GST 2.0 ने अर्थव्यवस्था को दिया बूस्ट, अब Petrol-Diesel को जीएसटी के दायरे में लाने की सुगबुगाहट तेज
पिछले साल जीएसटी दरों में कटौती के बावजूद संग्रह में 16% की वृद्धि हुई, जिससे केंद्र और राज्यों के राजस्व, ...और पढ़ें

पेट्रोल-डीजल को जीएसटी 3.0 में शामिल करने की चर्चा तेज।
HighLights
जीएसटी दरों में कटौती के बाद भी संग्रह में 16% वृद्धि।
ऑटोमोबाइल उद्योग को मिला जबरदस्त फायदा, बिक्री में उछाल।
पेट्रोल-डीजल को जीएसटी 3.0 में शामिल करने की चर्चा तेज।
राजीव कुमार, नई दिल्ली। पिछले साल 22 सितंबर को जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक के फैसले को लागू किया गया तो जीएसटी संग्रह में गिरावट की आशंका जताई गई थी। दरों के 12 और 28 प्रतिशत के स्लैब को समाप्त कर दिया गया था। 12 प्रतिशत दर से जुड़े कमोबेश सभी आइटम को पांच तो 28 प्रतिशत वालों को 18 में शामिल कर दिया गया था। परिणाम आशंका के विपरीत हुआ। वस्तुओं के दाम कम होने से खपत बढ़ गई। इससे जीएसटी कलेक्शन भी बढ़ गया। केंद्र व राज्य के राजस्व में इजाफे के साथ मैन्यूफैक्चरिंग को बूस्ट मिला और रोजगार को समर्थन मिला।
आंकड़े भी यही कह रहे हैं। चालू वित्त वर्ष 2026-27 के पहले पांच महीनों में GST कलेक्शन में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी रही। क्रिसिल का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में जीएसटी कलेक्शन में पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 12-13 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। जीएसटी कलेक्शन बढ़ने से केंद्र के साथ राज्यों के राजस्व में भी इजाफा दिख रहा है। क्रिसिल का मानना है कि मजबूत जीएसटी कलेक्शन की वजह से देश के 18 प्रमुख राज्यों का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में 9-11 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
ऑटोमोबाइल्स उद्योग पर सबसे ज्यादा दिखा जीएसटी कटौती का असर
जीएसटी कटौती का सबसे अधिक असर ऑटोमोबाइल्स उद्योग पर देखा गया। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी को चालू वित्त वर्ष में अपने पैसेंजर कार की बिक्री में 36 प्रतिशत की बढ़ोतरी की उम्मीद है। ऑटोमोबाइल कंपनियों के आंकड़ों के मुताबिक पिछले 11 महीनों में देश में तीन करोड़ वाहन पंजीकृत किए गए हैं जो पूर्व की समान अवधि के मुकाबले 20 प्रतिशत अधिक है। जीएसटी कटौती की वजह से कंज्यूमर गुड्स की बिक्री में इस साल जनवरी-मार्च तिमाही में दहाई अंक में बढ़ोतरी दिखी, लेकिन बाद में कच्चे माल की कीमतों में तेजी से कंज्यूमर गुड्स के दाम बढ़ने लगे जिससे इनकी बिक्री पर भी असर देखा गया।
डेलोलायट के पार्टनर एवं अप्रत्यक्ष कर विशेषज्ञ एम.एस. मनी कहते हैं, लोगों की आशंका के विपरीत जीएसटी दरों में कटौती के बाद भी कलेक्शन बढ़ गया क्योंकि चीजें सस्ती होने से खपत में बढ़ोतरी हुई। इससे अर्थव्यवस्था को रफ्तार पकड़ने में मदद मिली।
जितनी बिक्री उतना कलेक्शन
जीएसटी का सीधा रिश्ता वस्तुओं की बिक्री से हैं। वस्तु की बिक्री जितनी अधिक होगी, जीएसटी कलेक्शन उतना ही अधिक होगा। आम जनजवीन से जुड़े आइटम की दरों में कटौती से इनकी बिक्री बढ़ी जिससे जीएसटी कलेक्शन भी बढ़ा।
विशेषज्ञ अब जीएसटी 3.0 की चर्चा करने लगे हैं। माना जा रहा है कि जीएसटी 3.0 में पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में शामिल किया जा सकता है। रूस-यूक्रेन युद्ध व पश्चिम एशिया के हालात को देखते हुए जीएसटी 3.0 में पेट्रोल-डीजल को जीएसटी में शामिल करने का दबाव राज्यों पर पड़ सकता है। हालांकि जानकारों का कहना है कि इस काम में कम से कम एक साल का समय लग सकता है।
