Gold Silver Investment: निवेशकों तक ऐसे पहुंचेगी सोने-चांदी की चमक, एक्सपर्ट ने खुद बताया
दीवाली के बाद सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता के बीच, यह लेख निवेशकों को बाजार की मौजूदा स्थिति, ...और पढ़ें

वैश्विक और घरेलू कारक सोने-चांदी की कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं।
HighLights
वैश्विक और घरेलू कारक सोने-चांदी की कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं।
बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद धीरे-धीरे रिकवरी की उम्मीद है।
व्यवस्थित निवेश और पोर्टफोलियो विविधीकरण से जोखिम कम करें।
नई दिल्ली। Gold Silver Update: धनतेरस और दीवाली पर सोना-चांदी खरीदना भारतीय परंपरा और संस्कृति का एक बेहद अटूट हिस्सा माना जाता है, लेकिन इस साल की दीवाली के बाद इन धातुओं की कीमतों में लगातार देखी जा रही भारी हलचल और उतार-चढ़ाव ने आम निवेशकों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बाजार की मौजूदा स्थिति, दीवाली के बाद का रुझान, आर्थिक संकेतकों का असर और फोमो के कारण जल्दबाजी में फैसले लेने से बचने के लिए मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के कमोडिटी रिसर्च प्रमुखनवनीत दमानी बता रहे हैं कुछ रणनीतिक उपाय।
ये कारक हैं जिम्मेदार
हाल के दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में देखी जा रही भारी अनिश्चितता कई वैश्विक और घरेलू कारकों के आपस में जुड़े होने का परिणाम है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर बदलती उम्मीदों और डॉलर इंडेक्स की मजबूत चाल ने कीमती धातुओं के बाजार को प्रभावित किया है। इसके अलावा, कच्चे तेल के बढ़ते दामों ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति की चिंताओं को हवा दी है, जिससे केंद्रीय बैंकों द्वारा कड़ी मौद्रिक नीति अपनाने की संभावना बढ़ गई है और अमेरिकी बांड यील्ड ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं।
हाल ही में टेक स्टॉक्स में हुई गिरावट के कारण सभी एसेट क्लासेस में लिक्विडिटी की जरूरत के तहत बिकवाली का दबाव देखा गया, जबकि चांदी पर औद्योगिक मांग में कमी और सोलर एप्लीकेशन में इसके विकल्पों के इस्तेमाल की चिंताओं के कारण अतिरिक्त दबाव बना हुआ है। खुदरा निवेशकों को यह समझना होगा कि ये सभी मैक्रो-इकोनॉमिक कारक आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं और हर छोटी गिरावट को कीमती धातुओं के दीर्घकालिक फंडामेंटल्स में बदलाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
किस करवट बैठेगा बाजार का ऊंट
दीवाली के बाद के समय में सोना-चांदी का बाजार उतार-चढ़ाव से भरा रहने की उम्मीद है, लेकिन लिक्विडिटी का तात्कालिक दबाव कम होते ही धीरे-धीरे रिकवरी संभव है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने का तात्कालिक समर्थन स्तर लगभग 3,800 से 3,900 डॉलर के आसपास है। यदि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी आती है और डॉलर कमजोर पड़ता है, तो सोने में 4,100 से 4,200 डॉलर और मध्यम अवधि में 4,500 से 4,700 डॉलर तक की रिकवरी संभव है।
हालांकि, लगातार बनी रहने वाली महंगाई, कच्चे तेल के ऊंचे दाम और फेड की सख्त नीतियों की आशंका कीमत में एक और करेक्शन का कारण बन सकती है। इसके विपरीत, जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता, केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की खरीदारी, ईटीएफ इनफ्लो और भारत में शादी-ब्याह व त्योहारी सीजन की मांग इस बाजार को समर्थन देने वाले मुख्य आधार बने रहेंगे।
पीछा करने की दौड़ से बचें
जब बाजार तेजी से बढ़ रहा हो, तो उस समय सिर्फ इस डर से खरीदारी करना कि अवसर छूट न जाए, बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। ऐतिहासिक उच्चतम स्तरों पर एकमुश्त पैसा लगाना निवेशकों को तुरंत मार्क-टू-मार्केट नुकसान के प्रति संवेदनशील बना देता है, और चांदी में अपने छोटे बाजार आकार तथा औद्योगिक मांग से जुड़े होने के कारण सोने की तुलना में अधिक तीव्र करेक्शन आ सकते हैं।
निवेशकों को कभी भी अपनी पूरी पूंजी एक बार में नहीं लगानी चाहिए और न ही निवेश के लिए कर्ज लेना चाहिए। एक व्यवस्थित और अनुशासित दृष्टिकोण अपनाते हुए किश्तों में या नियमित अंतराल पर (एसआईपी के माध्यम से) खरीदारी करने से खरीद लागत का औसत बेहतर होता है और निवेशक अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से बचते हुए लंबी अवधि के अवसरों का लाभ उठा पाते हैं।
इन संकेतों पर रखें नजर
यदि आप मौजूदा माहौल में कीमती धातुओं में निवेश करने की योजना बना रहे हैं, तो वैश्विक और घरेलू स्तर पर अमेरिकी मुद्रास्फीति डेटा, फेडरल रिजर्व के बयान, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और डॉलर इंडेक्स की चाल पर करीबी नजर रखें। दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की खरीदारी के आंकड़े और वैश्विक गोल्ड ईटीएफ फ्लो भी संरचनात्मक निवेश मांग का आकलन करने के लिए उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
इसके अलावा, मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों पर उनका असर सुरक्षित निवेश की मांग और महंगाई की उम्मीदों को तय करता है। भारतीय निवेशकों के लिए रुपया-डॉलर विनिमय दर, घरेलू प्रीमियम, आयात शुल्क और विवाह सीजन के दौरान भौतिक सोने की मांग भी बेहद मायने रखती है, क्योंकि घरेलू कीमतें अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क और मुद्रा दोनों की चाल से प्रभावित होती हैं।
पोर्टफोलियो करें व्यवस्थित
बाजार की अनिश्चितता से सुरक्षा पाने और अपने पोर्टफोलियो को संतुलित रखने के लिए रणनीतिक विविधीकरण आवश्यक है। निवेशकों को गोल्ड फंड्स या डिजिटल गोल्ड में सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान का रास्ता चुनना चाहिए, साथ ही दीर्घकालिक सुरक्षा और कर लाभ के लिए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड या गोल्ड ईटीएफ जैसे विकल्पों का उपयोग करना चाहिए। कीमती धातुओं में दीर्घकालिक बुल मार्केट के भीतर भी अल्पकालिक और तीखे करेक्शन आ सकते हैं, इसलिए धैर्य और समझदारी ही इस बाजार में बेहतर रिटर्न की असली कुंजी है।
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