245 कंपनियों के 'बलिदान' से आज ही के दिन 70 साल पहले हुई थी LIC की शुरुआत, बैलगाड़ी से जाते थे एजेंट; पढ़ें दिलचस्प इतिहास
भारत में बीमा का इतिहास 6000 साल पुराना माना जाता है, जिसकी आधुनिक शुरुआत 1818 में हुई थी। 1956 में, ...और पढ़ें

आज ही के दिन शुरू हुई थी LIC (AI फोटो)
HighLights
भारत में बीमा की आधुनिक शुरुआत 1818 में हुई
1956 में LIC की स्थापना 245 कंपनियों के विलय से हुई
शुरुआती LIC एजेंट बैलगाड़ियों से ग्रामीण क्षेत्रों में जाते थे
नई दिल्ली। बीमा का इतिहास बहुत पुराना है। माना जाता है कि इंसानों के इतिहास जितना ही पुराना बीमा का इतिहास है। जो सोच आज के लोगों नुकसान और आपदा से खुद को सुरक्षित रखने के लिए प्रेरित करती है, वही सोच आदिमानवों में भी थी। माना जाता है कि वे भी आग, बाढ़ और जान-माल के नुकसान जैसे बुरे नतीजों से बचना चाहते थे और सुरक्षा पाने के लिए कुछ न कुछ त्याग करने को तैयार रहते थे।
हालाँकि बीमा का कॉन्सेप्ट हाल के समय में, खासकर औद्योगिक युग के बाद – यानी पिछली कुछ सदियों में – डेवलप हुआ है, फिर भी इसकी शुरुआत लगभग 6000 साल पहले की मानी जाती है। मगर भारत में बीमा कैसा शुरू हुआ और कैसे वजूद में आई भारत की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी (LIC History)? ये कहानी काफी दिलचस्प है।
ऐसे हुई बीमा की शुरुआत
भारत में जीवन बीमा अपनी मॉडर्न फॉर्म में 1818 में इंग्लैंड से आया। कोलकाता में यूरोपियंस द्वारा शुरू की गई 'ओरिएंटल लाइफ इंश्योरेंस कंपनी' भारतीय धरती पर पहली जीवन बीमा कंपनी थी, जो आज भी भारत की सबसे पुरानी बीमा कंपनी है। उस समय बीमा कंपनियाँ यूरोपीय समुदाय की जरूरतों को पूरा करने के मकसद से बनाई गई थीं और ये कंपनियाँ भारतीयों का बीमा नहीं करती थीं।
हालाँकि, बाद में बाबू मुत्तीलाल सील जैसी जानी-मानी हस्तियों की कोशिशों से विदेशी जीवन बीमा कंपनियों ने भारतीयों का बीमा करना शुरू किया। लेकिन तब भी भारतीयों को कमतर आंका जाता था और उनसे बहुत ज्यादा प्रीमियम लिया जाता था।
एक के बाद एक कंपनियों की शुरुआत
1870 में 'बॉम्बे म्यूचुअल लाइफ एश्योरेंस सोसाइटी' पहली भारतीय जीवन बीमा कंपनी के तौर पर शुरू हुई, जिसने सामान्य रेट पर भारतीयों का बीमा करना शुरू किया। देशभक्ति के जज्बातों से प्रेरित और भी बीमा कंपनियाँ शुरू की गयीं। 'भारत इंश्योरेंस कंपनी' (1896) के बाद 1906 में मद्रास में 'यूनाइटेड इंडिया', कलकत्ता में 'नेशनल इंडियन' और 'नेशनल इंश्योरेंस' और लाहौर में 'को-ऑपरेटिव एश्योरेंस' की स्थापना हुई।
फिर 1907 में, कोलकाता में रवींद्रनाथ टैगोर के घर 'जोरासांको' के एक कमरे में 'हिंदुस्तान को-ऑपरेटिव इंश्योरेंस कंपनी' की शुरुआत हुई। वहीं 'इंडियन मर्केंटाइल', 'जनरल एश्योरेंस' और 'स्वदेशी लाइफ' भी इसी दौरान स्थापित होने वाली कुछ कंपनियाँ रहीं।
1912 में आया बड़ा बदलाव
बता दें कि 1912 तक भारत में बीमा कारोबार के लिए कोई कानून नहीं था। फिर 1912 में 'लाइफ इंश्योरेंस कंपनीज एक्ट' और 'प्रोविडेंट फंड एक्ट' लाए गए। 'लाइफ इंश्योरेंस कंपनीज एक्ट, 1912' के तहत यह जरूरी कर दिया गया कि कंपनियों की प्रीमियम दर टेबल्स और समय-समय पर होने वाले वैल्यूएशन किसी बीमा गणितज्ञ द्वारा प्रमाणित हों।
लेकिन इस कानून ने कई मामलों में विदेशी और भारतीय कंपनियों के बीच भेदभाव किया, जिससे भारतीय कंपनियाँ नुकसान में आ गईं।
कब उठी राष्ट्रीयकरण की मांग?
