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25 पैसे का पेट्रोल, 20 पैसे का दूध, 88 रुपये का सोना, 1947 में कितनी सस्ती थी दुनिया; आज 'मल्टीबैगर' हो गईं कीमतें

Updated: Sat, 15 Aug 2026 01:18 PM (IST)

आजादी के बाद से भारत में रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है, जहां 1947 में पेट्रोल 25 पैसे और सोना 88 रुपये प्रति 10 ग्राम था, वहीं 2026 में ये क्रमशः 100 रुपये और 1.5 लाख रुपये से अधिक हो गए हैं।

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HighLights

  1. 1947 में पेट्रोल 25 पैसे, दूध 12 पैसे, सोना 88 रुपये था।

  2. 2026 में पेट्रोल 100 रुपये, दूध 60 रुपये, सोना 1.5 लाख रुपये।

  3. आजादी के बाद रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में भारी वृद्धि हुई।

नई दिल्ली। आज भारत 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। आजादी के बाद से अब तक रोजमर्रा की कई चीजों की कीमतें इतनी कम थीं कि सुनकर यकीन करना मुश्किल हो जाता है। 1947 में पेट्रोल करीब 25-27 पैसे प्रति लीटर, फुल क्रीम दूध करीब 12 पैसे प्रति लीटर और 10 ग्राम सोना करीब 88.62 रुपये में मिलता था। आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है।

पेट्रोल 100 रुपये के आसपास या उससे ऊपर है, दूध 60 रुपये से अधिक प्रति लीटर बिक रहा है और सोने का भाव 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच चुका है। आइए जानते हैं कि 1947 से अब तक रोजमर्रा से जुड़ी कौन सी चीजें कितनी महंगी हो गई हैं।

1947 में 25 पैसे में मिलता था पेट्रोल

आज पेट्रोल की कीमत किसी भी परिवार के मासिक बजट का अहम हिस्सा है। लेकिन आजादी के दौर में एक लीटर पेट्रोल की कीमत करीब 25-27 पैसे बताई जाती है। अलग-अलग ऐतिहासिक स्रोतों में इसमें थोड़ा अंतर मिलता है। 2026 में दिल्ली में पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर से ऊपर बना हुआ है और 15 अगस्त को प्रमुख शहरों में ईंधन कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

यानी जिस पेट्रोल की एक लीटर मात्रा के लिए तब एक रुपये से भी कम खर्च होता था, आज उसके लिए 100 रुपये से ज्यादा देने पड़ सकते हैं। हालांकि केवल कीमतों की तुलना से उस दौर की वास्तविक क्रय शक्ति का पूरा अंदाजा नहीं लगाया जा सकता, क्योंकि तब लोगों की आय और अर्थव्यवस्था का आकार भी आज से बिल्कुल अलग था।

दूध की कीमत भी कई गुना बढ़ी

1947 के लिए उपलब्ध पुराने मूल्य-संदर्भों में फुल क्रीम दूध की कीमत करीब 12 पैसे प्रति लीटर बताई गई है। कुछ लोकप्रिय ऐतिहासिक सूचियों में 20 पैसे का आंकड़ा भी मिलता है, इसलिए पुराने आंकड़ों में अंतर दिखाई देता है।

आज दिल्ली में दूध की खुदरा कीमत करीब 60 रुपये प्रति लीटर के आसपास है। मई 2026 में मदर डेयरी ने भी दिल्ली-NCR में दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की थी। कंपनी ने इसके पीछे किसानों से दूध खरीदने की बढ़ी लागत समेत अन्य इनपुट कॉस्ट को वजह बताया था।

इससे साफ है कि दूध जैसी रोजमर्रा की वस्तु की कीमत में भी आजादी के बाद लंबी अवधि में बड़ा बदलाव आया है।

88.62 रुपये का सोना अब 1.5 लाख के पार

सबसे दिलचस्प तुलना सोने की है। 1947 में 10 ग्राम सोने की कीमत करीब 88.62 रुपये बताई जाती है। 2023 में यही कीमत करीब 59,000 रुपये तक पहुंच चुकी थी और 2025 में सोना 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर गया।

अब 2026 में सोने की तेजी ने पुराने सारे आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया है। 14 अगस्त 2026 को भारतीय बाजार में सोने की कीमत करीब 1.52 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई। पिछले कुछ दिनों में घरेलू सोने की कीमत में करीब 7 फीसदी की तेजी भी दर्ज की गई।

इस हिसाब से 1947 के 88.62 रुपये से 1.52 लाख रुपये तक का सफर बेहद बड़ा है। हालांकि इसे सीधे निवेश का रिटर्न मानना सही नहीं होगा, क्योंकि सोने की कीमत पर वैश्विक बाजार, डॉलर, ब्याज दरें, आयात शुल्क और भू-राजनीतिक परिस्थितियों जैसे कई कारकों का असर पड़ता है।

चावल से लेकर साइकिल तक, बदल गई कीमतों की तस्वीर

आजादी के शुरुआती दौर में सिर्फ पेट्रोल, दूध और सोना ही सस्ते नहीं थे। पुराने मूल्य आंकड़ों के मुताबिक 1947 में चावल करीब 12 पैसे प्रति किलो और आलू करीब 25 पैसे प्रति किलो के आसपास थे। एक साधारण साइकिल की कीमत करीब 20 रुपये बताई जाती है।

समय के साथ महंगाई, उत्पादन लागत, मजदूरी, टैक्स, परिवहन खर्च और लोगों की आय में बदलाव के साथ इन वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ती गईं।

क्या 1947 का 1 रुपया आज हजारों रुपये के बराबर है?

पुराने समय की कीमत देखकर अक्सर यह सवाल उठता है कि आखिर तब का 1 रुपया आज कितना होता। इसका जवाब सिर्फ कीमतों को आज की कीमत से गुणा करके नहीं निकाला जा सकता। महंगाई मापने के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक जैसे अलग-अलग आर्थिक पैमाने इस्तेमाल किए जाते हैं।

इसके अलावा 1947 में भारत की अर्थव्यवस्था, औसत आय, रोजगार का ढांचा और उपभोग की आदतें आज से काफी अलग थीं। इसलिए पेट्रोल या सोने की कीमत की सीधी तुलना हमें बदलाव का अंदाजा तो देती है, लेकिन उस समय की वास्तविक क्रय शक्ति की पूरी तस्वीर नहीं बताती।

डिस्क्लेमर; यह खबर मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से बनाई गई है। कीमतों में तथ्यात्मक बदलाव एवं अंतर संभव है।