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    अब फ्यूल पंप पर नहीं होगा कोई खेल, सरकार ने सख्त किए CNG-LNG के नियम! कोई नहीं लगा पाएगा 'चूना'

    Updated: Sun, 24 May 2026 03:12 PM (IST)

    केंद्र सरकार ने 'लीगल मेट्रोलॉजी (सरकार द्वारा अनुमोदित परीक्षण केंद्र) नियम, 2013' में संशोधन किया है। इसका उद्देश्य ईंधन वितरण प्रणालियों के सत्यापन ...और पढ़ें

    सरकार ने सख्त किए CNG-LNG के नियम

    सरकार ने सख्त किए CNG-LNG के नियम

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    आईएएनएस, नई दिल्ली। कार्यक्षमता को बेहतर बनाने और स्वच्छ ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के मकसद से केंद्र सरकार ने रविवार को 'लीगल मेट्रोलॉजी (सरकार द्वारा अनुमोदित परीक्षण केंद्र) नियम, 2013' में संशोधन किया है। इसका मकसद भारत के लीगल मेट्रोलॉजी इकोसिस्टम को और मजबूत करने के अलावा देश में वजन और माप के वेरिफिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करना है। इस संशोधन की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें सरकारी-अनुमोदित परीक्षण केंद्रों (जीएटीसी) के दायरे का विस्तार किया गया है, ताकि अतिरिक्त ईंधन वितरण प्रणालियों के सत्यापन और पुनः सत्यापन को भी इसमें शामिल किया जा सके।

    क्यों उठाया गया ये कदम?

    दरअसल कई ऐसे मामले सामने आए, जिसमें पेट्रोल पंप पर फ्यूल कम देने जैसी गड़बड़ियों का खुलासा हुआ। इसी के मद्देनजर सरकार ने लीगल मेट्रोलॉजी नियम, 2013 में बदलाव कर दिया है। अब उम्मीद की जा रही कि इससे वेरिफिकेशन सर्विसेज की उपलब्धता बढ़ेगी।
    इस बदलाव से ये भी सुनिश्चित होगा कि फ्यूल मापतौल में कोई घपलेबाजी ना हो और सिस्टम मजबूत बने। सरकार ने पेट्रोल-डीजल के अलावा सीएनजी, एलपीजी, एलएनजी और हाइड्रोजन की क्वांटिटी की जांच हाई-टेक सरकारी सेंटर्स पर करने का फैसला किया है।

    राज्य सरकारों को मिलेगा अधिकार

    इन संशोधनों के तहत राज्य सरकारों को यह अधिकार दिया गया है कि वे अपने-अपने नियमों के अनुसार जीएटीसी के माध्यम से सत्यापन के लिए वजन और माप की अतिरिक्त श्रेणियों को अधिसूचित कर सकें।
    पेट्रोल और डीजल डिस्पेंसर के सत्यापन के लिए शुल्क 5 हजार रुपए प्रति नोजल निर्धारित किया गया है, जबकि सीएनजी, एलपीजी, एलएनजी और हाइड्रोजन डिस्पेंसर के लिए यह शुल्क 10 हजार रुपए प्रति नोजल तय किया गया है।

    डिस्पेंसिंग सिस्टम की पांच श्रेणियां शामिल

    संशोधित नियमों के तहत उन उपकरणों की सूची में डिस्पेंसिंग सिस्टम की पांच श्रेणियां जोड़ी गई हैं, जिनका सत्यापन जीएटीसी द्वारा किया जा सकेगा। इनमें पेट्रोल/डीजल डिस्पेंसर, सीएनजी डिस्पेंसर, एलपीजी डिस्पेंसर, एलएनजी डिस्पेंसर और हाइड्रोजन डिस्पेंसर शामिल हैं।
    उपभोक्ता मामलों के विभाग ने एक बयान में कहा कि इन उपकरणों को शामिल किए जाने के बाद जीएटीसी अब 'लीगल मेट्रोलॉजी' (वैधानिक माप-तौल) ढांचे के तहत वजन और माप की कुल 23 श्रेणियों का सत्यापन और पुनः सत्यापन कर सकेंगे।

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    और क्या होगा फायदा?

    जीएटीसी ऐसी अनुमोदित सुविधाएं हैं, जिनके पास 'लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट' और इससे संबंधित नियमों के तहत निर्धारित वजन और माप के वेरिफिकेशन और रीवेरिफिकेशन का कार्य करने के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध है।
    योग्य निजी प्रयोगशालाओं और उद्योगों को शामिल करके जीएटीसी ढांचा देश की सत्यापन क्षमता का विस्तार करने तथा सत्यापन सेवाओं तक पहुंच बेहतर बनाने में मदद करता है।

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