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दक्षिण अमेरिका में तांबे का खजाना तलाशेगा भारत, देश की मिनरल सिक्योरिटी को मिलेगी ताकत; ये कंपनी निकालेगी कॉपर

Published: Tue, 22 Sep 2026 12:41 PM (IST)

हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) ने चिली में ड्यू डिलिजेंस के लिए चार कॉपर ब्लॉक चुने हैं और कोडेल्को के साथ ...और पढ़ें

दक्षिण अमेरिकी देश में तांबा निकालेगी ये भारतीय कंपनी

दक्षिण अमेरिकी देश में तांबा निकालेगी ये भारतीय कंपनी

HighLights

  1. चिली में हिंदुस्तान कॉपर ने चार कॉपर ब्लॉक चुने

  2. कोडेल्को के साथ जॉइंट वेंचर बनाने पर काम जारी है

  3. उत्पादन शुरू होने में छह से आठ साल लग सकते हैं

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। चिली में ड्यू डिलिजेंस (गहराई से जांच-पड़ताल) के लिए चार कॉपर ब्लॉक चुने गए हैं। सरकारी कंपनी हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए चिली की स्ट्रैटेजिक पार्टनर कंपनी कोडेल्को (Codelco) के साथ मिलकर एक जॉइंट वेंचर बनाने पर काम कर रही है।
हिंदुस्तान कॉपर के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर अनुपम मिश्रा ने कहा कि ट्रांजैक्शन एडवाइजर से उम्मीद है कि वह अगले दो-तीन महीनों में इन चार ब्लॉकों में मौजूद भंडार (रिजर्व) पर रिपोर्ट सौंप देगा।

रिसोर्स और रिजर्व

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मिश्रा के मुताबिक कुछ चीजें अभी स्टडी के स्टेज पर हैं। अगर इनमें से कोई भी ब्लॉक पूरी तरह तैयार (मैच्योर) ब्लॉक निकलता है, तो प्रोडक्शन शुरू होने में छह से आठ साल लग सकते हैं। यह देश की मिनरल सिक्योरिटी के लिए कंपनी के भंडार में रिसोर्स और रिजर्व जोड़ने जैसा है।

पिछले साल हुआ था समझौता

भारत की एकमात्र वर्टिकली इंटीग्रेटेड कॉपर प्रोड्यूसर कंपनी हिंदुस्तान कॉपर, जिसका हेडक्वार्टर कोलकाता में है, देश की लॉन्ग-टर्म मिनरल सिक्योरिटी को मजबूत करने के लिए चिली की सरकारी कॉपर माइनिंग कंपनी कोडेल्को के साथ मिलकर विदेशी रिसोर्स तलाश रही है।
हिंदुस्तान कॉपर ने पिछले साल अप्रैल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चिली के राष्ट्रपति गेब्रियल बोरिक की मौजूदगी में कोडेल्को के साथ एक समझौता किया था।

कोडेल्को के साथ एग्रीमेंट का मकसद

कोडेल्को के साथ एग्रीमेंट का मकसद जानकारी और विशेषज्ञता साझा करके जॉइंट एक्सप्लोरेशन, माइनिंग और मिनरल बेनिफिशिएशन (खनिज प्रोसेसिंग) की पहचान करना और उन्हें आगे बढ़ाना है।
मिश्रा के अनुसार चिली में चार ब्लॉक शॉर्टलिस्ट किए गए हैं और आगे का काम किया जाना है। इसे अगले लेवल पर ले जाने के लिए सबसे पहले कोडेल्को के साथ एक जॉइंट वेंचर कंपनी बनानी होगी।

जॉइंट वेंचर पर काम जारी

जॉइंट वेंचर बनाने का काम चल रहा है, क्योंकि इसमें दोनों देशों के कई स्टेकहोल्डर शामिल होंगे। इसलिए, एक सही कानूनी फ्रेमवर्क पर भी काम होगा। मिश्रा ने कहा कि इस प्रोजेक्ट के लिए बड़े निवेश की जरूरत है, इसलिए निवेश की क्षमता और रिस्क डायवर्सिफिकेशन के आधार पर दूसरी इच्छुक भारतीय PSU भी इस वेंचर में शामिल हो सकती हैं।

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