महाराष्ट्र का अनोखा बैंक! ग्रामीण महिलाओं को लोन में देता है बकरी और बदले में लेता है मेमना; किसका है आइडिया?
महाराष्ट्र के जलगाँव जिले में 'बकरी बैंक' (Goat Bank) ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बना रहा है। सेवा सहयोग फाउंडेशन द्वारा संचालित यह बैंक पैसे के बजाय गर् ...और पढ़ें

महाराष्ट्र में चलता है बकरी बैंक, लोन में मिलती है बकरी
HighLights
बकरी बैंक लोन में देता है बकरियां
लोन का भुगतान बकरी के बच्चे से किया जाता है
ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार का मौका
नई दिल्ली। फाइनेंशियल बैंक तो बहुत हैं। मगर क्या आपने कभी 'बकरी बैंक' के बारे में सुना है? अगर नहीं तो आज हम आपको एक ऐसे बैंक के बारे में जानकारी देंगे, जहां से लोन के रूप में बकरी मिलती है। ये बैंक महाराष्ट्र में चलता है। खास बात ये है कि इस बैंक में पैसा नहीं चलता।
लोन में मिलती है बकरी
जिस बैंक की हम बात कर रहे हैं, वो महाराष्ट्र के जलगाँव जिले की चालीसगाँव तहसील में मौजूद है। ये अनोखा बैंकिंग मॉडल सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं की मदद कर रहा है और वो भी बिना पैसे के। "Goat Bank" के नाम से मशहूर इस बैंक से लोन के तौर पर बकरियाँ मिलती हैं, जिसका भुगतान कैश में नहीं, बल्कि बकरियों के बच्चों के रूप में किया जाता है।
कौन चलाता है ये बकरी बैंक?
यह बकरी बैंक पुणे का सेवा सहयोग फाउंडेशन चलाता है और इसका मकसद गरीब, विधवा, अकेली और जमीनहीन महिलाओं की मदद करना है, जिन्हें आसानी से लोन नहीं मिलता। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस मॉडल के जरिए 300 से ज्यादा महिलाएं आत्मनिर्भर बनी हैं।
ट्रेनिंग भी दी जाती है
बकरी बैंक के सिस्टम के तहत, महिलाओं को पशुपालन और बकरी पालन की ट्रेनिंग मिलती है। ट्रेनिंग के बाद, हर ट्रेनी को एक प्रेग्नेंट बकरी दी जाती है। तब एकमात्र शर्त यह होती कि छह से नौ महीने बाद, जब बकरी बच्चे को जन्म देती है और बच्चा बड़ा हो जाता है, तो लोन लेने वाली महिला को एक बच्चा बैंक में डिपॉजिट के तौर पर वापस करना होगा।
खबरें और भी
सेवा सहयोग फाउंडेशन के मुताबिक, एक स्वस्थ बकरी आमतौर पर एक साल में तीन से चार बच्चों को जन्म देती है। एक बच्चा बैंक को लौटाने के बाद, महिलाएं बाकी बकरियों को बेच सकती हैं या पालना चाहें तो पाल भी सकती हैं। इस प्रोसेस में कई महिलाएं सालाना ₹30,000 तक कमाती हैं, जो बहुत रोजगार के अवसरों वाले ग्रामीण इलाकों में इनकम का एक अच्छा जरिया है।
कंपनी भी कर दी शुरू
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस प्रोजेक्ट से जुड़ी महिलाओं ने बिक्री (बकरियों की) को मिलकर मैनेज करने और मार्केट तक एक्सेस को मजबूत करने के लिए एक प्रोड्यूसर कलेक्टिव, गिरना परिसर महिला पशुपालक उत्पादक कंपनी भी बनाई है।
इस बैंक के आयोजक अब इस मॉडल को ग्रामीण रोजगार और महिला सशक्तिकरण के लिए दूसरी जगहों पर भी अपनाने पर ध्यान दे रहे हैं।