BRICS Summit: ब्रिक्स देशों में इन दो मुस्लिम राष्ट्रों की करेंसी का बोलबाला, रूस-चीन और भारत कहीं नहीं टिकते!
BRICS Summit 2026: भारत 2026 में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, जहाँ ब्रिक्स देशों की अर्थव्यवस्था ...और पढ़ें

भारत 2026 में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है।
HighLights
भारत 2026 में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है।
ब्रिक्स में यूएई और सऊदी अरब की मुद्राएं सबसे मजबूत हैं।
यूएई दिरहम ₹25.90 और सऊदी रियाल ₹25.44 के बराबर।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। BRICS Summit 2026: भारत 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। 12 और 13 सितंबर को दिल्ली के भारत मंडपम में ब्रिक्स देशों का जमावड़ा लगेगा। इस बार इसकी थीम बिल्डिंग फॉर रेजिलेंस, इनोवेशन, कॉर्पोरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी है। इस समय ब्रिक्स के 11 फुल टाइम मेंबर्स हैं और 10 पार्ट टाइम मेंबर्स हैं। फुल टाइम मेंबर्स में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल है।
ये देश विकास की नई परिभाषा लिख रहे हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था को नया आयाम दे रहे हैं। इस विकास में व्यापार की अहम भूमिका है। और वैश्विक व्यापार में डॉलर का बोलबाला है। डॉलर के दबदबे को BRICS देश चुनौती दे रहे हैं। ऐसे में आज जानेंगे कि आखिर किस ब्रिक्स देश की करेंसी सबसे मजबूत है और भारतीय रुपयों में उसकी क्या वैल्यू है?
दुनिया की GDP का 40% ब्रिक्स देशों के पास
सदी की शुरुआत में ब्रिक्स चार देशों (ब्राजील, रूस, इंडिया और चीन) का एक समूह था जो ग्लोबल इकॉनमी का पांचवां हिस्सा था, लेकिन अब यह 11 सदस्यों वाला ब्लॉक बन गया है। यह ब्लॉक अब ग्लोबल GDP का लगभग 40 प्रतिशत और दुनिया की आबादी का 49.5 प्रतिशत हिस्सा है, जिससे व्यापार, ऊर्जा, फाइनेंस और व्यापक आर्थिक व्यवस्था में इसकी भूमिका बढ़ रही है।
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अर्थव्यवस्था के लिहाज से इनमें सबसे ताकतवर चीन है और दूसरे नंबर पर भारत है। अब आपको लग रहा होगा कि ब्रिक्स देशों में चीन की अर्थव्यवस्था सबसे ज्यादा है तो डॉलर के लिहाज से उसकी करेंसी मजबूत होगी। लेकन ऐसा नहीं है।
इन दो मुस्लिम देशों की करेंसी का बोलबाला
ब्रिक्स देशों में सबसे मजबूत करेंसी UAE और सऊदी अरब की है। इनकी करेंसी को अगर भारत में कन्वर्ट करें तो यह अन्य ब्रिक्स देशों से ज्यादा होगी। संयुक्त अरब अमीरात का एक दिरहम भारतीय रुपयों में 25.90 रुपये होगा। वहीं, सऊदी का एक रियाल भारतीय रुपये में 25.44 रुपये होगा। अगर चीन की बात करें तो चीन का एक युआन भारतीय रुपये में 14.22 रुपये होगा।
| क्रमांक | ब्रिक्स देश | करेंसी | 1 डॉलर कितने का | भारतीय रुपये में |
| 1 | UAE | यूएई दिरहम | 3.67 दिरहम | 25.90 रुपये |
| 2 | सऊदी अरब | रियाल | 3.75 रियाल | 25.45 रुपये |
| 3 | ब्राजील | ब्राजीलियाई रियल | 5.11 ब्राजीलियाई रियल | 18.68 रुपय |
| 4 | चीन | युआन | 6.71 युआन | 14.22 रुपये |
| 5 | साउथ अफ्रीका | दक्षिण अफ्रीकी रैंड | 16.11 दक्षिण अफ्रीकी रैंड | 5.93 रुपये |
| 6 | रूस | रूबल | 84.25 रूबल | 1.13 रुपये |
| 7 | भारत | भारतीय रुपया | 95.45 रुपये | |
| 8 | मिस्र | मिस्र पाउंड | 51.36 मिस्र पाउंड | 1.86 रुपये |
| 9 | इथियोपिया | इथियोपियाई बिर | 163.35 इथियोपियाई बिर | 0.58 रुपये |
| 10 | ईरान | ईरानी रियाल | 13,74,575.00 ईरानी रियाल | 0.000069 रुपये |
| 11 | इंडोनेशिया | इंडोनेशियाई रुपिया | 17,551.00 इंडोनेशियाई रुपिया | 0.0054 रुपये |
इसका आर्थिक महत्व सिर्फ GDP के आंकड़ों तक ही सीमित नहीं है। ब्रिक्स में दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और सबसे ज्यादा आबादी वाले देशों चीन और भारत के अलावा रूस, सऊदी अरब, ईरान और UAE जैसे बड़े ऊर्जा निर्यातक देश; और ब्राजील व रूस जैसे बड़े कमोडिटी और कृषि उत्पादक देश शामिल हैं।
ऐसे हुआ था 'BRIC' शब्द का जन्म
'BRIC' शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले 2001 में गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ'नील ने ब्राजील, रूस, भारत और चीन के लिए किया था। बाद में BRIC एक अंतर-सरकारी समूह बन गया। इन चारों देशों ने 2006 में औपचारिक राजनीतिक सहयोग शुरू किया और 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में अपने नेताओं का पहला शिखर सम्मेलन आयोजित किया। 2011 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने से BRIC, BRICS बन गया।
