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टाटा ने खेला बड़ा दांव! पहली बार जापान की दिग्गज कंपनी के लिए बनाएगी सस्ती और दमदार SUV

Published: Mon, 05 Oct 2026 05:19 PM (IST)Updated: Mon, 05 Oct 2026 05:49 PM (IST)

जापानी कार कंपनी ने अपनी अगली पीढ़ी की गाड़ियां बनाने और लागत कम करने के लिए टाटा टेक्नोलॉजीज के साथ ...और पढ़ें

होंडा ने अगली पीढ़ी की कारों के लिए टाटा टेक्नोलॉजीज से मिलाया हाथ, भारत में बढ़ेगा प्रभाव (AI फोटो)

होंडा ने अगली पीढ़ी की कारों के लिए टाटा टेक्नोलॉजीज से मिलाया हाथ, भारत में बढ़ेगा प्रभाव (AI फोटो)

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बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। ऑटोमोटिव इंजीनियरिंग के क्षेत्र में भारत का वैश्विक प्रभाव बढ़ रहा है और इसका एक बड़ा सबूत यह है कि जापानी कार कंपनी होंडा अपनी अगली पीढ़ी की गाड़ियां बनाने के लिए टाटा टेक्नोलॉजीज के साथ साझेदारी कर रही है। यह सहयोग एक बहुत ही खास रणनीतिक बदलाव को दिखाता है। जापान, जो अपनी एडवांस्ड रिसर्च और तकनीकी श्रेष्ठता के लिए दुनिया भर में मशहूर है, अब डेवलपमेंट को आसान बनाने, लागत कम करने और मार्केट में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए भारतीय विशेषज्ञता का सहारा ले रहा है।

होंडा अपनी उस पुरानी अकेले काम करने की सख्त नीति को छोड़कर, टाटा टेक्नोलॉजीज की गहरी स्थानीय समझ और क्षमताओं का लाभ उठाकर गाड़ियों के डेवलपमेंट में लगने वाले समय को आधा (लगभग पांच साल से घटाकर ढाई साल) करने और लागत को 20 प्रतिशत तक कम करने का टारगेट बना रही है।

एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के एक साथ कैसे बिठा रही रणनीतिक तालमेल

कई दशकों से, होंडा अपने फाउंडर सोइचिरो होंडा की आजाद सोच वाली विरासत को आगे बढ़ा रही है और दुनिया भर में इंजीनियरिंग के शानदार नमूने पूरी तरह से खुद ही बनाती रही है। हालांकि, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) से 12 बिलियन डॉलर ( करीब 1,15,604 करोड़ रुपये) से ज्यादा के संभावित नुकसान और कड़ी टक्कर का सामना करते हुए, कंपनी अपनी ग्लोबल स्ट्रैटेजी पर नए सिरे से सोच रही है।

गाड़ी बनाने का काम टाटा टेक्नोलॉजीज को सौंपकर, होंडा जापानी टेक्नोलॉजी की सटीकता और भारतीय लागत-दक्षता (cost-efficiency) के बीच की खाई को पाट रही है। टाटा टेक्नोलॉजीज को खास तौर पर इसलिए चुना गया क्योंकि उनका लोकल सप्लायर्स का बड़ा नेटवर्क है और वे भारतीय ग्राहकों की पसंद और खर्च करने की आदतों को अच्छी तरह समझते हैं। जहां टाटा डिजाइन और लोकल सोर्सिंग का काम संभालेगी, वहीं होंडा क्वालिटी स्टैंडर्ड्स और कनेक्टिविटी और ड्राइवर-असिस्टेंस सिस्टम जैसी मुख्य टेक्नोलॉजीज़ पर कड़ी नजर रखेगी।

