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    जब दुनिया सहमी थी, तब इस शख्स ने लिया बड़ा रिस्क! 50 की उम्र में 2.5 लाख की नौकरी छोड़ ऐसे खड़ा किया करोड़ों का कारोबार

    Updated: Tue, 26 May 2026 12:16 PM (IST)

    महाराष्ट्र के भाऊसाहेब नवले ने 50 साल की उम्र में 2.5 लाख रुपये महीने की नौकरी छोड़कर कोविड-19 महामारी के दौरान नर्सरी का व्यवसाय शुरू किया। आज उनकी ' ...और पढ़ें

    नर्सरी का बिजनेस शुरू कर अमीर बना ये शख्स

    नर्सरी का बिजनेस शुरू कर अमीर बना ये शख्स

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    नई दिल्ली। ज्यादातर लोग अपनी पूरी जिंदगी इसलिए कड़ी मेहनत करते हैं ताकि बुढ़ापे में रिटायरमेंट के बाद सुकून की जिंदगी बिता सकें। लेकिन महाराष्ट्र के रहने वाले भाऊसाहेब नवले (Bhausaheb Navale Success Story) की कहानी बिल्कुल अलग है। उन्होंने 50 साल की उम्र में आराम की जिंदगी चुनने के बजाय 2.5 लाख रुपये महीने की शानदार नौकरी को ठोकर मार दी और अपनी खुद की कंपनी शुरू करने का साहसिक कदम उठाया।

    नर्सरी का बिजनेस शुरू करने की ठानी

    पुणे के रहने वाले भाऊसाहेब ने जब अपनी नौकरी छोड़ने का मन बनाया, तब दुनिया कोविड-19 महामारी के गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रही थी। लोगों की नौकरियां जा रही थीं और पैसों की किल्लत थी, लेकिन उन्होंने इसी मुश्किल दौर में अपना खुद का नर्सरी का बिजनेस शुरू करने की ठानी।
    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 30 लाख रुपये के सालाना पैकेज वाली आरामदायक नौकरी छोड़ना उस वक्त एक बहुत बड़ा जोखिम लग रहा था। हालांकि, उनका यह फैसला बिल्कुल सही साबित हुआ और आज उनका यह बिजनेस करोड़ों का टर्नओवर (मल्टी-करोड़ कंपनी) दे रहा है।

    विदेश में करते थे नौकरी

    अपना खुद का काम शुरू करने से पहले भाऊसाहेब विदेशों में नौकरी करते थे। उनके पास इथियोपिया में पॉलीहाउस के अंदर गुलाब की खेती करने का 10 साल का शानदार अनुभव था। उन्होंने 1995 से लेकर 2020 तक लगभग 25 वर्षों तक काम किया।
    इस दौरान उनका वेतन 2.5 लाख रुपये प्रतिमाह था और उन्हें हर तरह की सुख-सुविधाएं हासिल थीं। लेकिन, एग्रीकल्चर में बीएससी (B.Sc.) की डिग्री हासिल करने वाले भाऊसाहेब के मन में कुछ अपना करने की चाह थी, इसलिए उन्होंने विदेश की इस ऐशो-आराम वाली जिंदगी को छोड़कर अपने वतन लौटने का फैसला किया।

    भारत वापस शुरू किया बिजनेस

    भारत वापस आने के बाद, उन्होंने महाराष्ट्र में पुणे जिले के मावल तालुका में 'ग्रीन एंड ब्लूम्स नर्सरी' (Green and Blooms Nursery) की नींव रखी। महामारी के उस निराशाजनक दौर में जब लोग रोजगार के लिए दर-दर भटक रहे थे, तब भाऊसाहेब ने इंडोर पॉट प्लांट (गमलों वाले पौधे) की नर्सरी खोलकर नए अवसरों के दरवाजे खोले।

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    कितनी है कमाई?

    शुरुआत में महज 27 यूनिट्स से काम शुरू करने वाले भाऊसाहेब का यह बिजनेस आज एक एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैल चुका है। आज उनकी इस नर्सरी में 100 से भी ज्यादा अलग-अलग प्रजातियों के पौधे उगाए जाते हैं। भाऊसाहेब की मेहनत रंग लाई है और अब उनके पौधे पूरे देश में सप्लाई किए जाते हैं। वर्तमान में पूरे भारत की लगभग 300 छोटी-बड़ी नर्सरियां उनके पौधों की खरीदार हैं। उनके कारोबार का सालाना टर्नओवर 2 करोड़ रुपये से अधिक आंका जाता है।

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