मोबाइल फोन के बाद अब सेमीकंडक्टर निर्माण का बड़ा निर्माता बनेगा भारत, 1.27 लाख करोड़ की दी जाएगी आर्थिक सहायता
भारत मोबाइल फोन के बाद अब सेमीकंडक्टर निर्माण में बड़ा निर्माता बनने जा रहा है, जिसके लिए सेमीकॉन 2.0 के ...और पढ़ें

HighLights
सेमीकॉन 2.0 के तहत 1.27 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान।
भारत में चिप उत्पादन का आत्मनिर्भर इकोसिस्टम बनेगा।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में हजारों नए रोजगार सृजित होंगे।
राजीव कुमार (जागरण ब्यूरो) नई दिल्ली। मोबाइल फोन के बाद अब सेमीकंडक्टर सेक्टर में भारत बड़ा निर्माता बनने जा रहा है। सोमवार को सेमीकान 2.0 के तहत 1.27 लाख करोड़ रुपए के प्रविधान की अधिसूचना जारी की गई। इस राशि से सेमीकंडक्टर सेक्टर में जुड़े निवेशकों को तय नियम के मुताबिक आर्थिक मदद दी जाएगी। सेमीकान 1.0 के तहत इस सेक्टर की कंपनियों को भारत में निर्माण शुरू करने के लिए 76,000 करोड़ रुपए का प्रविधान किया गया था। सेमीकान 1.0 के तहत वर्ष 2022 में निर्माण कार्य शुरू हुआ था और अब तक देश में तीन कंपनियां विभिन्न प्रकार के चिप का निर्माण शुरू कर चुकी है।
इलेक्ट्रानिक्स व आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि अगले एक-दो साल में भारत अपनी जरूरत का 10 प्रतिशत चिप निर्माण घरेलू स्तर पर करने लगेगा। वाशिंग मशीन से लेकर कई औद्योगिक सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले चिप का निर्माण भारत में शुरू हो चुका है।
वैष्णव ने बताया कि पिछले चार सालों में 85,000 हजार इंजीनियर को सेमीकान सेक्टर के लिए प्रशिक्षित किया जा चुका है और जिस हिसाब से भारत सेमीकान सेक्टर के उत्पादन में आगे बढ़ रहा है, उसे देखते हुए अगले कुछ सालों में एक लाख इंजीनियर की जरूरत होगी। चिप के निर्माण के लिए देश में पूरा इकोसिस्टम तैयार करना होता है जिनमें केमिकल व गैस निर्माण से लेकर विभिन्न प्रकार के पार्ट्स शामिल हैं। इन सबको मिला दिया जाए तो सेमीकंडक्टर सेक्टर में हर साल 50-60 हजार प्रत्यक्ष रोजगार निकलने की संभावना है। 2032 तक दुनिया में सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए 10 लाख इंजीनियर की जरूरत होगी और इसका बड़ा सप्लायर भारत ही होगा।
इलेक्ट्रानिक्स व आईटी मंत्रालय के मुताबिक सेमीकान 2.0 के तहत छह सेक्टर में सरकारी मदद दी जाएगी। इनमें डिजाइन, मशीन व मैटेरियल, फैब सेटिंग, एटीएमपी ( असेंबलिंग, टेस्टिंग, मार्किंग, पैकेजिंग) और ओसैट (आउटसोर्स) सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (ओसैट), अनुसंधान व विकास, और टैंलेंट डेवलपमेंट शामिल हैं। सेमीकान 2.0 की अवधि छह साल की होगी इसके तहत 12 कंपनियां भारत में निवेश के लिए अपनी दिलचस्पी दिखा चुकी है।
सेमीकान 1.0 के तहत देश में चिप निर्माण का एक पूरा इको-सिस्टम तैयार होता दिख रहा है, इसलिए कंपनियां अगले 20-30 सालों की योजना को ध्यान में रखते हुए निवेश करने जा रही है। स्टार्टअप को भी इस स्कीम के तहत चिप निर्माण सेक्टर में हाथ आजमाने का मौका है। मंत्रालय का कहना है कि सेमीकान 2.0 का उद्देश्य देश में एक आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी चिप डिजाइनिंग व विनिर्माण इको-सिस्टम तैयार करना है।