अंदरूनी गतिरोध को खत्म करना

यह पार्टनरशिप एक अहम अंदरूनी रुकावट को दूर करती है जिसने इस क्षेत्र में होंडा की तरक्की को रोक रखा था। अंदरूनी रॉयटर्स एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक, होंडा की जापानी और भारतीय मैनेजमेंट टीमों के बीच एक रणनीतिक गतिरोध पैदा हो गया था। जापानी अधिकारी एकरूपता और क्वालिटी बनाए रखने के लिए पुराने, पारंपरिक सप्लायर्स को बनाए रखने के पक्ष में थे, जबकि भारतीय टीम लागत कम करने और डेवलपमेंट में तेजी लाने के लिए लोकल सप्लायर्स की वकालत कर रही थी।

टाटा टेक्नोलॉजीज एक बीच का रास्ता निकालती है, जो भारतीय बाजार की जरूरत के हिसाब से लोकल सप्लाई चेन तक पहुंच देती है और साथ ही जापानी मैनेजमेंट की उम्मीद के मुताबिक इंजीनियरिंग की बारीकियों का भी ध्यान रखती है। होंडा के आधिकारिक बयानों में इन आपसी चर्चाओं को "असहमति" बताने से इनकार किया गया है; इसके बजाय कहा गया है कि कंपनी क्वालिटी और कीमत के बीच बेहतर संतुलन बनाने के लिए अपनी पेशकशों को नए सिरे से परिभाषित कर रही है)।

दुनिया के तीसरे सबसे बड़े बाजार में फिर से खड़ा होना

दुनिया के तीसरे सबसे बड़े कार बाजार में अपनी मौजूदगी के लिए होंडा का भारतीय इंजीनियरिंग पर भरोसा एक अहम समय पर आया है। भारत में इस जापानी कार निर्माता का मार्केट शेयर एक दशक पहले के 7.3 प्रतिशत के पीक से गिरकर आज सिर्फ 1.3% रह गया है। जापान या ग्लोबल बाज़ारों के लिए डिजाइन की गई कारों में बदलाव करके, होंडा ने अनजाने में ऐसी गाड़ियां पेश कीं जिन्हें भारतीय ग्राहकों ने टाटा मोटर्स और महिंद्रा जैसी ज्यादा फीचर्स वाली घरेलू प्रतिस्पर्धियों की तुलना में जरूरत से ज्यादा इंजीनियरिंग वाली और बहुत महंगी माना।

यह मानते हुए कि कंपनी अपने प्रतिस्पर्धियों से पीछे छूट रही है, होंडा के प्रेसिडेंट तोशिहिरो मिबे ने हाल ही में कहा कि कार निर्माता कंपनी को भारत में अपने कारोबार को "पूरी तरह से अलग आधार पर" फिर से खड़ा करने की जरूरत है।

रोडमैप: कॉम्पैक्ट SUV और एक्सपोर्ट की संभावना

जापान और भारत के इस सहयोग से बनने वाला पहला बड़ा प्रोडक्ट एक बेसब्री से हो रहे इंतजार वाली सब-4-मीटर कॉम्पैक्ट SUV होगी। यह एक ऐसा सेगमेंट है जिसमें जबरदस्त कॉम्पिटिशन है और जहां होंडा की मौजूदगी अभी सीमित है। 2028 में लॉन्च होने वाली इस कॉम्पैक्ट गाड़ी के बाद एक बड़ी मिड-साइज SUV आएगी और अंत में, होंडा की पारंपरिक मजबूती सेडान को फिर से मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।

अगर टाटा टेक्नोलॉजीज़ स्थानीय स्तर पर बनी गाड़ियों की इस पहली खेप के साथ क्वालिटी, बिक्री और मुनाफ़े के मामले में सफल रहती है, तो यह पार्टनरशिप घरेलू बिक्री से आगे बढ़ सकती है। सफल रोलआउट भारत को होंडा के लिए सिर्फ़ एक कंज्यूमर मार्केट के तौर पर ही नहीं, बल्कि जापानी कंपनी की भविष्य की ग्लोबल लाइनअप के लिए भारत में इंजीनियर की गई, जबरदस्त कॉम्पिटिशन वाली मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब के तौर पर भी स्थापित करेगा।

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