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    समंदर में रेयर अर्थ मेटल की खोज में निकला जापान, चीन के छूटे पसीने; निर्यात पर रोक लग अब ड्रैगन पीट रहा माथा!

    Updated: Mon, 12 Jan 2026 03:59 PM (GMT+05:30)

    जापान ने चीन पर निर्भरता कम करने के लिए समुद्र में दुर्लभ धातुओं की खोज का अभियान शुरू किया है। एक जापानी माइनिंग शिप मिनमिटोरी द्वीप के पास 6 किमी गह ...और पढ़ें

    समंदर में रेयर अर्थ मेटल की खोज में निकला जापान, चीन के छूटे पसीने; निर्यात पर रोक लग अब ड्रैगन पीट रहा माथा!

    समंदर में रेयर अर्थ मेटल की खोज में निकला जापान, चीन के छूटे पसीने; निर्यात पर रोक लग अब ड्रैगन पीट रहा माथा!

    HighLights

    1. जापान ने चीन पर निर्भरता घटाने का अभियान शुरू किया।

    2. समुद्र में 6 किमी गहराई से दुर्लभ धातुएं निकालेगा।

    3. यह दुनिया का पहला ऐसा समुद्री खनन प्रयास है।

    नई दिल्ली। रेयर अर्थ मेटल का सबसे बड़ा प्रोड्यूसर चीन की बादशाहत अब खत्म होने वाली है। 2025 में उसने रेयर अर्थ मेटल पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए थे। इसके बाद से अलग-अलग देशों ने रेयर अर्थ मेटल के प्रोडक्शन (Rare Earth Metal Production) को बढ़ाने और इस पर रिसर्च की अपनी कोशिशों को और तेज कर दिया है। इसी कड़ी में जापान ने एक बड़ा कमद उठाया है। इस कदम से चीन के होश उड़ गए हैं।

    दरअसल, जापान ने अपने रेयर अर्थ मेटल कार्यक्रम को तेज करते हुए समंदर में इसके खोज का नया अभियान शुरू कर दिया है।

    रेयर अर्थ मेटल की खोज में निकला जापानी जाहाज

    न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार एक जापानी माइनिंग शिप सोमवार को एक दूरदराज के कोरल एटोल के लिए रवाना हुआ। इसका काम दुर्लभ धातुओं से भरपूर कीचड़ की जांच करना है। यह टोक्यो की उस कोशिश का हिस्सा है जिसके तहत वह जरूरी खनिजों के लिए चीन पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है।

    टोक्यो से लगभग 1,900 किमी (1,200 मील) दक्षिण-पूर्व में मिनमिटोरी द्वीप के पास टेस्ट वेसल चिक्यू का यह एक महीने का मिशन, 6 किमी (4 मील) की गहराई से दुर्लभ-पृथ्वी समुद्री तल कीचड़ को लगातार एक जहाज पर उठाने का दुनिया का पहला प्रयास होगा। 130 क्रू और रिसर्चर्स वाला यह जहाज 14 फरवरी को पोर्ट पर लौटेगा।

    चीन पर निर्भरता को कम करने की कोशिश

    जापान, अपने पश्चिमी सहयोगियों की तरह, कारों, स्मार्टफोन और मिलिट्री इक्विपमेंट के प्रोडक्शन के लिए जरूरी मिनरल्स के लिए चीन पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है, यह कोशिश बीजिंग के साथ एक बड़े डिप्लोमैटिक विवाद के बीच और भी जरूरी हो गई है।

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    सरकार समर्थित प्रोजेक्ट के हेड शोइची इशी ने रॉयटर्स को बताया, "सात साल की लगातार तैयारी के बाद, हम आखिरकार कन्फर्मेशन टेस्ट शुरू कर सकते हैं। यह बहुत इमोशनल करने वाला है, जब हमारा जहाज शिजुओका के पोर्ट शहर से रवाना हुआ, जिसके बैकग्राउंड में बर्फ से ढका माउंट फूजी था।

    उन्होंने कहा, "अगर यह प्रोजेक्ट सफल होता है, तो यह जापान के रेयर अर्थ रिसोर्स प्रोक्योरमेंट में विविधता लाने में बहुत महत्वपूर्ण होगा। समुद्र तल से 6 किमी नीचे से मुख्य मिनरल्स को निकालना एक बड़ी टेक्नोलॉजिकल उपलब्धि होगी।"

    चीन ने एक्सपोर्ट पर लगाया बैन

    पिछले सप्ताह, चीन ने जापान की सेना के लिए बनाए गए उन सामानों के एक्सपोर्ट पर बैन लगा दिया, जिनका इस्तेमाल सिविलियन और मिलिट्री दोनों कामों के लिए होता है, जिसमें कुछ जरूरी मिनरल्स भी शामिल हैं।

    जापान ने चीन के डुअल-यूज बैन की निंदा की है, लेकिन बड़े बैन की रिपोर्ट पर कमेंट करने से मना कर दिया है, जिसे चीन ने न तो कन्फर्म किया है और न ही इनकार किया है। हालांकि, चीनी सरकारी मीडिया ने कहा है कि बीजिंग इस कदम पर विचार कर रहा था।

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