1938 तक बीमा कंपनियों की संख्या बढ़कर 176 और कुल कारोबार 298 करोड़ रुपये तक पहुँच गया। इस दौरान कई कमजोर कंपनियाँ भी शुरू की गईं, जो नाकाम रहीं। फिर इंश्योरेंस एक्ट 1938 पहला ऐसा कानून रहा जिसने न सिर्फ जीवन बीमा बल्कि गैर-जीवन बीमा को भी कंट्रोल किया और इंश्योरेंस कारोबार पर सरकार का कड़ा नियंत्रण स्थापित किया।
फिर मांग उठी जीवन बीमा उद्योग के राष्ट्रीयकरण की। इस मांग को 1944 में और बल तब मिला जब लेजिस्लेटिव असेंबली में 'लाइफ इंश्योरेंस एक्ट 1938' में संशोधन के लिए एक बिल पेश किया गया। हालाँकि, भारत में जीवन बीमा का राष्ट्रीयकरण काफी बाद में, 19 जनवरी 1956 को हुआ।
1 सितंबर 1956 का ऐतिहासिक दिन
1956 में बीमा कंपनियों के राष्ट्रीयकरण के समय भारत में लगभग 154 भारतीय इंश्योरेंस कंपनियाँ, 16 विदेशी कंपनियाँ और 75 प्रोविडेंट फंड कंपनियाँ काम कर रही थीं। राष्ट्रीयकरण दो चरणों में हुआ। पहले एक अध्यादेश से कंपनियों का प्रबंधन अपने हाथ में लिया गया और बाद में एक और बिल के जरिए उनका मालिकाना हक भी ले लिया गया।
संसद ने 19 जून 1956 को 'लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन एक्ट' पास किया और आज ही के दिन 70 साल पहले 1 सितंबर 1956 को 'लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया' (LIC) की स्थापना हुई। इसका मकसद जीवन बीमा को और ज्यादा फैलाना था, खासकर ग्रामीण इलाकों में, ताकि देश के सभी बीमा-योग्य लोगों तक पहुँचा जा सके।
बैलगाड़ी से जाते थे एजेंट
1 सितंबर 1956 को लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (LIC) बनाने के लिए कुल 245 इंश्योरेंस कंपनियों और प्रोविडेंट सोसायटियों का विलय किया गया था। एलआईसी के इतिहास में 'बैलगाड़ी एजेंट' का जिक्र इसकी शुरुआत के सुनहरे और संघर्षपूर्ण दिनों से जुड़ा है। जब 1 सितंबर 1956 को एलआईसी की स्थापना हुई थी, तब आज की तरह इंटरनेट, मोबाइल या आधुनिक गाड़ियां नहीं थीं।
उस दौर में एलआईसी के एजेंट ग्रामीण भारत के दूर-दराज के इलाकों में लोगों का बीमा करने और उन्हें आर्थिक सुरक्षा देने के लिए बैलगाड़ियों, साइकिलों या पैदल ही घर-घर पहुंचते थे।
