जेब में थे ₹600 करोड़, कहलाता था देश का 'प्लास्टिक किंग'; फिर अचानक सबकुछ छोड़ बन गया संन्यासी
यह लेख उन धनी व्यक्तियों पर प्रकाश डालता है जिन्होंने अरबों की संपत्ति त्यागकर आध्यात्मिकता का मार्ग चुना। दिल्ली के प्लास्टिक कारोबारी भंवरलाल दोशी 6 ...और पढ़ें

कई अरबपतियों ने दौलत छोड़ अपनाया अध्यात्म का रास्ता

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नई दिल्ली। जब कोई पैसा कमाने लगता है तो उसे लगता है कि ज्यादा से ज्यादा कमा लिया जाए। लगभग हर व्यक्ति चाहता है कि उसकी संपत्ति बढ़ती जाए। इसीलिए दुनिया के बड़े-बड़े अरबपति कारोबारी अपना कारोबार रोकते नहीं, बल्कि उसे और बढ़ाते हैं। पर कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जिन्हें कारोबार और दौलत बढ़ाने से संतुष्टि और आंतरिक खुशी नहीं मिलती। इसलिए वे अपनी संपत्ति को छोड़, अध्यात्म का रास्ता चुनते हैं। दुनिया में ऐसे कई उदाहरण हैं। वहीं भारत में भी कुछ लोगों ने ऐसा किया है। यहां हम आपको ऐसे ही दो व्यक्तियों के बारे में बताएंगे, जिन्होंने अपनी अरबों की संपत्ति छोड़ संत बनकर सादगी और अध्यात्म का रास्ता चुना।
भंवरलाल दोशी (भव्य रत्न महाराज)
दिल्ली के प्लास्टिक कारोबारी भंवरलाल दोशी को आज भव्य रत्न महाराज के नाम से जाना जाता है। अब से 11 साल पहले सन 2015 में उन्होंने 600 करोड़ रुपये की संपत्ति को छोड़कर संत बनने का फैसला किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्हें 'प्लास्टिक और केमिकल्स किंग' कहा जाता था।
लेकिन 1982 से आध्यात्मिकता ने उन्हें अपनी ओर आकर्षित करना शुरू कर दिया और वे जैन शास्त्रों का अध्ययन करने लगे।
दीक्षा समारोह में गौतम अदाणी शामिल
भंवरलाल दोशी के दीक्षा समारोह में अरबपति कारोबारी गौतम अदाणी भी शामिल हुए थे। 2015 से पहले ही दोषी लंबे समय से एक जैन भिक्षु के रूप में जीवन बिताने के बारे में सोच रहे थे, लेकिन उनका परिवार ऐसा नहीं चाहता था। मगर आखिरकार उन्होंने परिवार को मना लिया था।
बता दें कि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उनके दीक्षा समारोह में कई करोड़ रुपये खर्च हुए थे।
'बिजनेमैन बाबा' ने छोड़ा अरबों का साम्राज्य
भंवरलाल की ही तरह पिछले साल आयोजित हुए महाकुंभ में एक अरबपति कारोबारी ने अपनी दौलत छोड़कर संत बनने का फैसला किया। लोगों ने उन्हें बिजनेसमैन बाबा कहना शुरू कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वे एक समय 3000 करोड़ रुपये के बिजनेस एम्पायर के मालिक थे। मगर उन्होंने इसे त्याग दिया। हालांकि उनके नाम और कारोबार का खुलासा नहीं हुआ था।
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ऐसे दुनिया में कई और भी लोग हैं, जिन्होंने ऐसा किया। इनमें मलेशियाई अरबपति आनंदा कृष्णन के बेटे सिरिपान्यो, इटली के कार्लो अकुतिस और गुजरात के एक दंपति शामिल हैं, जो एक समृद्ध रियल एस्टेट कारोबार करते थे, मगर उन्होंने अपनी करीब 200 करोड़ रुपये की संपत्ति छोड़कर संन्यास ग्रहण कर लिया।