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    अक्षय तृतीया से पहले बैंकों ने रोका सोने-चांदी का आयात, बंदरगाहों पर फंसा 5 टन से ज्यादा सोना; आएगी तूफानी तेजी!

    Updated: Fri, 17 Apr 2026 02:33 PM (IST)

    भारत में सोने और चांदी के आयात (Gold Silver Import) पर अनिश्चितता छाई है, क्योंकि सरकारी मंजूरी में देरी के कारण बैंकों ने नए ऑर्डर रोक दिए हैं। 5 टन ...और पढ़ें

    HighLights

    1. सरकारी मंजूरी में देरी से सोना-चांदी का आयात रुका।

    2. 5 टन से अधिक सोना बंदरगाहों पर फंसा हुआ है।

    3. त्योहारों पर सोने-चांदी की कीमतों में वृद्धि की आशंका।

    नई दिल्ली। Gold Silver Price: अगर आप सोना या फिर चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं तो यह खबर आपके काम की है। दरअसल, भारत में सोने और चांदी के आयात को लेकर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। सरकारी मंजूरी में देरी के कारण बैंकों ने फिलहाल इन कीमती धातुओं के नए आयात ऑर्डर (Gold Silver Order) रोक दिए हैं। इससे न केवल घरेलू बाजार प्रभावित हो रहा है, बल्कि इसका असर वैश्विक कीमतों और भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

    न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस स्थिति की मुख्य वजह सरकार की ओर से नई अनुमति जारी न होना है। आमतौर पर हर वित्त वर्ष की शुरुआत में वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाला विदेशी व्यापार महानिदेशालय (DGFT) एक आदेश जारी करता है। इसमें उन बैंकों की सूची होती है जिन्हें भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा सोने और चांदी का आयात करने की अनुमति दी जाती है।

    पिछला आदेश अप्रैल 2025 में जारी हुआ था, जिसकी वैधता 31 मार्च 2026 तक थी। इसके बाद से अब तक नया आदेश जारी नहीं हुआ है। ऐसे में बैंक नई खरीदारी करने से बच रहे हैं।

    बंदरगाहों पर फंसा सोना-चांदी

    सूत्रों के मुताबिक, मंजूरी के अभाव में 5 टन से अधिक सोना और लगभग 8 टन चांदी कस्टम (Gold and Silver Stuck in Port) क्लियरेंस के बिना बंदरगाहों पर ही फंसी हुई है। मुंबई और कोलकाता के बुलियन कारोबारियों का कहना है कि जब पहले से आयात की गई खेप ही क्लियर नहीं हो पा रही है, तो नए ऑर्डर देने का कोई मतलब नहीं है।

    भारत में साल 2025 के दौरान सोने की मांग घटकर लगभग 710.9 मीट्रिक टन रह गई, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे कम है। वर्तमान में बाजार पुराने स्टॉक और एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) से हो रही बिक्री पर निर्भर है, लेकिन इनमें भी निकासी बढ़ रही है।

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    अगर जल्द आयात शुरू नहीं हुआ, तो आपूर्ति में कमी आ सकती है। इसका असर खासतौर पर त्योहारों के समय दिख सकता है। अक्षय तृतीया (Gold Price on akshaya tritiya) जैसे बड़े सोना खरीदने वाले पर्व के बाद कीमतों में प्रीमियम बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    उद्योग जगत ने की ये मांग

    बुलियन और ज्वेलरी उद्योग से जुड़े लोग सरकार से जल्द स्पष्टता की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो बाजार में अस्थिरता और कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

    सोने और चांदी की कम मांग से भारत का आयात घटेगा, जिससे व्यापार घाटा कम हो सकता है। इसका सकारात्मक असर रुपये पर पड़ सकता है, जो इस साल एशिया की कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल रहा है।

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