां के विदेशी मुद्रा को लेकर भी स्थिति डांवाडोल है। बांग्लादेश भारत से सस्ती कीमतों में बिजली की खरीद करता आया है, लेकिन भारत की ओर से मामूली टैक्स बढ़ाए जाने पर आपत्ति जता रहा है। इसके उलट उसका चाइना प्रेम भी कम नहीं हो रहा है और वो ड्रैगन को बिजली के लिए भारत के मुकाबले 127 फीसदी अधिक भुगतान कर रहा है।

भारत को सिर्फ 1 पैसे देने पर आपत्ति

तारीक रहमान सरकार का पक्षपाती रवैया साफ नजर आ रहा है। हाल ही में भारत के केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) ने क्रॉस-बॉर्डर बिजली लेनदेन के प्रबंधन, ग्रिड ऑपरेशन, शेड्यूलिंग और मीटरिंग खर्चों को कवर करने के लिए हर यूनिट पर ₹0.01 यानि सिर्फ 1 पैसे का सर्विस चार्ज मांगा था। इसके बाद बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड (BPDB) ने इस एक्स्ट्रा शुल्क पर कड़ी आपत्ति जताई। पड़ोसी देश की इस आपत्ति के बाद भारत ने इस चार्ज को आधा करके 1 पैसे की जगह आधा पैसा प्रति यूनिट कर दिया।

चीन पर मेहरबान हुआ बांग्लादेश

भारत को सिर्फ 1 पैसे प्रति यूनिट देने में ना नुकुर करने वाली तारिक रहमान सरकार एक चीनी कंपनी को 25 टका प्रति यूनिट देकर उससे बिजली खरीदने जा रही है। इस समय एक टका की कीमत 0.77 भारतीय रुपया है। अगर पूरे हिसाब को समझें तो बांग्लादेश भारत को बिजली के लिए प्रति यूनिट 11 टका चुका रहा था लेकिन चीन को एक यूनिट के लिए 25 टका रेट देगा, जो भारत के मुकाबले 127% अधिक है।

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कचरे से बिजली बनाएगा चीन

भारत के मुकाबले चीन को अधिक भुगतान के पीछे का ठोस कारण सिर्फ बिजली की समस्या से छुटकारा नहीं बल्कि कचरे की समस्या से भी निपटान करना है। जो चीनी कंपनी बिजली बनाएगी उसका प्रोजेक्ट सिर्फ 42 मेगावाट का है जो भारत को रिप्लेस नहीं कर सकती। लेकिन ये कंपनी कचरे से बिजली बनाएगी, जिससे ढाका शहर के कचरे की समस्या को भी दूर किया जा सकेगा।