बैंक डकैती में चोरी हो गया गिरवी रखा सोना, तो कौन करेगा भरपाई? जानिए कंज्यूमर फोरम का यह नियम
Gold bank locker Rules: सोना चोरी होने पर बैंक को मेकिंग चार्ज के साथ बकाया पैसा लौटाना होता है या बैंक कोई भुगतना नहीं करता? आईए जानते हैं।...
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बैंक से चोरी हो गया सोना तो क्या होगा?
HighLights
बैंक डकैती में चोरी सोने पर मिलेगा पूरा मुआवजा।
मेकिंग चार्ज और स्टोन वैल्यू भी शामिल होगी।
कर्नाटक उपभोक्ता आयोग ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: अगर आपने बैंक से गोल्ड लोन (Gold Loan) लिया है और आपका सोना बैंक (gold In bank) के पास गिरवी रखा है, तो क्या होगा अगर बैंक में डकैती पड़ जाए? क्या बैंक आपको सिर्फ सोने के वजन के हिसाब से पैसे देगा, या फिर गहने बनवाने में लगे 'मेंकिंग चार्ज' (making charges) और उसमें जड़े पत्थरों की कीमत भी लौटाएगा?
कर्नाटक राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Karnataka state disputes redressal commission) ने हाल ही में एक ऐसा ही ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जो हर बैंक ग्राहक के लिए जानना बेहद जरूरी है। आइए विस्तार से जानते हैं कि पूरा मामला क्या था और कानून आपके अधिकारों को कैसे सुरक्षित करता है।
क्या था पूरा मामला?
कर्नाटक के तुमकुर के रहने वाले एक व्यक्ति ने अगस्त 2017 में कैनरा बैंक (canara bank) की एक ब्रांच में अपने सोने के रहने गिरवी रखकर दो गोल्ड लोन लिए थे। कुछ समय बाद बैंक में डकैती हो गई और ग्राहकों का गिरवी रखा सोना चोरी हो गया। चोरी का पता चलने पर बैंक ने ग्राहक को केवल सोने के शुद्ध वजन (gold net weight) के आधार पर भुगतान करने की पेशकश की। बैंक ने पहले लोन के लिए ₹1,56,033 और दूसरे के लिए ₹2,12,500 का भुगतान किया।
कैसे शुरू हुई पहल?
ग्राहक ने बैंक के इस भुगतान को अधूरा माना। उसने तर्क दिया कि बैंक को केवल सोने की कीमत नहीं, बल्कि गहनों के 20% मेकिंग चार्ज और 3% स्टोन वैल्यू का भी भुगतान करना चाहिए। ग्राहक ने बैंक से ₹88,362 की अतिरिक्त मांग की।
दूसरी ओर, बैंक ने यह कहते हुए अतिरिक्त पैसा देने से इनकार कर दिया कि ग्राहक के पास मेकिंग चार्ज साबित करने के लिए कोई पक्की रसीद (Invoice) या दस्तावेज नहीं है। इसके बाद यह मामला उपभोक्ता फोरम (Consumer Commission) पहुंच गया।
कंज्यूमर फोरम ने सुना दिया बड़ा फैसला
मामले की सुनवाई करते हुए आयोग ने स्पष्ट तौर पर ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाया। फोरम ने अपने आदेश में कई अहम बातें कही हैं। आयोग ने कहा "यदि बैंक की कस्टडी (हिरासत) में रखे गहने डकैती या चोरी के कारण खो जाते हैं, तो बैंक का यह कर्तव्य है कि वह मौजूदा बाजार दर पर सोने के गहनों की कीमत चुकाए। इसमें गहनों का मेकिंग चार्ज और स्टोन वैल्यू भी शामिल होना चाहिए।" फोरम ने बैंक की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें रसीद मांगी गई थी। फोरम ने कहा कि यह एक निर्विवाद सत्य है कि हर सोने के आभूषण पर मेकिंग चार्ज लगता है, इसलिए इसके लिए अलग से किसी बिल की आवश्यकता नहीं है।
बैंक को मिली सजा?
आयोग ने इस बैंक को आदेश दिया है कि वे ग्राहक को भुगतान करें।
1. बकाया राशि: ₹88,362
2. मानसिक परेशानी का मुआवजा: ₹30,000
3. कानूनी खर्च: ₹10,000
बता दें कि नियमों के अनुसार अगर बैंक की लापरवाही के कारण लाकर या उसमें रखे सामान को नुकसान होता है तो बैंक को ग्राहक को मुआवजा देना ही होगा।
