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भारत की पहली Export Company, जिसने सात समंदर पार पहुंचाया मसालों और कपड़ों का खजाना; समंदर पर राज, दुनिया में डंका!

Updated: Mon, 31 Aug 2026 01:21 PM (IST)

भारत का निर्यात सदियों पुराना है, लेकिन संगठित व्यापार की शुरुआत ईस्ट इंडिया कंपनी ने की। इस कंपनी ने 17वीं ...और पढ़ें

भारत के निर्यात का इतिहास? (AI फोटो)

भारत के निर्यात का इतिहास? (AI फोटो)

HighLights

  1. भारत का निर्यात इतिहास सदियों पुराना है

  2. ईस्ट इंडिया कंपनी ने संगठित निर्यात शुरू किया

  3. कंपनी ने भारतीय मसालों, कपड़ों का व्यापार किया

नई दिल्ली। आज भारत बहुत सारे उत्पादों का निर्यात करता है। इनमें फल, सब्जी, अनाज, मोबाइल फोन, दवाइयाँ, हीरे, इंजीनियरिंग सामान और कपड़े शामिल हैं। भारत में बनने वाले ये सामान दुनिया भर में जाते हैं। भारत के एक्सपोर्ट की कहानी नई नहीं है। सदियों पहले भारत से मसाले, रेशम, कपास और नील समुद्री रास्तों से दुनिया के कोने-कोने तक जाते थे।
इसी व्यापार के चलते विदेशी व्यापारी भारत आते। मगर ये सारा निर्यात असंगठित तौर पर होता था। संगठित तौर पर एक कंपनी के रूप में किसने भारत से एक्सपोर्ट शुरू किया? आइए आपको बताते हैं।

ईस्ट इंडिया कंपनी का नाम है आता

वो पहली कंपनी, जिसने संगठित तौर पर भारत से निर्यात शुरू किया, ईस्ट इंडिया कंपनी का बताया जाता है। इस कंपनी ने भारत के सामान को दुनिया के बाजारों तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई। मगर यही आगे चलकर भारत पर नियंत्रण की सबसे बड़ी ताकत भी बनी।

कहां हुई थी शुरुआत?

ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 31 दिसंबर 1600 को इंग्लैंड में की गई थी। इस कंपनी का मुख्य मकसद एशियाई देशों, खासकर भारत और मसाले वाले देशों के साथ व्यापार करना था। उस दौर में यूरोप में भारतीय मसालों और कपड़ों की भारी मांग थी।
ईस्ट इंडिया कंपनी के पास अपने पानी के जहाज थे, निवेशक थे और समुद्री कारोबार का नेटवर्क था।

भारत में कैसे जमाए कदम?

सूरत उस समय दुनिया के अहम व्यापारिक बंदरगाहों में शामिल था। ईस्ट इंडिया कंपनी के जहाज 17वीं सदी की शुरुआत में भारत पहुंचे और धीरे-धीरे कंपनी ने यहां अपनी व्यापारिक जड़ें मजबूत करनी शुरू कर दीं। इसके बाद मसुलीपट्टनम, मद्रास, बंगाल और अन्य क्षेत्रों में व्यापारिक केंद्र बनाए गए।
ये केंद्रों उस दौर में 'फैक्ट्री' कहलाते थे, लेकिन ये आधुनिक उत्पादन कारखाने नहीं बल्कि व्यापारिक कार्यालय और गोदाम होते थे। यहीं से भारतीय सामान की खरीद, भंडारण और निर्यात की व्यवस्था होती।

कहां से क्या जाता था?

भारतीय सूती कपड़ा यूरोप में बेहद लोकप्रिय था। इसके अलावा वहां भारत के मसाले भी काफी पसंद किए जाते थे। भारत से दुनिया भर में बंगाल का महीन कपड़ा, गुजरात के वस्त्र और दक्षिण भारत के मसाले जाते थे। इसके अलावा अलग-अलग इलाकों का रेशम भी विदेशी बाजारों में पहुंचने लगा।

नील की मांग भी थी जोरदार

नील की भी मांग खूब थी, जिसका इस्तेमाल रंगाई में होता था। ईस्ट इंडिया कंपनी ने इन वस्तुओं के व्यापार को बड़े पैमाने पर संगठित करके इन तमाम चीजों का निर्यात शुरू किया। तब तक भारत केवल सामान खरीदने वाला बाजार नहीं रह गया था, बल्कि दुनिया के लिए उत्पादन करने वाली एक बड़ी आर्थिक ताकत बन चुका था।

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